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Pilibhit News: युद्ध की तपिश से घी-तेल व अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम में आया उछाल

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:15 AM IST
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The heat of war has led to a surge in the prices of ghee, oil and other essential commodities.
बाजार में रखे लोहे के एंगल। संवाद
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पीलीभीत। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की तपिश का असर अब स्थानीय स्तर पर बाजार में साफ दिखने लगा है। इससे एक ओर जहां रसोई घर में उपयुक्त घी, तेल पर महंगाई की मार पड़ी है। वहीं, दूसरे ओर मकान निर्माण की सामग्री तक महंगाई की चपेट में आ गए हैं। इसके साथ ही जिले से विदेश जाने वाला बासमती चावल महंगे निर्यात के कारण बंदरगाहों में अटका है। इसका असर आमजन से लेकर व्यापारी व कारोबारियों पर पड़ने लगा है। इससे दिक्कतें बढ़ गई हैं।
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पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल का ईरान से जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर स्थानीय स्तर पर देखने को मिल रहा है। जिले में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर घी और तेल के दाम बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ रहा है। आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे लोहा, सरिया और ग्रिल भी महंगे हो गए हैं। इससे मकान निर्माण और अन्य परियोजनाओं की लागत बढ़ गई है। संवाद
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रिफाइंड और सरसों के तेल के कीमतों में बढ़ोतरी का अंतर

रसोई घर में विदेशों से आने वाले सोयाबीन रिफाइंड व सरसों के तेल से ही खाना पकाया जाता है, लेकिन अब रसोई घर में प्रयुक्त यह दोनों चीजें पिछले माह की अपेक्षा इस माह महंगी हो गई है। बाजार में 13 किलोग्राम रिफाइंड का डिब्बा जहां पिछले माह 2100 रुपये था, वहीं अब बाजार में 2420 तक बढ़ गया है। इससे रिफाइंड 15 प्रतिशत तक महंगा दर्ज किया गया। वहीं, 13 किलो सरसों तेल का पीपा बीते माह जहां 2250 था। वह वर्तमान में 2350 रुपये का है।
लोहा 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा

शहर में मकान निर्माण में प्रयुक्त लोहे की सरिया, एंगिल व अन्य चीजें, जो लोहे से तैयार होती हैं, अब वह पहले से ज्यादा महंगी हो गई है। शहर के लोहा बाजार में लोहे की सरिया, एंगिल आदि के भाव की जानकारी लेना पर पता चला कि जो लोहा पिछले माह 52 रुपये किलो के भाव से बेचा गया। वह अब 65 रुपये किलो हो गया है। वहीं, टीन के दाम 95 से बढ़कर 110 हो गए हैं।
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दुबई पोर्ट बंद होने से फंसा पीलीभीत से भेजा गया चावल
पीलीभीत। जिले से लंबे समय से पश्चिम एशिया के देशों सहित बेस्ट अफ्रीका, नॉर्थ अफ्रीका आदि देशों में बासमती चावल का निर्यात होता है, लेकिन युद्ध के चलते दुबई बंदरगाह बंद होने व अन्य से चार गुना अधिक समुद्री माल ढुलाई के कारण बासमती का चावल विदेशों में नहीं पहुंच पा रहा है। चावल के कंटेनर गुजरात स्थित पोर्ट में खड़े हुए हैं।

शहर के डीएस एग्रो के स्वामी अमित अग्रवाल ने बताया, प्रतिमाह उनकी राइस मिल में तैयार होने वाला बासमती चावला पश्चिम एशिया के दुबई, बहरीन, कतर, कुवैत, ईरान, इराक सहित अन्य देशों में राइस मिल से निर्यात किया जाता है। विदेशों में बासमती चावल की खूब मांग है। उन्होंने बताया कि बासमती गुजरात व मुंबई के बंदरगाह से दुबई पोर्ट निर्यात होता है, लेकिन मध्य पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात के चलते दुबई पोर्ट बंद कर दिया गया है। वहीं, ओमान पोर्ट निर्यात के लिए उनको चार गुना ओसियन फ्रेट (समुद्री माल ढुलाई) देना होगा, जो कि काफी अधिक होगा।

ऐसे में वहां के व्यापारियों ने भी इतना महंगा चावल लेने से मना कर रखा है। इसके चलते उनके द्वारा निर्यात किया गया बासमती चावल के कंटेनर मुंद्रा पोर्ट गुजरात में खड़े हुए हैं। दुबई पोर्ट खुलने के बाद ही बासमती चावल देश से निर्यात होगा। संवाद

बाजार में रखे लोहे के एंगल। संवाद

बाजार में रखे लोहे के एंगल। संवाद

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