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Saharanpur News: एसटीपी के निर्माण पर आपत्ति, फिर रुका काम
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 01 Jan 2026 01:33 AM IST
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सहारनपुर। 135 एमएलडी के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण फिर खटाई में पड़ गया है। सिंचाई विभाग ने एसटीपी स्थल पर नदी की कम चौड़ाई छोड़े जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके बाद एसटीपी का कार्य रोक दिया गया है। यह परियोजना पीपीपी मॉडल पर करीब 267 करोड़ रुपये की है।
एसटीपी का प्रस्ताव करीब पांच वर्ष पहले भेजा गया था, जिसके बाद मंजूरी मिल गई थी, लेकिन जमीन फाइनल नहीं होने की वजह से कार्य शुरू नहीं हो सका था।
करीब सात महीने पहले काम शुरू किया गया था, लेकिन टेंडर में नदी के तट (जिस जगह एसटीपी बनना है) का स्तर जो दर्शाया गया था वास्तव में वह उससे तीन मीटर गहरा निकला। कार्यदायी संस्था के आपत्ति जताने के बाद डीपीआर सहित अन्य कागजी कार्यवाही दोबारा शुरू की गई।
एसटीपी 4.5 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है, जो जल निगम की है। पिछले दिनों सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना करते हुए पाया कि एसटीपी स्थल पर नदी की चौड़ाई काफी कम कर दी गई है, जो बाढ़ जैसी स्थिति के लिए ठीक नहीं है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नदी की चौड़ाई जितनी पीछे है उतनी ही रखी जाए। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने फिलहाल काम रोक दिया है, क्योंकि यदि नदी की चौड़ाई पीछे के बराबर रखते हैं तो चिह्नित की गई 4.5 हेक्टेयर भूमि में करीब एक हेक्टेयर भूमि कम हो रही है। ऐसे में निर्माण एजेंसी को एक हेक्टेयर भूमि और चाहिए।
पहले देरी से शुरू होने और अब बीच में रुकने की वजह से एसटीपी का कार्य समय से पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। बता दें कि एसटीपी का कार्य पूर्ण करने के लिए 31 अक्तूबर 2027 की तिथि मिली है।
n हिंडन और यमुना भी होंगी साफ : सहारनपुर शहर के बीच से होकर गुजरने वाल पांवधोई नदी और ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदियां हैं। हिंडन नदी यमुना नदी में गिरती है। यानी शहर से निकलने वाला दूषित पानी कई नदियों को प्रभावित करता है। पांवधोई और ढमोला नदी में गिर रहे 98 नालों के पानी को एसटीपी तक लाने के लिए दोनों नदियों में 16 से 20 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइनलाइन डाली जाएगी। उसके बाद नदी में केवल प्राकृतिक स्रोत से आने वाला पानी ही बहेगा।
एसटीपी के जरिए शहर के दूषित पानी को साफ कर ढमोला में छोड़ा जाएगा, जिसका असर हिंडन और यमुना नदी तक पर पड़ेगा। संवाद
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एसटीपी का प्रस्ताव करीब पांच वर्ष पहले भेजा गया था, जिसके बाद मंजूरी मिल गई थी, लेकिन जमीन फाइनल नहीं होने की वजह से कार्य शुरू नहीं हो सका था।
करीब सात महीने पहले काम शुरू किया गया था, लेकिन टेंडर में नदी के तट (जिस जगह एसटीपी बनना है) का स्तर जो दर्शाया गया था वास्तव में वह उससे तीन मीटर गहरा निकला। कार्यदायी संस्था के आपत्ति जताने के बाद डीपीआर सहित अन्य कागजी कार्यवाही दोबारा शुरू की गई।
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एसटीपी 4.5 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है, जो जल निगम की है। पिछले दिनों सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना करते हुए पाया कि एसटीपी स्थल पर नदी की चौड़ाई काफी कम कर दी गई है, जो बाढ़ जैसी स्थिति के लिए ठीक नहीं है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नदी की चौड़ाई जितनी पीछे है उतनी ही रखी जाए। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने फिलहाल काम रोक दिया है, क्योंकि यदि नदी की चौड़ाई पीछे के बराबर रखते हैं तो चिह्नित की गई 4.5 हेक्टेयर भूमि में करीब एक हेक्टेयर भूमि कम हो रही है। ऐसे में निर्माण एजेंसी को एक हेक्टेयर भूमि और चाहिए।
पहले देरी से शुरू होने और अब बीच में रुकने की वजह से एसटीपी का कार्य समय से पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। बता दें कि एसटीपी का कार्य पूर्ण करने के लिए 31 अक्तूबर 2027 की तिथि मिली है।
n हिंडन और यमुना भी होंगी साफ : सहारनपुर शहर के बीच से होकर गुजरने वाल पांवधोई नदी और ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदियां हैं। हिंडन नदी यमुना नदी में गिरती है। यानी शहर से निकलने वाला दूषित पानी कई नदियों को प्रभावित करता है। पांवधोई और ढमोला नदी में गिर रहे 98 नालों के पानी को एसटीपी तक लाने के लिए दोनों नदियों में 16 से 20 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइनलाइन डाली जाएगी। उसके बाद नदी में केवल प्राकृतिक स्रोत से आने वाला पानी ही बहेगा।
एसटीपी के जरिए शहर के दूषित पानी को साफ कर ढमोला में छोड़ा जाएगा, जिसका असर हिंडन और यमुना नदी तक पर पड़ेगा। संवाद
