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Shahjahanpur News: सड़कों पर दौड़ रहे सांड़, छुट्टा पशुओं ने भी डाला डेरा
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शहर के बिसरात रोड पर बैठे गोवंशीय पशु। संवाद
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शाहजहांपुर। जिले में खेत-खलिहानों से लेकर प्रमुख मार्गों तक घूम रहे छुट्टा गोवंश किसानों और राहगीरों के लिए लगातार मुसीबत बने हुए हैं। सांड़ों के हमलों में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, कुछ लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने के प्रशासनिक दावे जमीनी स्तर पर असर नहीं दिखा रहे।
जिले में 18 वृहद गो संरक्षण केंद्र तो 120 अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। करीब चार हजार पशुओं को गोवंशीय पशु सहभागिता योजना के तहत ग्रामीणों के सुपुर्द किया गया है। बावजूद इसके छुट्टा पशुओं की समस्या ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही शहर में भी है। शहर की हर सड़क पर छुट्टा पशु बैठे रहते हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के आसपास अजीजगंज क्षेत्र में तो रात में निकलना मुश्किल हो जाता है। सड़क पर बैठे पशु नजर नहीं आते और हादसे की आशंका बनी रहती है। छावनी क्षेत्र की सड़कों पर भी छुट्टा पशु घूमते रहते हैं। सांड़ अक्सर हमला कर देते हैं। कुछ समय पहले आवास विकास क्षेत्र में दादी और पोती को छुट्टा पशुओं ने घायल कर दिया था। इसके बावजूद पशुओं को पकड़ने की कवायद शुरू नहीं की गई है।
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जैतीपुर : नहीं लिया सबक, फिर हुई घटना में सांड़ के सींग मारने से आंतें तक बाहर निकल आईं
जैतीपुर। शुक्रवार सुबह जैतीपुर क्षेत्र के गांव अली अकबरपुर नवादा में एक सांड़ के सींग मारने से अजय गंभीर रूप से घायल हो गया। दो सांड़ों की लड़ाई के बीच से गुजर रहे अजय के पेट में सींग लगने से उसकी आंतें बाहर आ गईं। उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
इससे पहले 13 जुलाई को जैतीपुर क्षेत्र के ही भुड़िया गांव में खेत पर धान की फसल देखने जा रहे किशोर समर सिंह को सांड़ ने हमला कर घायल कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहली घटना के बाद छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई होती तो दूसरी घटना टाली जा सकती थी। जिले के तिलहर-दातागंज स्टेट हाईवे सहित कई प्रमुख मार्गों पर रात में छुट्टा गोवंश सड़क पर डेरा डाल देते हैं।
जैतीपुर थाने के सामने, गौहावर, खेड़ा-बझेड़ा समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में पशु खुलेआम घूमते रहते हैं। खेड़ा-बझेड़ा के नखासा बाजार स्थित देवस्थान के पास अक्सर 100 से अधिक गोवंश एकत्र रहते हैं। इससे किसानों को फसलों की रखवाली करने में भी खतरा बना रहता है। संवाद
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जलालाबाद : कांवड़ यात्रा के दौरान भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जलालाबाद। सावन शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे और शाहजहांपुर मार्ग पर छुट्टा गोवंश का जमावड़ा अब भी बना हुआ है। इन्हीं मार्गों से फर्रुखाबाद के पांचाल घाट और मिर्जापुर क्षेत्र के ढाईघाट से गंगाजल लेकर गोला गोकर्णनाथ जाने वाले कांवड़िये गुजरते हैं।
अल्हागंज, चौरसिया, गोरा, दहेना, बझेड़ा चौराहा, याकूबपुर तिराहा, बारह पत्थर चौराहा, कलक्टरगंज, उबरिया मंदिर, गंगा एक्सप्रेसवे फ्लाईओवर के नीचे, पुरेना मोड़, रैपुरा, कसारी और जरियनपुर तिराहे सहित कई स्थानों पर बड़ी संख्या में छुट्टा पशु सड़क पर बैठे या घूमते दिखाई देते हैं।
बरसात में खेतों और कच्ची जमीन पर पानी भर जाने के कारण गोवंश अधिक समय सड़क पर ही रहते हैं। रात में वाहनों की तेज रोशनी के कारण सड़क पर बैठे पशु समय रहते दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले यदि छुट्टा पशुओं को नहीं हटाया गया तो श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। संवाद
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हाल ही में हुईं घटनाएं
15 जुलाई : खुदागंज के ग्राम उत्तमपुर में खेत देखने जा रहे किसान सुखलाल कश्यप (48) को सांड़ ने पटककर मार डाला।
21 जुलाई : सांड़ के सींग मारने से खुटार के ग्राम इटौआ के संदीप कुमार बुरी तरह से घायल हो गए।
10 जुलाई : खेत पर गए मिर्जापुर के जरियनपुर में खेत पर गए 28 वर्षीय विपिन कुमार को सांड़ ने सींग मारकर मार डाला। इसी दिन पुवायां के राजीव चौक पर आरसी मिशन थाना क्षेत्र के उदौपारा गांव निवासी मुनेश कुमार (40) को सांड़ ने उठाकर पटक दिया। जिससे उनकी मौत हो गई।
चार जुलाई : पुवायां हाईवे पर कार सांड़ से टकराई, फिर बाइक से भिड़ी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए।
1 फरवरी : जलालाबाद के हथिनापुर गांव में खेत में चारा खा रहे सांड़ को भगाने गए करन (26) को सांड़ ने उठाकर पटक दिया। उनकी मौत हो गई।
