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Pilibhit News: पश्चिम एशिया में हो रहे युद्ध की तपिश से सीमेंट, टाइल्स और पेंट के दामों में लगी आग
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शहर के एक पेंट की दुकान पर रखा प्राइमर व पेंट की बाल्टी। संवाद
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प्राइमर, थिनर व तारपीन और भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में 10-15 प्रतिशत तक आया उछाल, कोयले पर बढ़े 10 हजार, ईंट की कीमतों में अभी नहीं हुआ इजाफा
पीलीभीत। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की तपिश का असर टाइल्स, सीमेंट, सरिया और पेंट की कीमतों पर भी पड़ने लगा है। इन सभी भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। इसके अप्रैल में दाम और बढ़ सकते हैं। हालांकि कोयला महंगा हो जाने से महंगाई की मार झेल रहे ईंट-भट्ठा स्वामियों ने फिलहाल ईंट पर दाम नहीं बढ़ाए हैं। अगर यही हाल रहा तो मजबूरी में ईंटों की कीमतें बढ़ाने की बात भट्ठा स्वामी कह रहे हैं।
टाइल्स कारोबारियों का कहना है कि युद्ध की वजह से टाइल्स प्लांंट पर एलएनजी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस वजह से कई प्लांट बंद हो गए हैं। टाइल्स की कीमतें तो बढ़ी हैं, आपूर्ति भी बाधित हो रही है। कारोबारी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि टाइल्स के दाम 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। 400 रुपये की आने वाली पेटी अब 440 की बिक रही है। प्लांट संचालकों ने 15 अप्रैल तक टाइल्स की बुकिंग बंद कर रखी है। अगर हालात सामान्य नहीं हुए तो आपूर्ति का संकट और बढ़ेगा। संवाद
कोयले पर बढ़े 10 हजार, झारखंड का कोयला भी महंगा
पश्चिम एशिया के हालातों ने ईंट-भट्ठा संचालकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कोयले के दाम तो बढ़ ही गए। अन्य सामग्री भी महंगी हो गई है। कारोबारियों ने बताया कि अमेरिका से आने वाले कोयले पर 10 हजार रुपये बढ़ गए हैं। पहले यह कोयला 15,500 रुपये प्रति टन था। अब 25,500 से 26 हजार रुपये तक बिक रहा है। कोयला आसानी से मिल भी नहीं रहा है। मजबूरी में झारखंड के झरिया का कोयला प्रयोग कर रहे हैं। इस कोयले को पहले तुड़वाना पड़ता है। इस पर भी दो हजार रुपये बढ़ गए हैं। झरिया से आने वाला कोयला 15 हजार रुपये प्रति टन बिक रहा है। पहले इसकी कीमत 13 हजार रुपये टन थी।
पेंट, प्रायमर और थिनर के बढ़े दाम
युद्ध का असर अब भवन की रंगाई-पुताई में काम आने वाले सामान की कीमतों पर भी दिखने लगा है। ऑयल पेंट, प्रायमर, थिनर, तारपीन के दाम बढ़ गए हैं। सभी उत्पादों पर 10 से 15 प्रतिशत तक के नए एमआरपी का स्टॉक आ गया है। अप्रैल में मकान व भवन की रंगाई-पुताई का खर्च और बढ़ सकता है। प्राइमर, थिनर व तारपीन जैसे उत्पादों में प्रयुक्त कई रसायन पेट्रोलियम से तैयार होते हैं। शहर के चूने वाली गली सहित अन्य स्थानों पर पेंट की बड़ी दुकानें हैं। निर्मल व अन्य व्यापारियों ने बताया कि पेंट, प्राइमर के दाम बढ़ गए हैं। अप्रैल में इन उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। संवाद
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पेंट की दुकानों पर नए दाम प्रति लीटर
उत्पाद वर्तमान अप्रैल में संभावित दाम
1. प्राइमर 200 210
2. तारपीन 215 230
3. थिनर 170 200
4. सीमेंट 350 380
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सीमेंट, सरिया और बजरी के दामों में भी उछाल
