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रावण कितने भी आएं, राम साथ हैं तो राज्याभिषेक होगा : धर्मेश
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:01 AM IST
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परशदेपुर। क्षेत्र के बूढ़ी माता मंदिर प्रांगण, पछुआबारा में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का बृहस्पतिवार को भव्य समापन हो गया। श्रीधाम अयोध्या से आए प्रवाचक धर्मेश हरि महाराज ने लंका दहन, रावण वध व श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग सुनाया। कथा के समापन पर प्रभु श्रीराम के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर खुशी मनाई।
प्रवाचक ने बताया कि जीवन में लंका कितनी भी जले, रावण कितने भी आएं... अगर भगवान श्रीराम साथ हैं तो अंत में राज्याभिषेक ही होगा। जिस घर में राम कथा होती है, उस घर में रामराज्य उतर आता है। सीता की खोज में हनुमान जी लंका पहुंचे।
अशोक वाटिका में सीता जी को राम की मुद्रिका दी। रावण के पुत्र अक्षय कुमार को मारने पर मेघनाद ने हनुमान जी को बांधकर रावण के दरबार में पेश किया। रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगवा दी। हनुमान जी ने पूरी सोने की लंका जला दी।
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इसके बाद राम-रावण युद्ध हुआ। लक्ष्मण को शक्ति बाण लगा तो हनुमान जी संजीवनी लाए। अंत में श्रीराम ने अग्निबाण से रावण का वध किया। विभीषण का लंका में राज्याभिषेक हुआ। अग्नि परीक्षा के बाद सीता जी को लेकर राम अयोध्या लौटे। 14 वर्ष बाद अयोध्या में राम का आगमन हुआ। भरत ने चरण पादुका लौटाई। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। देवताओं ने पुष्पवर्षा कर अभिवादन किया।
प्रवाचक ने आगे कहा कि अहंकार कितना भी बड़ा हो, भक्ति की एक चिंगारी उसे राख कर देती है। इस अवसर पर मुख्य यजमान संतोष सिंह भदौरिया, अंजनी तिवारी, भीम मौर्य, सुशील सिंह, मनोज द्विवेदी, सुधीर श्रीवास्तव व पुष्पेंद्र सिंह सहित आदि लोग मौजूद रहे।
प्रवाचक ने बताया कि जीवन में लंका कितनी भी जले, रावण कितने भी आएं... अगर भगवान श्रीराम साथ हैं तो अंत में राज्याभिषेक ही होगा। जिस घर में राम कथा होती है, उस घर में रामराज्य उतर आता है। सीता की खोज में हनुमान जी लंका पहुंचे।
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अशोक वाटिका में सीता जी को राम की मुद्रिका दी। रावण के पुत्र अक्षय कुमार को मारने पर मेघनाद ने हनुमान जी को बांधकर रावण के दरबार में पेश किया। रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगवा दी। हनुमान जी ने पूरी सोने की लंका जला दी।
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इसके बाद राम-रावण युद्ध हुआ। लक्ष्मण को शक्ति बाण लगा तो हनुमान जी संजीवनी लाए। अंत में श्रीराम ने अग्निबाण से रावण का वध किया। विभीषण का लंका में राज्याभिषेक हुआ। अग्नि परीक्षा के बाद सीता जी को लेकर राम अयोध्या लौटे। 14 वर्ष बाद अयोध्या में राम का आगमन हुआ। भरत ने चरण पादुका लौटाई। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। देवताओं ने पुष्पवर्षा कर अभिवादन किया।
प्रवाचक ने आगे कहा कि अहंकार कितना भी बड़ा हो, भक्ति की एक चिंगारी उसे राख कर देती है। इस अवसर पर मुख्य यजमान संतोष सिंह भदौरिया, अंजनी तिवारी, भीम मौर्य, सुशील सिंह, मनोज द्विवेदी, सुधीर श्रीवास्तव व पुष्पेंद्र सिंह सहित आदि लोग मौजूद रहे।