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Saharanpur News: हाईकोर्ट ने सिविल बार एसोसिएशन को भेजा नोटिस
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देवबंद। देवबंद के अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक कार्यों से विरत रहने पर प्रयागराज हाईकोर्ट ने इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना मानते हुए सिविल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को नोटिस भेजा। इस नोटिस में 15 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है। वहीं, सिविल बार एसोसिएशन ने जिला जज के माध्यम से नोटिस का हाईकोर्ट को जवाब भेज दिया है।
प्रयागराज हाईकोर्ट ने 18 मार्च को नोटिस संख्या 54/2026 के अंतर्गत देवबंद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों को नोटिस भेजा है। इसमें जिला जज के समक्ष अपना स्पष्टीकरण पेश करने के लिए निर्देशित किया गया है। बता दें, कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 दिसंबर में अपने आदेश में कहा था कि अधिवक्ता किसी भी स्थिति में न्यायिक कार्यों से विरत नहीं होंगे और न ही हड़ताल करेंगे, लेकिन इसके बाद भी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कई बार कार्य का बहिष्कार किया। इसे कोर्ट ने अपने आदेश की अवहेलना माना है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेंद्र कुमार ने बताया कि वह नोटिस का जवाब सभी रिकार्ड के साथ जिला जज के माध्यम से भेज चुके हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों द्वारा गलत जानकारी देकर गुमराह कर अपने कृत्यों को छुपाने के लिए एसोसिएशन को नोटिस दिलाया गया था।
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प्रयागराज हाईकोर्ट ने 18 मार्च को नोटिस संख्या 54/2026 के अंतर्गत देवबंद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों को नोटिस भेजा है। इसमें जिला जज के समक्ष अपना स्पष्टीकरण पेश करने के लिए निर्देशित किया गया है। बता दें, कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 दिसंबर में अपने आदेश में कहा था कि अधिवक्ता किसी भी स्थिति में न्यायिक कार्यों से विरत नहीं होंगे और न ही हड़ताल करेंगे, लेकिन इसके बाद भी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कई बार कार्य का बहिष्कार किया। इसे कोर्ट ने अपने आदेश की अवहेलना माना है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेंद्र कुमार ने बताया कि वह नोटिस का जवाब सभी रिकार्ड के साथ जिला जज के माध्यम से भेज चुके हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों द्वारा गलत जानकारी देकर गुमराह कर अपने कृत्यों को छुपाने के लिए एसोसिएशन को नोटिस दिलाया गया था।