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Saharanpur News: शहर की सड़कों का होगा रडार सर्वे, खोदाई में नहीं फटेगी कोई भी लाइन
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स्मार्ट सिटी नगर निगम का गेट
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- रडार सर्वे के लिए नगर निगम ने एजेंसियों से मांगे आवेदन, भविष्य में पहुंचेगा फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर में सड़कों खोदाई करते वक्त अब गैस, पानी और अन्य किसी प्रकार की पाइपलाइन और केबल कटेंगे-फटेंगे नहीं। इसके लिए नगर निगम महानगर की सभी सड़कों का रडार सर्वे कराएगा।
पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि स्मार्ट सिटी द्वारा सीवर लाइन डालते समय नगर निगम की पानी की पाइप लाइनें फट गईं। इससे एक ओर जहां पानी बर्बाद हुआ, वहीं बड़ी आबादी कई दिन तक पेयजल तक से तरस गई। इसके अलावा कई घटनाएं गैस पाइपलाइन के फटने की भी हो चुकी हैं, जिनमें आग तक लग चुकी है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही नगर निगम ने सभी सड़कों का रडार सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए फिलहाल एजेंसी की तलाश है।
बताया गया है कि शहर की सड़कों पर 25 से 30 साल तक पुरानी लाइनें बिछी हुई हैं, जिनका मौजूदा निगम अधिकारियों को भी पता नहीं है। रडार सर्वे में वह सभी लाइनें स्कैन हो जाएंगी। उनका पूरा डाटा नगर निगम के पास उपलब्ध रहेगा। उसके बाद काेई भी एजेंसी जब सड़क पर अपना काम करना चाहेगी तो वह नगर निगम से सर्वे की रिपोर्ट लेकर संबंधित सड़क में बिछी लाइनों को ध्यान में रखते हुए अपना काम करेगी।
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-- क्या है रडार सर्वे और उसके फायदे
रडार सर्वे (विशेष रूप से ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार-जीपीआर) सड़क निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी आधुनिक तकनीक है। इससे छिपी हुई पाइपलाइनों और केबिल आदि का सटीक पता लगाया जाता है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले रडार सर्वे करने से भूमिगत लाइनों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। यह सड़क की परतों (बिटुमिनस, बेस आदि) और उनकी मोटाई को भी मापता है, जिससे गुणवत्ता की जांच होती है। इतना ही नहीं सड़क के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद कमजोरियों और नमी का पहले ही पता चल जाता है।
-- नगर निगम सड़कों का रडार सर्वे कराएगा। इससे सड़कों की खोदाई के दौरान होने वाले नुकसान को बचाएगा। एजेंसी नामित होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। - डॉ. अजय कुमार, महापौर
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर में सड़कों खोदाई करते वक्त अब गैस, पानी और अन्य किसी प्रकार की पाइपलाइन और केबल कटेंगे-फटेंगे नहीं। इसके लिए नगर निगम महानगर की सभी सड़कों का रडार सर्वे कराएगा।
पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि स्मार्ट सिटी द्वारा सीवर लाइन डालते समय नगर निगम की पानी की पाइप लाइनें फट गईं। इससे एक ओर जहां पानी बर्बाद हुआ, वहीं बड़ी आबादी कई दिन तक पेयजल तक से तरस गई। इसके अलावा कई घटनाएं गैस पाइपलाइन के फटने की भी हो चुकी हैं, जिनमें आग तक लग चुकी है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही नगर निगम ने सभी सड़कों का रडार सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए फिलहाल एजेंसी की तलाश है।
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बताया गया है कि शहर की सड़कों पर 25 से 30 साल तक पुरानी लाइनें बिछी हुई हैं, जिनका मौजूदा निगम अधिकारियों को भी पता नहीं है। रडार सर्वे में वह सभी लाइनें स्कैन हो जाएंगी। उनका पूरा डाटा नगर निगम के पास उपलब्ध रहेगा। उसके बाद काेई भी एजेंसी जब सड़क पर अपना काम करना चाहेगी तो वह नगर निगम से सर्वे की रिपोर्ट लेकर संबंधित सड़क में बिछी लाइनों को ध्यान में रखते हुए अपना काम करेगी।
रडार सर्वे (विशेष रूप से ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार-जीपीआर) सड़क निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी आधुनिक तकनीक है। इससे छिपी हुई पाइपलाइनों और केबिल आदि का सटीक पता लगाया जाता है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले रडार सर्वे करने से भूमिगत लाइनों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। यह सड़क की परतों (बिटुमिनस, बेस आदि) और उनकी मोटाई को भी मापता है, जिससे गुणवत्ता की जांच होती है। इतना ही नहीं सड़क के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद कमजोरियों और नमी का पहले ही पता चल जाता है।