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Saharanpur News: वीएलटीडी डिवाइस का शुल्क तय नहीं, हो रही मनमानी वसूली
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ट्रांसपोर्टर रजनीश चंदा। वीएलटीडी डिवाइस का शुल्क तय नहीं, वसूला जा रहा मनमाना वाली&n
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- वीएलटीडी की अनिवार्यता से व्यवसायिक वाहनों के परमिट व फिटनेस रुकी
- कंपनियों के अलग-अलग रेट से ट्रांसपोर्टर परेशान, नहीं लगवा पा रहे डिवाइस
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। शासन से व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगाने का शुल्क तय नहीं है। गिनी-चुनी कंपनियों की एजेंसी होने से वीएलटीडी लगाने का रेट अलग-अलग हैं। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि एजेंसियां मनमाना शुल्क वसूल रहीं हैं। इसके चलते व्यवसायिक वाहनों के परमिट और फिटनेस रुक गई है।
संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार, जिले में 9440 वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाई जानी है। इनमें पांच हजार ट्रक, दो हजार प्राइवेट बसें, एक हजार टैक्सी और 1490 मैक्सी कैब हैं। इनमें से अभी तक एक हजार से अधिक वाहनों में ही वीएलटीडी लग पाई है। शासन ने व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी लगाने के लिए कंपनियां तय की हैं, जिस कंपनी का वाहन है, वह उसी कंपनी की एजेंसी पर वीएलटीडी लगवाएगा।
जिले में कंपनियों की एजेंसियां गिनी-चुनी हैं, इसलिए उनमें ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं है। सभी कंपनियों ने अलग-अलग रेट तय कर दिए हैं। रेट अधिक होने के चलते ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। इसकी वजह से परमिट, टैक्स और फिटनेस संबंधित कार्य रुक गए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वीएलटीडी लगाने के लिए 10 से लेकर 25 हजार रुपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
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-- हरियाणा-उत्तराखंड में डिवाइस की कीमत कम
ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि हरियाणा-उत्तराखंड में वीएलटीडी की कीमत यहां के मुकाबले बेहद कम हैं। वहां प्रतिस्पर्धा नहीं है, क्योंकि कंपनियां ज्यादा हैं। इसलिए इन दोनों राज्यों में वीएलटीडी पांच से छह हजार रुपये में लगाई जा रही है।
-- बोले ट्रांसपोर्टर
- सहारनपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष सीपी सिंह का कहना है कि वीएलटीडी की अनिवार्यता से ट्रकों के पहिए थम गए हैं। एक या दो गाड़ी वालों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शासन से मांग है कि वीएलटीडी के लिए अधिकृत की गई कंपनियों का शुल्क निर्धारित किया जाए।
- ट्रांसपोर्टर रजनीश चंदा बताते हैं कि जिले में गिनी-चुनी कंपनियों की एजेंसियां हैं, जिनमें ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं है। वीएलटीडी लगाने का मनमाना शुल्क वसूल किया जा रहा है। डिवाइस की कीमत 10 से 25 हजार रुपये तक वसूली जा रही है। शुल्क को कम किया जाना चाहिए।
-- वर्जन
व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी शुल्क को लेकर शिकायतें आ रहीं हैं। कंपनी एजेंसियों के रेट अलग-अलग हैं, जिसे लेकर शासन को अवगत कराया गया है। - मानवेंद्र प्रताप सिंह, एआरटीओ प्रशासन
- कंपनियों के अलग-अलग रेट से ट्रांसपोर्टर परेशान, नहीं लगवा पा रहे डिवाइस
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। शासन से व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगाने का शुल्क तय नहीं है। गिनी-चुनी कंपनियों की एजेंसी होने से वीएलटीडी लगाने का रेट अलग-अलग हैं। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि एजेंसियां मनमाना शुल्क वसूल रहीं हैं। इसके चलते व्यवसायिक वाहनों के परमिट और फिटनेस रुक गई है।
संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार, जिले में 9440 वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाई जानी है। इनमें पांच हजार ट्रक, दो हजार प्राइवेट बसें, एक हजार टैक्सी और 1490 मैक्सी कैब हैं। इनमें से अभी तक एक हजार से अधिक वाहनों में ही वीएलटीडी लग पाई है। शासन ने व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी लगाने के लिए कंपनियां तय की हैं, जिस कंपनी का वाहन है, वह उसी कंपनी की एजेंसी पर वीएलटीडी लगवाएगा।
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जिले में कंपनियों की एजेंसियां गिनी-चुनी हैं, इसलिए उनमें ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं है। सभी कंपनियों ने अलग-अलग रेट तय कर दिए हैं। रेट अधिक होने के चलते ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। इसकी वजह से परमिट, टैक्स और फिटनेस संबंधित कार्य रुक गए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वीएलटीडी लगाने के लिए 10 से लेकर 25 हजार रुपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि हरियाणा-उत्तराखंड में वीएलटीडी की कीमत यहां के मुकाबले बेहद कम हैं। वहां प्रतिस्पर्धा नहीं है, क्योंकि कंपनियां ज्यादा हैं। इसलिए इन दोनों राज्यों में वीएलटीडी पांच से छह हजार रुपये में लगाई जा रही है।
- सहारनपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष सीपी सिंह का कहना है कि वीएलटीडी की अनिवार्यता से ट्रकों के पहिए थम गए हैं। एक या दो गाड़ी वालों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शासन से मांग है कि वीएलटीडी के लिए अधिकृत की गई कंपनियों का शुल्क निर्धारित किया जाए।
- ट्रांसपोर्टर रजनीश चंदा बताते हैं कि जिले में गिनी-चुनी कंपनियों की एजेंसियां हैं, जिनमें ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं है। वीएलटीडी लगाने का मनमाना शुल्क वसूल किया जा रहा है। डिवाइस की कीमत 10 से 25 हजार रुपये तक वसूली जा रही है। शुल्क को कम किया जाना चाहिए।
व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी शुल्क को लेकर शिकायतें आ रहीं हैं। कंपनी एजेंसियों के रेट अलग-अलग हैं, जिसे लेकर शासन को अवगत कराया गया है। - मानवेंद्र प्रताप सिंह, एआरटीओ प्रशासन

ट्रांसपोर्टर रजनीश चंदा। वीएलटीडी डिवाइस का शुल्क तय नहीं, वसूला जा रहा मनमाना वाली&n