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Saharanpur: महमूद मदनी बोले- मदरसों के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला संविधान की जीत; ये है पूरा मामला
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Tue, 20 Jan 2026 07:44 PM IST
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सार
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बताया कि हाईकोर्ट ने मान्यता न होने पर ही मदरसों को बंद करने या सील करने को गलत बताया है। हाईकोर्ट का ये फैसला स्वागत के योग्य है।
मौलाना महमूद मदनी।
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विस्तार
बिना मान्यता वाले मदरसों के संचालन को वैध बताए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारतीय संविधान की सर्वोच्चता और सांविधानिक मूल्यों की जीत है।
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मौलाना महमूद मदनी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने मदरसों को लेकर दिए फैसले में स्पष्ट किया है कि महज मान्यता न होने की बुनियाद पर किसी मदरसे को बंद कर देना, सील करना या उसकी पढ़ाई रोकना कानूनन गलत है। यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के मदरसा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके चलते प्रशासन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर सके।
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उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला सभी सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए साफ संदेश है, जो दीनी मदरसों और मकतबों (छोटे मदरसे) को बंद करने जैसे कदमों को अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे थे। मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत श्रावस्ती जनपद के 30 मदरसों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में पक्षकार भी रही है और उत्तराखंड सरकार के रवैये के खिलाफ भी कानूनी संघर्ष कर रही है। हाईकोर्ट के इस फैसले से जमीयत के इन प्रयासों को मजबूती मिली है। उन्होंने मदरसा संचालकों से आह्वान किया कि वह अपने आंतरिक प्रबंधन और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाते रहें, ताकि विरोध करने वालों को कोई बहाना न मिले।
