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Sambhal News: सस्ती दवा का दावा संभल में हवा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 02:08 AM IST
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Claim of Anaerobic medicine spreads in the air in Sambhal
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संभल। जन औषधि केंद्रों के जरिये सस्ती दवा का दावा जिले में हवा में उड़ता दिख रहा है। जिला अस्पताल में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर न तो सैनेटरी पेड है और न ही बच्चों को दूध में मिलाकर दिया जाने वाले पोषण की उपलब्धता है। दर्द की दवा, त्रिफला आदि भी नहीं है। जिस कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि फार्मासिस्ट का कहना है कि इन सभी की आपूर्ति जल्द होने वाली है।
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प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवाओं, सर्जिकल आइटमों को लेकर 1950 की सूची है। इनमें 200 तरह के सर्जिकल आइटम होते हैं जबकि अन्य दवाएं। डॉक्टरों के लिखने के मुताबिक की दवा का स्टॉक किया जाता है। जिला अस्पताल में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर इस समय 250 तरह की दवाओं की उपलब्धता है। इनमें 143 तरह की दवा की आपूर्ति बृहस्पतिवार को ही हुई है।
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हालांकि कुछ ऐसी भी चीजें हैं जो मरीजों को अभी नहीं मिल पा रही हैं। इनमें सैनेटरी पेड उपलब्ध नहीं है और न ही पोषण है। पोषण बच्चों को दूध में मिलाकर देने के काम में आता है। जिससे बच्चे हेल्दी होते हैं। आइसक्सोप्रिन दवा भी नहीं है। यह दवा दर्द के काम में आती है। त्रिफला की उपलब्धता भी यहां नहीं है। केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट जौहर अली का कहना है कि वैसे तो अधिकांश दवा केंद्र पर उपलब्ध हैं। मरीजों को कोई दिक्कत नहीं है। जिनकी उपलब्धता नहीं है, उनकी आपूर्ति जल्द होने वाली है। इस बारे में बात भी हो चुकी है।
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शहर में संचालित होते हैं छह जन औषधि केंद्र, पूरा स्टॉक कहीं नहीं
शहर में छह जन औषधि केंद्र संचालित होते हैं। इसमें एक केंद्र जिला अस्पताल परिसर के अंदर संचालित किया जाता है। जबकि दूसरा जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल से करीब 50 मीटर दूरी पर है। चार केंद्र शहर के अलग-अलग हिस्से में संचालित हो रहे हैं। इन सभी छह केंद्रों पर दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। जरूरत के मुताबिक ही स्टॉक रखा जाता है। जो महंगी दवाएं हैं वह भी मिलना मुश्किल होती हैं। दिल, दिमाग, गुर्दा व अन्य गंभीर बीमारी की दवाएं तो निजी मेडिकल से ही लोग खरीदते हैं।
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सरकारी अस्पताल के मरीज निजी मेडिकल से खरीदते हैं दवाएं
सरकारी अस्पताल में दवाओं का स्टॉक पूरा होने का लाख दावा किया जाए लेकिन यह दावा हकीकत में महज दावा ही है। निजी मेडिकल स्टोर से खूब दवाएं खरीदने के लिए मरीज मजबूर हैं। खासतौर पर गर्भवती महिलाएं या उनके तीमारदार दवाएं खरीदते हुए मिल जाते हैं। यही कारण हैं जो सरकारी अस्पताल के आसपास निजी मेडिकल स्टोर की संख्या ज्यादा है। निजी मेडिकल स्टोर से दवाई लिखी जाती है तो सादी पर्ची पर लिख दी जाती है। ताकि कोई साबित न कर सके कि यह दवाई सरकारी अस्पताल से लिखी गई है।
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