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Saharanpur News: प्राप्त हुआ पुष्टाहार, वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए ओटीपी सिस्टम लागू
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 19 Jun 2026 01:08 AM IST
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सहारनपुर। आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पुष्टाहार की रेसिपी में बदलाव किया गया था। ऐसे में पुष्टाहार वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। राहत की बात है कि जिले को नई रेसिपी के तहत पुष्टाहार प्राप्त हो गया है। साथ ही वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए ओटीपी सिस्टम लागू किया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि महानगर के साथ नकुड़, सरसावा, बलियाखेड़ी में पुष्टाहार का वितरण जल्द ही शुरू होगा। अब आयु वर्ग के हिसाब से खाने का मैन्यू तैयार किया गया है। छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को शिशु अमृत दिया जाएगा। एक से तीन वर्ष के बच्चों को आटा-बेसन का मीठा हलवा मिलेगा। तीन से छह वर्ष के बच्चों को बर्फी और दलिया-मूंग दाल खिचड़ी दी जाएगी। जो बच्चों कुपोषित की श्रेणी में हैं, उनके लिए विशेष भोजन को खाने में शामिल किया गया है। इसके अलावा गर्भवती और धात्री महिलाओं को मीठी बर्फी और पौष्टिक खिचड़ी दी जाएगी।
- वितरण प्रणाली में हुआ बदलाव
वितरित किए जाने वाले पोषाहार की प्रक्रिया में बदलाव हुआ है। अब पोषाहार को केंद्रों पर वितरित करते समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ओटीपी बताना होगा। यदि ओटीपी एप पर दर्ज नहीं होगा, तो वितरण में गड़बड़ी की स्थिति को पकड़ा जा सकेगा। आंगनबाड़ी यह नहीं कह सकेंगी कि उन्हें राशन नहीं मिला है या नेफेड यह दावा नहीं कर सकेगा कि उन्होंने राशन का वितरण कर दिया है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि महानगर के साथ नकुड़, सरसावा, बलियाखेड़ी में पुष्टाहार का वितरण जल्द ही शुरू होगा। अब आयु वर्ग के हिसाब से खाने का मैन्यू तैयार किया गया है। छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को शिशु अमृत दिया जाएगा। एक से तीन वर्ष के बच्चों को आटा-बेसन का मीठा हलवा मिलेगा। तीन से छह वर्ष के बच्चों को बर्फी और दलिया-मूंग दाल खिचड़ी दी जाएगी। जो बच्चों कुपोषित की श्रेणी में हैं, उनके लिए विशेष भोजन को खाने में शामिल किया गया है। इसके अलावा गर्भवती और धात्री महिलाओं को मीठी बर्फी और पौष्टिक खिचड़ी दी जाएगी।
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- वितरण प्रणाली में हुआ बदलाव
वितरित किए जाने वाले पोषाहार की प्रक्रिया में बदलाव हुआ है। अब पोषाहार को केंद्रों पर वितरित करते समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ओटीपी बताना होगा। यदि ओटीपी एप पर दर्ज नहीं होगा, तो वितरण में गड़बड़ी की स्थिति को पकड़ा जा सकेगा। आंगनबाड़ी यह नहीं कह सकेंगी कि उन्हें राशन नहीं मिला है या नेफेड यह दावा नहीं कर सकेगा कि उन्होंने राशन का वितरण कर दिया है।