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यूपी चुनाव 2022: सहारनपुर के इस गांव में ग्रामीणों का दावा, बसपा मुखिया मायावती के कार्यकाल के बाद नहीं हुआ विकास

Sat, 12 Feb 2022 01:25 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 12 Feb 2022 01:25 PM IST
सार

सहारनपुर के 45 वर्षीय राजकुमार कहते हैं कि गांव की जल निकास व्यवस्था भी ठीक नहीं है और गांव के लोगों ने मायावती की सरकार जाने के बाद से विकास का मुंह तक नहीं देखा है।

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UP Election 2022: Residents of a Saharanpur village claim no development took place after Mayawati tenure
लकड़ी का कारीगर, सहारनपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का गढ़कोली गांव, जिसे 'ग्रेट चमार गांव' के नाम से भी जाना जाता है। इस गांव के लोग 14 फरवरी को मतदान करेंगे, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती जब से सत्ता से बाहर हुई हैं, तब से उनके गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है।
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मायावती के रहते काफी हुआ विकास
ग्रामीण केशवराम का कहना है कि मायावती ने एक मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में बनाया, लेकिन अखिलेश यादव ने उसका भी नाम बदल दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमें राशन दिया लेकिन उन्हें मेडिकल कॉलेज को और सुविधाएं देनी चाहिए थी, दवाइयों की सुविधाएं भी देनी चाहिए थी, जो नहीं मिली। अब जो भी हो, लेकिन क्षेत्र में मायावती के रहते हुए काफी विकास हुआ। 

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महंगाई और बेरोजगारी बड़े मुद्दे
वहीं गांव के ही एक अन्य ग्रामीण मेनपाल कहते हैं कि महंगाई और बेरोजगारी नियंत्रित होनी चाहिए, यही गांव का सबसे बड़ा मुद्दा है। हम रोजगार चाहते हैं। हम यहां नौकरियों के लिए लड़ रहे हैं, जो हमें जिंदगी की जद्दोजेहद करने पर मजबूर करती है। महंगाई चरम पर है और मनरेगा की मजदूरी अब तक पुरानी ही चल रही है। मुझे लगता है कि बसपा ने प्रदेश में एक अनुशासित सरकार के रूप में काम किया और बिना किसी डर के काम किया। वहीं भाजपा ने हर चीज का निजीकरण किया है और शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ बेहतर नहीं किया। 
 

दशकों से गांव ने नहीं देखा विकास का मुंह
45 वर्षीय राजकुमार कहते हैं कि गांव की जल निकास व्यवस्था भी ठीक नहीं है और गांव के लोगों ने मायावती की सरकार जाने के बाद से विकास का मुंह तक नहीं देखा है। यहां तक कि गांव में नालियों की व्यवस्था भी नहीं की गई है, पिछली दो सरकारों ने चाहे वह समाजवादी पार्टी हो या फिर भाजपा उन्होंने अपने लिए काम किया है और स्थानीय विकास को दरकिनार किया है। वह आगे कहते हैं कि बेरोजगारी इस समय चरम पर है बसपा सरकार के समय में गांव में विकास हुआ। 

गांव के अन्य लोगों का मानना है कि भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद अब भी अब तक भी दलित नेता के रूप में खुद को पहचान बना रहे हैं। वहीं अब तक भी मायावती की एक मजबूत पकड़ गांव और समाज पर है। 

बता दें कि सहारनपुर में 14 फरवरी को दूसरे चरण में मतदान होना है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 10 फरवरी से 7 मार्च तक 7 चरणों में चुनाव होना है। दूसरे चरण में सहारनपुर में लोग अपने मत का प्रयोग करेंगे। वहीं 10 मार्च को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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