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बारिश होने के कारण हाईवे पर गोवंशीय पशुओं की संख्या बढ़ गई है। फिर भी सबसे पहले कांवड़ मार्ग से पशुओं को हटाकर संरक्षित करने का अभियान शुरू किया गया है। 13 वृहद गोशालाएं निर्माणाधीन हैं और छह नई वृहद गोशालाओं के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इनके बनने से राहत मिलने की उम्मीद है।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
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जिले में 18 वृहद गो संरक्षण केंद्र तो 120 अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। करीब चार हजार पशुओं को गोवंशीय पशु सहभागिता योजना के तहत ग्रामीणों के सुपुर्द किया गया है। बावजूद इसके छुट्टा पशुओं की समस्या ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही शहर में भी है। शहर की हर सड़क पर छुट्टा पशु बैठे रहते हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के आसपास अजीजगंज क्षेत्र में तो रात में निकलना मुश्किल हो जाता है। सड़क पर बैठे पशु नजर नहीं आते और हादसे की आशंका बनी रहती है। छावनी क्षेत्र की सड़कों पर भी छुट्टा पशु घूमते रहते हैं। सांड़ अक्सर हमला कर देते हैं। कुछ समय पहले आवास विकास क्षेत्र में दादी और पोती को छुट्टा पशुओं ने घायल कर दिया था। इसके बावजूद पशुओं को पकड़ने की कवायद शुरू नहीं की गई है।
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जैतीपुर : नहीं लिया सबक, फिर हुई घटना में सांड़ के सींग मारने से आंतें तक बाहर निकल आईं
जैतीपुर। शुक्रवार सुबह जैतीपुर क्षेत्र के गांव अली अकबरपुर नवादा में एक सांड़ के सींग मारने से अजय गंभीर रूप से घायल हो गया। दो सांड़ों की लड़ाई के बीच से गुजर रहे अजय के पेट में सींग लगने से उसकी आंतें बाहर आ गईं। उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
इससे पहले 13 जुलाई को जैतीपुर क्षेत्र के ही भुड़िया गांव में खेत पर धान की फसल देखने जा रहे किशोर समर सिंह को सांड़ ने हमला कर घायल कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहली घटना के बाद छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई होती तो दूसरी घटना टाली जा सकती थी। जिले के तिलहर-दातागंज स्टेट हाईवे सहित कई प्रमुख मार्गों पर रात में छुट्टा गोवंश सड़क पर डेरा डाल देते हैं।
जैतीपुर थाने के सामने, गौहावर, खेड़ा-बझेड़ा समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में पशु खुलेआम घूमते रहते हैं। खेड़ा-बझेड़ा के नखासा बाजार स्थित देवस्थान के पास अक्सर 100 से अधिक गोवंश एकत्र रहते हैं। इससे किसानों को फसलों की रखवाली करने में भी खतरा बना रहता है। संवाद
जलालाबाद : कांवड़ यात्रा के दौरान भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जलालाबाद। सावन शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे और शाहजहांपुर मार्ग पर छुट्टा गोवंश का जमावड़ा अब भी बना हुआ है। इन्हीं मार्गों से फर्रुखाबाद के पांचाल घाट और मिर्जापुर क्षेत्र के ढाईघाट से गंगाजल लेकर गोला गोकर्णनाथ जाने वाले कांवड़िये गुजरते हैं।
अल्हागंज, चौरसिया, गोरा, दहेना, बझेड़ा चौराहा, याकूबपुर तिराहा, बारह पत्थर चौराहा, कलक्टरगंज, उबरिया मंदिर, गंगा एक्सप्रेसवे फ्लाईओवर के नीचे, पुरेना मोड़, रैपुरा, कसारी और जरियनपुर तिराहे सहित कई स्थानों पर बड़ी संख्या में छुट्टा पशु सड़क पर बैठे या घूमते दिखाई देते हैं।
बरसात में खेतों और कच्ची जमीन पर पानी भर जाने के कारण गोवंश अधिक समय सड़क पर ही रहते हैं। रात में वाहनों की तेज रोशनी के कारण सड़क पर बैठे पशु समय रहते दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले यदि छुट्टा पशुओं को नहीं हटाया गया तो श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। संवाद
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हाल ही में हुईं घटनाएं
15 जुलाई : खुदागंज के ग्राम उत्तमपुर में खेत देखने जा रहे किसान सुखलाल कश्यप (48) को सांड़ ने पटककर मार डाला।
21 जुलाई : सांड़ के सींग मारने से खुटार के ग्राम इटौआ के संदीप कुमार बुरी तरह से घायल हो गए।
10 जुलाई : खेत पर गए मिर्जापुर के जरियनपुर में खेत पर गए 28 वर्षीय विपिन कुमार को सांड़ ने सींग मारकर मार डाला। इसी दिन पुवायां के राजीव चौक पर आरसी मिशन थाना क्षेत्र के उदौपारा गांव निवासी मुनेश कुमार (40) को सांड़ ने उठाकर पटक दिया। जिससे उनकी मौत हो गई।
चार जुलाई : पुवायां हाईवे पर कार सांड़ से टकराई, फिर बाइक से भिड़ी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए।
1 फरवरी : जलालाबाद के हथिनापुर गांव में खेत में चारा खा रहे सांड़ को भगाने गए करन (26) को सांड़ ने उठाकर पटक दिया। उनकी मौत हो गई।
बारिश होने के कारण हाईवे पर गोवंशीय पशुओं की संख्या बढ़ गई है। फिर भी सबसे पहले कांवड़ मार्ग से पशुओं को हटाकर संरक्षित करने का अभियान शुरू किया गया है। 13 वृहद गोशालाएं निर्माणाधीन हैं और छह नई वृहद गोशालाओं के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इनके बनने से राहत मिलने की उम्मीद है।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम

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