{"_id":"69c039682a6997a21608b417","slug":"forgery-in-will-name-transfer-order-withdrawnforgery-in-will-name-transfer-order-withdrawn-raebareli-news-c-101-1-slko1033-153614-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Raebareli News: वसीयत में फर्जीवाड़ा, नामांतरण आदेश वापस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Raebareli News: वसीयत में फर्जीवाड़ा, नामांतरण आदेश वापस
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:18 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। अमेठी जिले के पूरे लंगड़ा मजरे पाकर गांव में सात साल पहले फर्जी अंगूठा लगाकर जमीन की वसीयत कराने के मामले में अब तहसीलदार ने भूमि के नामांतरण आदेश को वापस ले लिया है। जांच में सच सामने आने के बाद मुकदमे की सुनवाई कर रहीं सप्तम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन सृष्टि शुक्ला ने 23 दिसंबर 2025 को वसीयत को निरस्त कर दिया था। इसी के बाद तहसीलदार तिलोई कोर्ट ने अपने आदेश को वापस लिया है।
पूरे लंगड़ा मजरे पाकर गांव निवासी प्यारेलाल की मौत 13 जनवरी 2017 को हो गई थी। प्यारेलाल के पुत्र व पुत्री नहीं थे। मौत के बाद गांव ही मीना कुमारी व श्याम कुमारी ने 21 जुलाई 2017 को वसीयत प्रस्तुत किया था। उन्होंने उप निबंधन कार्यालय तिलोई में 24 अप्रैल 2018 को वसीयत को पंजीकृत करा लिया था।
इसके बाद तहसीलदार तिलोई ने नौ दिसंबर 2024 को नामांतरण आदेश जारी करके अभिलेखों में मीना और श्याम कुमारी का नाम दर्ज करा दिया था। जानकारी होने के बाद मृतक प्यारेलाल के भाई मिश्रीलाल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। भाई का फर्जी अंगूठा लगाकर वसीयत करने का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेकर फिंगर प्रिंट स्पशेलिस्ट से जांच कराई। मृतक प्यारेलाल के 23 जुलाई 1995 में किए गए बैनामे और 24 अप्रैल 2018 में हुए वसीयत में लगे अंगूठे के नमूने की जांच की तो दोनों में अंतर मिला था। 23 दिसंबर 2025 को मुकदमे की सुनवाई करते हुए सप्तम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन सृष्टि शुक्ला ने 24 अप्रैल 2018 को उप निबंधन कार्यालय में पंजीकरण के बाद वसीयत को निरस्त कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद तहसीलदार तिलोई अभिषेक यादव ने नौ दिसंबर 2024 के नामांतरण आदेश को वापस ले लिया।
Trending Videos
पूरे लंगड़ा मजरे पाकर गांव निवासी प्यारेलाल की मौत 13 जनवरी 2017 को हो गई थी। प्यारेलाल के पुत्र व पुत्री नहीं थे। मौत के बाद गांव ही मीना कुमारी व श्याम कुमारी ने 21 जुलाई 2017 को वसीयत प्रस्तुत किया था। उन्होंने उप निबंधन कार्यालय तिलोई में 24 अप्रैल 2018 को वसीयत को पंजीकृत करा लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके बाद तहसीलदार तिलोई ने नौ दिसंबर 2024 को नामांतरण आदेश जारी करके अभिलेखों में मीना और श्याम कुमारी का नाम दर्ज करा दिया था। जानकारी होने के बाद मृतक प्यारेलाल के भाई मिश्रीलाल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। भाई का फर्जी अंगूठा लगाकर वसीयत करने का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेकर फिंगर प्रिंट स्पशेलिस्ट से जांच कराई। मृतक प्यारेलाल के 23 जुलाई 1995 में किए गए बैनामे और 24 अप्रैल 2018 में हुए वसीयत में लगे अंगूठे के नमूने की जांच की तो दोनों में अंतर मिला था। 23 दिसंबर 2025 को मुकदमे की सुनवाई करते हुए सप्तम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन सृष्टि शुक्ला ने 24 अप्रैल 2018 को उप निबंधन कार्यालय में पंजीकरण के बाद वसीयत को निरस्त कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद तहसीलदार तिलोई अभिषेक यादव ने नौ दिसंबर 2024 के नामांतरण आदेश को वापस ले लिया।