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Saharanpur News: जल निकासी के नाम पर नालों पर खर्च होंगे 150 करोड़ रुपये, नदियों की अनदेखी
Sat, 11 Jul 2026 01:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 11 Jul 2026 01:05 AM IST
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सहारनपुर। जल निकासी के नाम पर महानगर के चार नालों पर 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बाढ़ का कारण बनने वाली ढमोला और पांवधोई नदियों के लिए कोई योजना नगर निगम के पास नहीं है। शुक्रवार को नालों और नदियों की पड़ताल की गई।
क्रेगी नाला आनंदनगर के बीच से होते हुए लोहानी सराय और नेहरू मार्केट को गुजरते हुए ढमोला नदी में गिरता है। नाला गहरा और ढालदार होने की वजह से कभी भी बरसात में इसका पानी बाहर निकलकर कॉलोनियों में जलभराव की वजह नहीं बना है। जल निकासी के नाम पर इस नाले के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए गए हैं। उधर, सप्ताहभर पहले ही 15वें वित्त की बैठक में नगर निगम ने तीन नालों के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इनमें एक बड़ा नाला लॉर्ड महावीरा एकेडमी और मुन्नालाल कॉलेज के सामने तथा मातागढ़ को होते हुए धोबीघाट के पास पांवधोई नदी में गिरता है। पड़ताल में नाला काफी हद तक दुरुस्त मिला।
मातागढ़ के पास करीब 200 मीटर तक नाला स्मार्ट सिटी योजना में तीन साल पहले ही सीसी बनाया गया है। मुन्नालाल कॉलेज के पास भी नाला पूरी तरह दुरुस्त है। नाला ज्यादातर जगह दुकानदारों द्वारा कवर किया गया है। गहराई और ढलान के चलते इसका पानी कभी भी बाहर निकालकर आबादी में जलभराव की वजह नहीं बना है। इस नाले के लिए 37.49 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए हैं।
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- पांवधोई और ढमोला नदी की हालत
धोबीघाट से लेकर ढमोला नदी में गिरने तक पांवधोई नदी की दोनों ओर की दीवारें और ग्रिल जगह-जगह गिरी हुई है। इसकी वजह से लोग लगातार कचरा नदी में फेंक रहे हैं। बरसात के दिनों में नदी कई कॉलोनियों में बाढ़ लाने की वजह बनती है। इसी प्रकार ढमोला नदी के दोनों तट खुले हैं। नदी में दूर तक जलकुंभी फैली है। बरसात में इसकी वजह से करीब सात से आठ कॉलोनियों में बाढ़ आती है। बरसात से पहले कुछ हिस्से से सिल्ट निकालने की औपचारिकता की जाती है, जो नाकाफी है।
शहरी बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत शासन बजट उपलब्ध करा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी शहर में जलभराव या बाढ़ की स्थिति न बने। इसीलिए तीन नालों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। तीनों नालों पर जहां जरूरत है वहीं पर काम किया जाएगा। जहां स्मार्ट सिटी ने काम किया है उसे नहीं छेड़ेंगे। - एसपी मिश्र, मुख्य अभियंता, निर्माण विभाग, नगर निगम
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क्रेगी नाला आनंदनगर के बीच से होते हुए लोहानी सराय और नेहरू मार्केट को गुजरते हुए ढमोला नदी में गिरता है। नाला गहरा और ढालदार होने की वजह से कभी भी बरसात में इसका पानी बाहर निकलकर कॉलोनियों में जलभराव की वजह नहीं बना है। जल निकासी के नाम पर इस नाले के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए गए हैं। उधर, सप्ताहभर पहले ही 15वें वित्त की बैठक में नगर निगम ने तीन नालों के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इनमें एक बड़ा नाला लॉर्ड महावीरा एकेडमी और मुन्नालाल कॉलेज के सामने तथा मातागढ़ को होते हुए धोबीघाट के पास पांवधोई नदी में गिरता है। पड़ताल में नाला काफी हद तक दुरुस्त मिला।
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मातागढ़ के पास करीब 200 मीटर तक नाला स्मार्ट सिटी योजना में तीन साल पहले ही सीसी बनाया गया है। मुन्नालाल कॉलेज के पास भी नाला पूरी तरह दुरुस्त है। नाला ज्यादातर जगह दुकानदारों द्वारा कवर किया गया है। गहराई और ढलान के चलते इसका पानी कभी भी बाहर निकालकर आबादी में जलभराव की वजह नहीं बना है। इस नाले के लिए 37.49 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए हैं।
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- पांवधोई और ढमोला नदी की हालत
धोबीघाट से लेकर ढमोला नदी में गिरने तक पांवधोई नदी की दोनों ओर की दीवारें और ग्रिल जगह-जगह गिरी हुई है। इसकी वजह से लोग लगातार कचरा नदी में फेंक रहे हैं। बरसात के दिनों में नदी कई कॉलोनियों में बाढ़ लाने की वजह बनती है। इसी प्रकार ढमोला नदी के दोनों तट खुले हैं। नदी में दूर तक जलकुंभी फैली है। बरसात में इसकी वजह से करीब सात से आठ कॉलोनियों में बाढ़ आती है। बरसात से पहले कुछ हिस्से से सिल्ट निकालने की औपचारिकता की जाती है, जो नाकाफी है।
शहरी बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत शासन बजट उपलब्ध करा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी शहर में जलभराव या बाढ़ की स्थिति न बने। इसीलिए तीन नालों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। तीनों नालों पर जहां जरूरत है वहीं पर काम किया जाएगा। जहां स्मार्ट सिटी ने काम किया है उसे नहीं छेड़ेंगे। - एसपी मिश्र, मुख्य अभियंता, निर्माण विभाग, नगर निगम