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Rampur News: वादों की रफ्तार थमी, फाइलों में कैद हैं विकास के सपने
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Mon, 22 Jun 2026 01:49 AM IST
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रामपुर। जिले के विकास से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं वर्षों से घोषणाओं और सरकारी फाइलों के बीच अटकी हुई हैं। मेडिकल कॉलेज, शहरी हाईवे का चौड़ीकरण, बिलासपुर में कार्गो कंटेनर डिपो, टांडा बाईपास और नया ब्लॉक, स्वार रोडवेज बस अड्डा जैसी योजनाओं पर समय-समय पर घोषणाएं हुईं, प्रस्ताव बने और कुछ को मंजूरी भी मिली, लेकिन अधिकांश योजनाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर सकीं। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन गंभीर पहल करें तो इन परियोजनाओं को गति मिल सकती है।
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मेडिकल कॉलेज का सपना अधूरा
रामपुर में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज की घोषणा सितंबर 2021 में हुई थी। इसके लिए अलीनगर बेनजीर और जगतपुर में भूमि भी चिह्नित की गई, लेकिन अब तक जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। निवेशक नहीं मिलने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी इस मुद्दे को संसद में उठा चुके हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज का सपना अभी अधूरा है।
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हाईवे चौड़ीकरण का प्रस्ताव भी अटका
कोसी से जीरो प्वाइंट होते हुए पनवड़िया तक सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव करीब तीन वर्ष पहले भेजा गया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इससे शहर में यातायात की समस्या बनी हुई है।
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कार्गो कंटेनर डिपो का इंतजार
बिलासपुर में कार्गो कंटेनर डिपो स्थापित करने का प्रस्ताव उद्योग विभाग ने शासन को भेजा था। मंजूरी मिलने के बावजूद परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। उद्योग जगत का मानना है कि इसके शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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टांडा को ब्लॉक और बाईपास का इंतजार
टांडा को नया ब्लॉक बनाने और बाईपास निर्माण की योजना भी वर्षों से अधर में है। ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव 2022 में शासन को भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। वहीं, टांडा बाईपास को मंजूरी मिलने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका, जबकि स्वार बाईपास पर काम शुरू हो चुका है।
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स्वार में अब तक नहीं बना बस अड्डा
स्वार में रोडवेज बस अड्डे का प्रस्ताव करीब एक दशक पुराना है। भूमि सर्वे भी कराया गया, लेकिन सरकार बदलने के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। बस अड्डा न होने से यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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बोले लोग...
मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और समय व धन दोनों की बचत होगी। इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। -संदीप सोनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
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मेडिकल कॉलेज जिले की जरूरत है। निवेशक नहीं मिलने से परियोजना अटकी है। जनप्रतिनिधियों को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए। -शैलेंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल
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टांडा को ब्लॉक का दर्जा मिलने से प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और बाईपास बनने से जाम की समस्या खत्म होगी। -आशीष वर्मा, व्यापारी
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वर्षों से दोनों योजनाओं की चर्चा हो रही है, लेकिन प्रगति नहीं दिख रही। शासन को इन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए। -हाजी मोहम्मद गुफरान, व्यापारी
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स्वार बस अड्डे की प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई थी, लेकिन आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका। इससे व्यापारियों और यात्रियों को परेशानी हो रही है। -अनवर अली, तहसील अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, स्वार
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बढ़ती आबादी के हिसाब से स्वार में बस अड्डा जरूरी है। सरकार को फाइलों से निकालकर निर्माण शुरू कराना चाहिए। -शिव औतार सक्सेना, समाजसेवी
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मेडिकल कॉलेज का सपना अधूरा
रामपुर में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज की घोषणा सितंबर 2021 में हुई थी। इसके लिए अलीनगर बेनजीर और जगतपुर में भूमि भी चिह्नित की गई, लेकिन अब तक जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। निवेशक नहीं मिलने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी इस मुद्दे को संसद में उठा चुके हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज का सपना अभी अधूरा है।
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हाईवे चौड़ीकरण का प्रस्ताव भी अटका
कोसी से जीरो प्वाइंट होते हुए पनवड़िया तक सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव करीब तीन वर्ष पहले भेजा गया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इससे शहर में यातायात की समस्या बनी हुई है।
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कार्गो कंटेनर डिपो का इंतजार
बिलासपुर में कार्गो कंटेनर डिपो स्थापित करने का प्रस्ताव उद्योग विभाग ने शासन को भेजा था। मंजूरी मिलने के बावजूद परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। उद्योग जगत का मानना है कि इसके शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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टांडा को ब्लॉक और बाईपास का इंतजार
टांडा को नया ब्लॉक बनाने और बाईपास निर्माण की योजना भी वर्षों से अधर में है। ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव 2022 में शासन को भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। वहीं, टांडा बाईपास को मंजूरी मिलने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका, जबकि स्वार बाईपास पर काम शुरू हो चुका है।
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स्वार में अब तक नहीं बना बस अड्डा
स्वार में रोडवेज बस अड्डे का प्रस्ताव करीब एक दशक पुराना है। भूमि सर्वे भी कराया गया, लेकिन सरकार बदलने के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। बस अड्डा न होने से यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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बोले लोग...
मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और समय व धन दोनों की बचत होगी। इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। -संदीप सोनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
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मेडिकल कॉलेज जिले की जरूरत है। निवेशक नहीं मिलने से परियोजना अटकी है। जनप्रतिनिधियों को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए। -शैलेंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल
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टांडा को ब्लॉक का दर्जा मिलने से प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और बाईपास बनने से जाम की समस्या खत्म होगी। -आशीष वर्मा, व्यापारी
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वर्षों से दोनों योजनाओं की चर्चा हो रही है, लेकिन प्रगति नहीं दिख रही। शासन को इन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए। -हाजी मोहम्मद गुफरान, व्यापारी
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स्वार बस अड्डे की प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई थी, लेकिन आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका। इससे व्यापारियों और यात्रियों को परेशानी हो रही है। -अनवर अली, तहसील अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, स्वार
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बढ़ती आबादी के हिसाब से स्वार में बस अड्डा जरूरी है। सरकार को फाइलों से निकालकर निर्माण शुरू कराना चाहिए। -शिव औतार सक्सेना, समाजसेवी