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Saharanpur News: दारुल उलूम में अरबी की छोटी कक्षाओं में बाहरी छात्रों को नहीं मिलेगा प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 01 Jan 2026 01:33 AM IST
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देवबंद(सहारनपुर)। इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम ने नए साल की शुरुआत में बड़ा फैसला लिया है। संस्था में अब बाहरी छात्रों को अरबी कक्षा एक से अरबी कक्षा तीन तक की कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जबकि स्थानीय छात्रों के लिए इसमें छूट रखी गई है।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूर और व्यवस्थित करने के लिए दारुल उलूम प्रबंधन ने अहम फैसला लिया है। संस्था की एकेडमिक काउंसिल (अकादमिक परिषद) ने बैठक के बाद निर्णय लिया है कि संस्था में अरबी की छोटी कक्षाओं में बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने बताया कि दारुल उलूम में अरबी कक्षा एक से अरबी कक्षा तीन तक के बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा, उन्हें शुरुआती पढ़ाई अपने पुराने और स्थानीय मदरसों में ही पूरी करनी होगी, जबकि इसके बाद वह संस्था में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से मदरसों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा रहा है कि इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर तालीम दी जाए, इसके बाद उन्हें दारुल उलूम में प्रवेश के लिए भेजा जाए, लेकिन उसके बावजूद इस गंभीरता से नहीं लिया गया। संस्था में प्रवेश की व्यवस्था होने के कारण छोटी कक्षाओं के छात्र दारुल उलूम का रुख करते हैं। इसमें बहुत समय लगता है, जबकि यहां प्रवेश न मिलने की वजह से यह छात्र वापस पुराने मदरसों में भी नहीं पहुंचते। इसलिए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि अरबी कक्षा एक से कक्षा तीन तक के बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने बताया कि इस नई व्यवस्था में देवबंद के छात्रों, संस्था के उस्ताद व कर्मचारियों के बच्चों के लिए छूट रखी गई है।
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शिक्षा व्यवस्था को मजबूर और व्यवस्थित करने के लिए दारुल उलूम प्रबंधन ने अहम फैसला लिया है। संस्था की एकेडमिक काउंसिल (अकादमिक परिषद) ने बैठक के बाद निर्णय लिया है कि संस्था में अरबी की छोटी कक्षाओं में बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने बताया कि दारुल उलूम में अरबी कक्षा एक से अरबी कक्षा तीन तक के बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा, उन्हें शुरुआती पढ़ाई अपने पुराने और स्थानीय मदरसों में ही पूरी करनी होगी, जबकि इसके बाद वह संस्था में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से मदरसों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा रहा है कि इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर तालीम दी जाए, इसके बाद उन्हें दारुल उलूम में प्रवेश के लिए भेजा जाए, लेकिन उसके बावजूद इस गंभीरता से नहीं लिया गया। संस्था में प्रवेश की व्यवस्था होने के कारण छोटी कक्षाओं के छात्र दारुल उलूम का रुख करते हैं। इसमें बहुत समय लगता है, जबकि यहां प्रवेश न मिलने की वजह से यह छात्र वापस पुराने मदरसों में भी नहीं पहुंचते। इसलिए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि अरबी कक्षा एक से कक्षा तीन तक के बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने बताया कि इस नई व्यवस्था में देवबंद के छात्रों, संस्था के उस्ताद व कर्मचारियों के बच्चों के लिए छूट रखी गई है।
