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Saharanpur News: 119 सहकारी समितियों और बैंकों से ऋण वसूली एक कुर्क अमीन के भरोसे

Fri, 17 Jul 2026 01:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 17 Jul 2026 01:36 AM IST
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Loan recovery from 119 cooperative societies and banks rests on a single attachment officer (Amin).
सहारनपुर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाली सहकारी समितियां और जिला सहकारी बैंक खुद व्यवस्था की कमी से जूझ रहे हैं। किसानों को समय पर ऋण तो दिया जा रहा है, लेकिन उसकी वसूली का पूरा बोझ जिले के इकलौते कुर्क अमीन पर है। 119 सहकारी समितियों और सहकारी बैंक के करोड़ों रुपये के बकाया के बीच केवल एक अमीन के भरोसे वसूली व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। नतीजा यह है कि ऋण वसूली की रफ्तार थम रही है और समितियों की वित्तीय सेहत पर असर पड़ रहा है।
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सहकारी समितियों से खाद, बीज या सहकारी बैंकों से ऋण लेने के बाद जो किसान समितियों का बकाया ऋण वापस नहीं देते उनके लिए विभाग की ओर से कुर्क अमीन रखे जाते हैं। ये कुर्क अमीन किसानों से बकाया ऋण की वसूली कर समितियों और बैंकों में जमा कराते हैं। इससे आने वाले वर्ष में किसानों को फिर से आसानी से ऋण मिलता है, साथ ही बैंक के दिए ऋण भी वसूल हो जाते हैं, लेकिन वसूली की जिम्मेदारी जिस कुर्क अमीनों के कंधों पर होती है। जिले में वह एकमात्र है। ऐसे में एक मात्र एक अमीन के जरिये जिलेभर से वसूली करा पाना संभव नहीं है। सहकारी बैंकों से मिलने वाले ऋण की वसूली भी पिछड़ रही है। यदि एक अप्रैल 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो 799 करोड़ रुपये की मांग के सापेक्ष 82 फीसदी ही वसूली हो पाई है। पिछले वर्ष भी यह तकरीबन 82 फीसदी ही थी।
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- कई वर्षों से नहीं कोई भी भर्ती



सहकारिता विभाग में वर्ष 1983 में जिलेभर में करीब 73 कुर्क अमीन कार्यरत थे। विभाग में कई वर्षों से भर्ती नहीं होने और कुर्क अमीनों की भर्ती पर रोक के चलते कोई भी नया अमीन भर्ती नहीं हुआ है। इसके साथ ही कुर्क अमीन राज्य कर्मचारी के दर्जा के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। पहले वसूली पर कुर्क अमीनों को छह फीसदी कमीशन मिलता था, यह भी घटकर अब तीन फीसदी रह गया है।
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वर्जन बकाया राशि की वसूली के लिए बैंकों से लेकर सहकारी समितियों के कर्मी भी प्रयासरत रहते हैं। नए कुर्क अमीनों की भर्ती नहीं हो पा रही है। इसके लिए शासन स्तर पर बात की जाएगी। वसूली प्रभावित न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।



- राजपाल सिंह, चेयरमैन जिला सहकारी बैंक
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