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Sambhal News: किसानों के जीवन में कड़वाहट भर गई स्ट्राबेरी, फसल फेंक रहे किसान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:54 AM IST
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Strawberries have brought bitterness to farmers' lives, and farmers are throwing away their crops.
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संभल। स्ट्राबेरी की जो खेती संभल के किसानों के जीवन में रस भर रही थी, वह इस बार भारी नुकसान की कड़वाहट भर गई है। तैयार फसल पर बारिश और ओलावृष्टि कहर बन गई। इससे फसल को नुकसान हुआ है। मांग है कि प्रशासन फसल का सर्वे कराए और मुआजवा दे। जिससे किसानाें को कुछ हद तक राहत मिल सके।
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संभल में करीब 500 एकड़ भूमि में किसान स्ट्राबेरी की खेती करते हैं। उन्नत खेती के रूप में इसकी पहचान हुई और कई वर्ष से इसका रकबा साल दर साल बढ़ता चला गया। इस बार किसानों को उम्मीद थी कि दाम सही मिल जाएगा तो उनके जीवन में स्ट्राबेरी रस भर देंगी। हालांकि यह उम्मीद 27 जनवरी को टूट गई। सारा दिन बारिश हुई और रात में करीब 15 मिनट तक ओले बरसे। इस बारिश और ओले का असर स्ट्राबेरी की तैयार फसल पर तीन दिन बाद देखने को मिला है।
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तैयार फसल गलने लगी है। किसानों ने मजबूरन फेंकना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि इस बार जो तैयार फसल थी, इसकी लागत तक नहीं निकल पा रही है। किसानों ने मांग उठाई है कि प्रशासन को फसल में हुए नुकसान का सर्वे कराना चाहिए। नुकसान का आकलन कराएं और मुआवजा दिया जाए। छोटे किसानों ने तो कर्ज लेकर फसल की थी। उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।
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अगस्त-सितंबर में रोपा जाता है पौधा, नवंबर और दिसंबर तक आता है फल
स्ट्राबेरी की खेती मौसम के अनुसार की जाती है। अधिक तापमान में इस फसल को किया नहीं जा सकता। इसलिए अगस्त और सितंबर में पौधे रोपित किए जाते हैं। एक बीघा में करीब पांच हजार पौधे रोपित हो जाते हैं। नवंबर में फल आने लगता है। दिसंबर तक फल बाजार भेजने की स्थिति में पहुंच जाता है। जनवरी के दूसरे सप्ताह से फरवरी के दूसरे सप्ताह तक फसल बाजार तक जाती है।
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दिल्ली और एनसीआर तक है संभल की स्ट्राबेरी की मांग
स्ट्राबेरी की खेती पुणे व दूसरे कई शहरों में होती है। अब संभल में खेती का रकबा बढ़ा है तो पहचान भी मिल गई है। किसानों का कहना है कि दिल्ली, एनसीआर और प्रदेश के कई जिलों तक संभल की स्ट्राबेरी ही जाती है। इसकी मांग भी खूब रहती है। किसान खेत से ही पैकिंग कर भेजते हैं। इस बार कुछ ही माल बाजार तक पहुंचा है। इस बार भाव भी कम मिल रहा है। 130 रुपये प्रति किलोग्राम भाव किसान बता रहे हैं। आमतौर पर 200 रुपये तक इसका भाव पहुंच जाता है। इससे ही किसानों को मुनाफा होता है।
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क्या बोले किसान-

बारिश से स्ट्राबेरी खराब हो जाती है। एक बीघा में करीब एक लाख रुपये की लागत लग जाती है। इस समय 130 रुपये प्रतिकिलोग्राम का भाव मिल रहा है। बारिश से नुकसान ऐसा हुआ है कि फेंकनी पड़ रही है। इस बार नुकसान हो गया है।
फैजान, किसान, संभल।
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एक दिन की बारिश और ओले से फसल का नुकसान हो गया है। इस समय तो स्ट्राबेरी को फेंकना पड़ रहा है। लागत भी नहीं निकल पाएगी। इस मौसम में बिक्री ज्यादा रहती है और इसी मौसम में नुकसान हो गया है।
परवेज, किसान, संभल।
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बारिश से पूरी तैयार फसल खराब हो गई है। एक लाख रुपये प्रति बीघा की लागत आती है। आधी लागत भी नहीं निकल पाएगी। तैयार फसल खराब हो गई और फेंकनी पड़ रही है।
लाला, किसान, संभल।
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इस बार क्षेत्र में स्ट्राबेरी का बड़ा रकबा था। सभी को पूरा नुकसान हुआ है। जितनी लागत लगी है उसकी आधी कीमत भी नहीं मिल पाएगी। तैयार फसल पर बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। प्रशासन को सर्वे कराना चाहिए।
मोहम्मद तनवीर, किसान, संभल।
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