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Saharanpur News: निजी अस्पताल भिजवाए गए मरीज की मौत, स्टाफ नर्स मांगने पहुंचीं कमीशन
Sat, 11 Jul 2026 01:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 11 Jul 2026 01:03 AM IST
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सहारनपुर। स्वास्थ्य विभाग में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर देने वाला मामला सामने आया है। एसबीडी जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स से घायल को पास के एक निजी अस्पताल में भिजवाया। वहां पर जाकर मरीज की मौत हो गई। इसके बाद स्टाफ नर्स निजी अस्पताल में कमीशन लेने पहुंच गई। यह आरोप मृतक के परिजनों की तरफ से प्रमुख अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर लगाए गए हैं, जिस पर समिति ने जांच शुरू कर दी है।
ऐसे समझें मामला
14 जून को बेहट निवासी राजेंद्र अपने भांजे उदय को चोट लगने पर एसबीडी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। यहां तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने घायल की हालत को देखते हुए जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर भेज दिया था। आरोप है कि उस दौरान ड्यूटी तैनात स्टाफ नर्स ने परिजनों को बताया कि उनके मरीज की हालत गंभीर है और उन्हें जिला अस्पताल से चंद कदमों की दूरी पर स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने एंबुलेंस की और स्टाफ नर्स द्वारा बताए गए निजी अस्पताल में ले गए। यहां पर इलाज के दौरान घायल की मौत हो गई।
परिजनों ने दी लिखित शिकायत, हमारे सामने मांगा कमीशन
इस मामले में परिजनों की तरफ से तीन दिन पहले जिला अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक को लिखित में शिकायत दी। इसमें जो आरोप लगाए गए वह बेहद गंभीर हैं। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल में जब वह अपने मरीज को लेकर पहुंचे थे उसके कुछ देर बाद स्टाफ नर्स भी उसी अस्पताल में पहुंच गई। स्टाफ नर्स को अस्पताल में कमीशन मांगते हुए देखा। उस समय परिजनों ने कुछ नहीं कहा, लेकिन अब लिखित शिकायत दी गई है। मामले का संज्ञान लेते हुए प्रमुख अधीक्षक ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी। टीम में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवदत्ता, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र भट्ट और प्रभारी अधिकारी फार्मेसी ब्रह्मनंद शामिल हैं। गठित टीम ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।
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-- पहले भी स्टाफ पर लगते रहे आरोप
मरीज को निजी अस्पताल भेजने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। आरोप है कि पूर्व में मरीजों के तीमारदारों से भी सुविधा शुल्क लेने के मामले आए हैं। इसके बावजूद स्टाफ की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है।
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डॉक्टर या स्टाफ अस्पताल में आने वाले मरीज को निजी अस्पताल के लिए नहीं भेज सकता। स्टाफ नर्स पर जो आरोप लगाए गए हैं वह बेहद गंभीर है। उसकी जांच शुरू कर दी गई है।
डॉ. रविप्रकाश, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
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ऐसे समझें मामला
14 जून को बेहट निवासी राजेंद्र अपने भांजे उदय को चोट लगने पर एसबीडी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। यहां तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने घायल की हालत को देखते हुए जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर भेज दिया था। आरोप है कि उस दौरान ड्यूटी तैनात स्टाफ नर्स ने परिजनों को बताया कि उनके मरीज की हालत गंभीर है और उन्हें जिला अस्पताल से चंद कदमों की दूरी पर स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने एंबुलेंस की और स्टाफ नर्स द्वारा बताए गए निजी अस्पताल में ले गए। यहां पर इलाज के दौरान घायल की मौत हो गई।
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परिजनों ने दी लिखित शिकायत, हमारे सामने मांगा कमीशन
इस मामले में परिजनों की तरफ से तीन दिन पहले जिला अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक को लिखित में शिकायत दी। इसमें जो आरोप लगाए गए वह बेहद गंभीर हैं। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल में जब वह अपने मरीज को लेकर पहुंचे थे उसके कुछ देर बाद स्टाफ नर्स भी उसी अस्पताल में पहुंच गई। स्टाफ नर्स को अस्पताल में कमीशन मांगते हुए देखा। उस समय परिजनों ने कुछ नहीं कहा, लेकिन अब लिखित शिकायत दी गई है। मामले का संज्ञान लेते हुए प्रमुख अधीक्षक ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी। टीम में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवदत्ता, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र भट्ट और प्रभारी अधिकारी फार्मेसी ब्रह्मनंद शामिल हैं। गठित टीम ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।
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मरीज को निजी अस्पताल भेजने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। आरोप है कि पूर्व में मरीजों के तीमारदारों से भी सुविधा शुल्क लेने के मामले आए हैं। इसके बावजूद स्टाफ की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है।
डॉक्टर या स्टाफ अस्पताल में आने वाले मरीज को निजी अस्पताल के लिए नहीं भेज सकता। स्टाफ नर्स पर जो आरोप लगाए गए हैं वह बेहद गंभीर है। उसकी जांच शुरू कर दी गई है।
डॉ. रविप्रकाश, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल