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Saharanpur News: गर्मी का सितम...गाढ़ा खून, दिल बीमार
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डॉ. नईम कुरैशी। कार्डियोलॉजिस्ट राजकीय मेडिकल कॉलेज। गर्मी क
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- 40 डिग्री की गर्मी में दिल पर बढ़ा दबाव, राजकीय मेडिकल कॉलेज में बढ़ रहे मरीज
- ओपीडी में आ रहे 100 से 125 के बीच मरीज, 40 से अधिक की करानी पड़ती है ईको
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भीषण गर्मी और 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहे तापमान का असर लोगों के दिल पर भी पड़ रहा है। गर्मी में अत्यधिक पसीना आने के कारण शरीर में पानी की कमी खून को गाढ़ा बना रही है, जिससे दिल की समस्या बढ़ रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दिल की समस्या से जुड़े 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 60 साल की उम्र से अधिक वालों की संख्या ज्यादा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नईम कुरैशी बताते हैं कि दिल के मरीजों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को ओपीडी रहती है। वर्तमान में कार्डियोलॉजी ओपीडी में 100 से 125 के बीच मरीज पहुंच रहे हैं। 40 फीसदी से अधिक मरीजों की ईको होती है। तेज गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए कई बदलाव होते हैं। ज्यादा गर्मी में पसीना अधिक निकलता है, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम व पोटेशियम का संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर ब्लड सर्कुलेशन और दिल की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
डिहाइड्रेशन की स्थिति में शरीर में खून के गाढ़ेपन में बदलाव आ सकता है। इससे कुछ लोगों में ब्लड फ्लो प्रभावित होने और दिल संबंधी जोखिम बढ़ने की संभावना रहती है। खासतौर पर पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या शुगर वाले मरीजों को इस मौसम में सतर्क रहने की जरूरत है।
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-- दिल के मरीज यह करने से बचें
- तेज गर्मी और दोपहर की धूप में लंबे समय तक बाहर न रहें।
- अपनी मर्जी से हार्ट की दवा बंद या बदलें नहीं।
- पानी की कमी को नजरअंदाज न करें।
- गर्मी में ज्यादा मेहनत वाला काम या एक्सरसाइज से बचें।
- सीने में भारीपन या सांस फूलने को सामान्य न समझें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई नया सप्लीमेंट या दवा न लें।
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-- ये लक्षण दिखाई दें तो रहें सतर्क
- सीने में भारीपन, दबाव या असहज महसूस होना।
- अचानक सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना।
- ज्यादा घबराहट या बेचैनी महसूस होना।
- अचानक कमजोरी या अत्यधिक थकान होना।
- चक्कर आना या असामान्य बेचैनी महसूस होना
- धड़कन तेज चलना या धड़कन में बदलाव महसूस होना।
- नींद में लगातार परेशानी या शरीर में असामान्य बदलाव महसूस होना।
- ओपीडी में आ रहे 100 से 125 के बीच मरीज, 40 से अधिक की करानी पड़ती है ईको
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भीषण गर्मी और 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहे तापमान का असर लोगों के दिल पर भी पड़ रहा है। गर्मी में अत्यधिक पसीना आने के कारण शरीर में पानी की कमी खून को गाढ़ा बना रही है, जिससे दिल की समस्या बढ़ रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दिल की समस्या से जुड़े 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 60 साल की उम्र से अधिक वालों की संख्या ज्यादा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नईम कुरैशी बताते हैं कि दिल के मरीजों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को ओपीडी रहती है। वर्तमान में कार्डियोलॉजी ओपीडी में 100 से 125 के बीच मरीज पहुंच रहे हैं। 40 फीसदी से अधिक मरीजों की ईको होती है। तेज गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए कई बदलाव होते हैं। ज्यादा गर्मी में पसीना अधिक निकलता है, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम व पोटेशियम का संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर ब्लड सर्कुलेशन और दिल की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
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डिहाइड्रेशन की स्थिति में शरीर में खून के गाढ़ेपन में बदलाव आ सकता है। इससे कुछ लोगों में ब्लड फ्लो प्रभावित होने और दिल संबंधी जोखिम बढ़ने की संभावना रहती है। खासतौर पर पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या शुगर वाले मरीजों को इस मौसम में सतर्क रहने की जरूरत है।
- तेज गर्मी और दोपहर की धूप में लंबे समय तक बाहर न रहें।
- अपनी मर्जी से हार्ट की दवा बंद या बदलें नहीं।
- पानी की कमी को नजरअंदाज न करें।
- गर्मी में ज्यादा मेहनत वाला काम या एक्सरसाइज से बचें।
- सीने में भारीपन या सांस फूलने को सामान्य न समझें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई नया सप्लीमेंट या दवा न लें।
- सीने में भारीपन, दबाव या असहज महसूस होना।
- अचानक सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना।
- ज्यादा घबराहट या बेचैनी महसूस होना।
- अचानक कमजोरी या अत्यधिक थकान होना।
- चक्कर आना या असामान्य बेचैनी महसूस होना
- धड़कन तेज चलना या धड़कन में बदलाव महसूस होना।
- नींद में लगातार परेशानी या शरीर में असामान्य बदलाव महसूस होना।