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Raebareli News: एससी-एसटी कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:11 AM IST
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अमावां। मिलएरिया में एक महिला से जमीन हड़पने के लिए धोखाधड़ी, जातिसूचक गाली-गलौज और मारपीट का मामला सामने आया है। अपर जिला जज/ विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी न्यायालय ने मामले में सुनवाई की और तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।
चक धौरहरा, गडरियन का पुरवा निवासी संजीता ने आरोप लगाया है कि गढ़ीखास निवासी प्रदीप चौधरी, पूरे भोन्दू अहियारायपुर निवासी बृजेंद्र यादव व अहियारायपुर निवासी राकेश ने उसकी पैतृक भूमि हड़पने की कोशिश की। यह भूमि उसे अपने ससुर सत्यनारायण से वसीयत के जरिए मिली थी, जो 11 नवंबर 2008 को उपनिबंधक कार्यालय में पंजीकृत हुई थी। आरोपियों ने वरासत में नाम दर्ज कराने के बहाने उसे और उसके पति राजेंद्र को कचहरी बुलाया। वहां उसकी अशिक्षित होने का फायदा उठाकर जमीन का एग्रीमेंट करा लिया गया। एग्रीमेंट में चेक से भुगतान का जिक्र था, लेकिन संजीता को कोई पैसा नहीं मिला।
संजीता ने बताया कि 28 अगस्त 2025 को आरोपियों ने उससे और उसके पति के साथ गाली-गलौज की। पीड़िता ने मिलएरिया थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने 2 सितंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक रायबरेली को भी रजिस्ट्री से प्रार्थनापत्र भेजा था। बाद में कोर्ट की शरण ली जिस पर न्यायालय ने आदेश दिया। थाना प्रभारी विंध्य विनय ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर अब प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है।
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चक धौरहरा, गडरियन का पुरवा निवासी संजीता ने आरोप लगाया है कि गढ़ीखास निवासी प्रदीप चौधरी, पूरे भोन्दू अहियारायपुर निवासी बृजेंद्र यादव व अहियारायपुर निवासी राकेश ने उसकी पैतृक भूमि हड़पने की कोशिश की। यह भूमि उसे अपने ससुर सत्यनारायण से वसीयत के जरिए मिली थी, जो 11 नवंबर 2008 को उपनिबंधक कार्यालय में पंजीकृत हुई थी। आरोपियों ने वरासत में नाम दर्ज कराने के बहाने उसे और उसके पति राजेंद्र को कचहरी बुलाया। वहां उसकी अशिक्षित होने का फायदा उठाकर जमीन का एग्रीमेंट करा लिया गया। एग्रीमेंट में चेक से भुगतान का जिक्र था, लेकिन संजीता को कोई पैसा नहीं मिला।
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संजीता ने बताया कि 28 अगस्त 2025 को आरोपियों ने उससे और उसके पति के साथ गाली-गलौज की। पीड़िता ने मिलएरिया थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने 2 सितंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक रायबरेली को भी रजिस्ट्री से प्रार्थनापत्र भेजा था। बाद में कोर्ट की शरण ली जिस पर न्यायालय ने आदेश दिया। थाना प्रभारी विंध्य विनय ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर अब प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है।