सीमेंट कारोबारियों ने भी सीमेंट के दामोंं में 20 से 30 रुपये तक की वृद्धि होना बताया है। सरिया, रेत व बजरी के दामों भी उछाल आया है। सीमेंट महंगा होने से मकान निर्माण और मरम्मत कार्यों की लागत और बढ़ जाएगी। सबसे अधिक असर छोटे निर्माण कार्य कराने वाले परिवारों और निजी मकान बनवा रहे लोगों पर पड़ेगा।
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पीलीभीत। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की तपिश का असर टाइल्स, सीमेंट, सरिया और पेंट की कीमतों पर भी पड़ने लगा है। इन सभी भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। इसके अप्रैल में दाम और बढ़ सकते हैं। हालांकि कोयला महंगा हो जाने से महंगाई की मार झेल रहे ईंट-भट्ठा स्वामियों ने फिलहाल ईंट पर दाम नहीं बढ़ाए हैं। अगर यही हाल रहा तो मजबूरी में ईंटों की कीमतें बढ़ाने की बात भट्ठा स्वामी कह रहे हैं।
टाइल्स कारोबारियों का कहना है कि युद्ध की वजह से टाइल्स प्लांंट पर एलएनजी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस वजह से कई प्लांट बंद हो गए हैं। टाइल्स की कीमतें तो बढ़ी हैं, आपूर्ति भी बाधित हो रही है। कारोबारी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि टाइल्स के दाम 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। 400 रुपये की आने वाली पेटी अब 440 की बिक रही है। प्लांट संचालकों ने 15 अप्रैल तक टाइल्स की बुकिंग बंद कर रखी है। अगर हालात सामान्य नहीं हुए तो आपूर्ति का संकट और बढ़ेगा। संवाद
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कोयले पर बढ़े 10 हजार, झारखंड का कोयला भी महंगा
पश्चिम एशिया के हालातों ने ईंट-भट्ठा संचालकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कोयले के दाम तो बढ़ ही गए। अन्य सामग्री भी महंगी हो गई है। कारोबारियों ने बताया कि अमेरिका से आने वाले कोयले पर 10 हजार रुपये बढ़ गए हैं। पहले यह कोयला 15,500 रुपये प्रति टन था। अब 25,500 से 26 हजार रुपये तक बिक रहा है। कोयला आसानी से मिल भी नहीं रहा है। मजबूरी में झारखंड के झरिया का कोयला प्रयोग कर रहे हैं। इस कोयले को पहले तुड़वाना पड़ता है। इस पर भी दो हजार रुपये बढ़ गए हैं। झरिया से आने वाला कोयला 15 हजार रुपये प्रति टन बिक रहा है। पहले इसकी कीमत 13 हजार रुपये टन थी।
पेंट, प्रायमर और थिनर के बढ़े दाम
युद्ध का असर अब भवन की रंगाई-पुताई में काम आने वाले सामान की कीमतों पर भी दिखने लगा है। ऑयल पेंट, प्रायमर, थिनर, तारपीन के दाम बढ़ गए हैं। सभी उत्पादों पर 10 से 15 प्रतिशत तक के नए एमआरपी का स्टॉक आ गया है। अप्रैल में मकान व भवन की रंगाई-पुताई का खर्च और बढ़ सकता है। प्राइमर, थिनर व तारपीन जैसे उत्पादों में प्रयुक्त कई रसायन पेट्रोलियम से तैयार होते हैं। शहर के चूने वाली गली सहित अन्य स्थानों पर पेंट की बड़ी दुकानें हैं। निर्मल व अन्य व्यापारियों ने बताया कि पेंट, प्राइमर के दाम बढ़ गए हैं। अप्रैल में इन उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। संवाद
पेंट की दुकानों पर नए दाम प्रति लीटर
उत्पाद वर्तमान अप्रैल में संभावित दाम
1. प्राइमर 200 210
2. तारपीन 215 230
3. थिनर 170 200
4. सीमेंट 350 380
सीमेंट, सरिया और बजरी के दामों में भी उछाल
सीमेंट कारोबारियों ने भी सीमेंट के दामोंं में 20 से 30 रुपये तक की वृद्धि होना बताया है। सरिया, रेत व बजरी के दामों भी उछाल आया है। सीमेंट महंगा होने से मकान निर्माण और मरम्मत कार्यों की लागत और बढ़ जाएगी। सबसे अधिक असर छोटे निर्माण कार्य कराने वाले परिवारों और निजी मकान बनवा रहे लोगों पर पड़ेगा।