{"_id":"6a74f37ba1f357b412025ec7","slug":"amar-singh-arrived-after-a-15-kilometer-journey-on-a-pushcarthopes-for-treatment-were-dashed-within-just-10-minutes-at-the-district-hospital-rampur-news-c-282-1-rmp1027-177236-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur News: ठेले पर 15 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे अमर सिंह,\nजिला अस्पताल में 10 मिनट में ही टूट गई इलाज की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur News: ठेले पर 15 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे अमर सिंह, जिला अस्पताल में 10 मिनट में ही टूट गई इलाज की उम्मीद
Fri, 07 Aug 2026 02:20 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत बुधवार रात एक बार फिर सामने आई। शाहजादनगर क्षेत्र के खाता चिंतामन गांव निवासी 40 वर्षीय अमर सिंह की हालत बिगड़ने पर आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार एंबुलेंस तक नहीं बुला सका।
मजबूरी में परिजन उन्हें बाइक ठेले पर लिटाकर करीब 15 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, रात करीब सवा 10 बजे मरीज को जिला अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद हालत गंभीर बताई, लेकिन अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध न होने के कारण करीब 10 मिनट बाद ही हायर सेंटर रेफर कर दिया।
रेफर होने के बाद भी परिवार की परेशानी कम नहीं हुई। निजी एंबुलेंस का किराया देने तक के पैसे नहीं थे। परिजनों ने रिश्तेदारों और ग्रामीणों से चंदा इकट्ठा किया। इसके बाद निजी एंबुलेंस की व्यवस्था हो सकी और मरीज को हायर सेंटर भेजा गया।
विज्ञापन
मरीज की पत्नी रेखा ने बताया कि परिवार पहले से आर्थिक संकट में है। इलाज में दो बीघा जमीन बिक चुकी है और अब एंबुलेंस का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।
0000
चंदा जुटने तक निजी एंबुलेंस का करना पड़ा इंतजार
रामपुर। जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर होने के बाद मरीज के परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या निजी एंबुलेंस का इंतजाम करना था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार के पास एंबुलेंस का किराया देने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे में परिजनों ने रिश्तेदारों और गांव के लोगों से मदद की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया, लेकिन रकम जुटने तक मरीज को अस्पताल में ही इंतजार करना पड़ा। चंदा पूरा होने के बाद निजी एंबुलेंस बुलाई गई और मरीज को हायर सेंटर के लिए रवाना किया गया। संवाद
0000
काला पीलिया के इलाज में बिक गई दो बीघा जमीन
रामपुर। बीमार अमर सिंह के भाई दयाराम ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले अमर सिंह को काला पीलिया हो गया था। बीमारी गंभीर होने पर परिवार ने कई जगह इलाज कराया, जिसमें दो बीघा जमीन बेचनी पड़ी। इसके बावजूद आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। अब परिवार के पास आय का कोई मजबूत साधन नहीं बचा है। पत्नी रेखा ने बताया कि बीमारी ने परिवार को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। संवाद
00000
मरीज की हालत गंभीर होने पर उपलब्ध संसाधनों के अनुसार प्राथमिक उपचार दिया जाता है। यदि किसी विशेष सुविधा या उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता होती है तो चिकित्सकीय निर्णय के आधार पर हायर सेंटर रेफर किया जाता है। -डॉ. बीसी सक्सेना, सीएमएस
विज्ञापन
मजबूरी में परिजन उन्हें बाइक ठेले पर लिटाकर करीब 15 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, रात करीब सवा 10 बजे मरीज को जिला अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद हालत गंभीर बताई, लेकिन अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध न होने के कारण करीब 10 मिनट बाद ही हायर सेंटर रेफर कर दिया।
विज्ञापन
रेफर होने के बाद भी परिवार की परेशानी कम नहीं हुई। निजी एंबुलेंस का किराया देने तक के पैसे नहीं थे। परिजनों ने रिश्तेदारों और ग्रामीणों से चंदा इकट्ठा किया। इसके बाद निजी एंबुलेंस की व्यवस्था हो सकी और मरीज को हायर सेंटर भेजा गया।
विज्ञापन
मरीज की पत्नी रेखा ने बताया कि परिवार पहले से आर्थिक संकट में है। इलाज में दो बीघा जमीन बिक चुकी है और अब एंबुलेंस का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।
0000
चंदा जुटने तक निजी एंबुलेंस का करना पड़ा इंतजार
रामपुर। जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर होने के बाद मरीज के परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या निजी एंबुलेंस का इंतजाम करना था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार के पास एंबुलेंस का किराया देने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे में परिजनों ने रिश्तेदारों और गांव के लोगों से मदद की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया, लेकिन रकम जुटने तक मरीज को अस्पताल में ही इंतजार करना पड़ा। चंदा पूरा होने के बाद निजी एंबुलेंस बुलाई गई और मरीज को हायर सेंटर के लिए रवाना किया गया। संवाद
0000
काला पीलिया के इलाज में बिक गई दो बीघा जमीन
रामपुर। बीमार अमर सिंह के भाई दयाराम ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले अमर सिंह को काला पीलिया हो गया था। बीमारी गंभीर होने पर परिवार ने कई जगह इलाज कराया, जिसमें दो बीघा जमीन बेचनी पड़ी। इसके बावजूद आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। अब परिवार के पास आय का कोई मजबूत साधन नहीं बचा है। पत्नी रेखा ने बताया कि बीमारी ने परिवार को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। संवाद
00000
मरीज की हालत गंभीर होने पर उपलब्ध संसाधनों के अनुसार प्राथमिक उपचार दिया जाता है। यदि किसी विशेष सुविधा या उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता होती है तो चिकित्सकीय निर्णय के आधार पर हायर सेंटर रेफर किया जाता है। -डॉ. बीसी सक्सेना, सीएमएस