{"_id":"6a4ab6f727053bee0307cd76","slug":"from-the-kitchen-to-the-stage-homemakers-have-scripted-a-new-story-of-self-confidence-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1036-178105-2026-07-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: रसोई से रंगमंच तक... गृहिणियों ने रची आत्मविश्वास की नई कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: रसोई से रंगमंच तक... गृहिणियों ने रची आत्मविश्वास की नई कहानी
विज्ञापन
कृभको नगर में रामलीला का मंचन करतीं महिला कलाकार। फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आले नबी
शाहजहांपुर। घर और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने वाली कृभको फर्टिलाइजर्स टाउनशिप की गृहिणियों अब अपनी एक नई पहचान गढ़ रही हैं। रंगमंच की दुनिया में कदम रखते हुए वे अभिनय की बारीकियां सीख रही हैं। महिलाओं ने सिद्ध किया कि सीखने और खुद को अभिव्यक्त करने की कोई उम्र नहीं होती।
रंगमंच से जुड़ने से पहले गृहिणियों की एक बंधी दिनचर्या थी। सुबह-शाम रसोई, बच्चों की जिम्मेदारियां और घर-परिवार की जरूरतों में समय गुजरता था। रंगमंच से जुड़ने के बाद सृजनशील महिलाओं के हाथों में बेलन की जगह नाटक की स्क्रिप्ट है। चेहरों पर झिझक की जगह आत्मविश्वास और मंच पर मजबूती से बढ़ते कदम उनकी एक नई पहचान गढ़ रहे हैं।
पिछले कई साल से चल रहे रामलीला मंचन में वह सशक्त भूमिका निभाती आई हैं। शौक को जिंदा रखने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं में गृहिणियों ने अभिनय की बारीकियां सीखी हैं। संवाद अदायगी, शरीर संचालन, भाव भंगिमा और समूह में काम करने का अभ्यास उनके व्यक्तित्व में नया आत्मविश्वास भर रहा है।
विज्ञापन
उनके अभिनय के पीछे जिले के वरिष्ठ रंगकर्मी व प्रशिक्षक आलोक सक्सेना की मेहनत भी साफ नजर आती है। आलोक बताते हैं कि गृहिणियों के पास अनुभव, संवेदनाएं और जीवन की गहरी समझ होती है। जब उन्हें मंच मिलता है तो वे केवल अभिनय नहीं करतीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों को कला की अभिव्यक्ति में बदल देती हैं। (संवाद)
--
अवसर की थी तलाश
रंगमंच ने मुझे खुद से मिलवाया है। अब महसूस होता है कि हर किसी के भीतर एक कलाकार छिपा होता है, जिसे बाहर लाने के लिए एक अवसर चाहिए होता है।
-प्रियंका तायल
-- -- -- -- -- --
आत्मविश्वास से कह सकते हैं बात
पहले मंच पर आने की कल्पना से भी घबराहट होती थी। अब रंगमंच से जुड़कर लगता है कि अपने मन की बात पूरे आत्मविश्वास से कह सकती हूं। रंगकर्म से काफी सीखने को मिला है।
- जागृति गुप्ता
--
अंदर छिपी पहचान को खोजा
मंच पर हम केवल पात्र नहीं निभा रहे होते, बल्कि अपने भीतर छिपी उस पहचान को भी खोज रहे होते हैं, जो वर्षों से घरेलू जिम्मेदारियों के बीच कहीं खो गई थी। यह सुनहरा अवसर मिला है।
-ज्योति देव
--
परिवार की तरह रंगकर्म ने जोड़ा
हम सभी अलग पृष्ठभूमि से हैं, लेकिन रंगमंच ने हमें एक परिवार की तरह जोड़ दिया है। हमें कुछ नया सीखने और खुद को अभिव्यक्त करने को मिल रहा है।
-लक्ष्मी रेड्डी
विज्ञापन
शाहजहांपुर। घर और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने वाली कृभको फर्टिलाइजर्स टाउनशिप की गृहिणियों अब अपनी एक नई पहचान गढ़ रही हैं। रंगमंच की दुनिया में कदम रखते हुए वे अभिनय की बारीकियां सीख रही हैं। महिलाओं ने सिद्ध किया कि सीखने और खुद को अभिव्यक्त करने की कोई उम्र नहीं होती।
रंगमंच से जुड़ने से पहले गृहिणियों की एक बंधी दिनचर्या थी। सुबह-शाम रसोई, बच्चों की जिम्मेदारियां और घर-परिवार की जरूरतों में समय गुजरता था। रंगमंच से जुड़ने के बाद सृजनशील महिलाओं के हाथों में बेलन की जगह नाटक की स्क्रिप्ट है। चेहरों पर झिझक की जगह आत्मविश्वास और मंच पर मजबूती से बढ़ते कदम उनकी एक नई पहचान गढ़ रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले कई साल से चल रहे रामलीला मंचन में वह सशक्त भूमिका निभाती आई हैं। शौक को जिंदा रखने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं में गृहिणियों ने अभिनय की बारीकियां सीखी हैं। संवाद अदायगी, शरीर संचालन, भाव भंगिमा और समूह में काम करने का अभ्यास उनके व्यक्तित्व में नया आत्मविश्वास भर रहा है।
विज्ञापन
उनके अभिनय के पीछे जिले के वरिष्ठ रंगकर्मी व प्रशिक्षक आलोक सक्सेना की मेहनत भी साफ नजर आती है। आलोक बताते हैं कि गृहिणियों के पास अनुभव, संवेदनाएं और जीवन की गहरी समझ होती है। जब उन्हें मंच मिलता है तो वे केवल अभिनय नहीं करतीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों को कला की अभिव्यक्ति में बदल देती हैं। (संवाद)
अवसर की थी तलाश
रंगमंच ने मुझे खुद से मिलवाया है। अब महसूस होता है कि हर किसी के भीतर एक कलाकार छिपा होता है, जिसे बाहर लाने के लिए एक अवसर चाहिए होता है।
-प्रियंका तायल
आत्मविश्वास से कह सकते हैं बात
पहले मंच पर आने की कल्पना से भी घबराहट होती थी। अब रंगमंच से जुड़कर लगता है कि अपने मन की बात पूरे आत्मविश्वास से कह सकती हूं। रंगकर्म से काफी सीखने को मिला है।
- जागृति गुप्ता
अंदर छिपी पहचान को खोजा
मंच पर हम केवल पात्र नहीं निभा रहे होते, बल्कि अपने भीतर छिपी उस पहचान को भी खोज रहे होते हैं, जो वर्षों से घरेलू जिम्मेदारियों के बीच कहीं खो गई थी। यह सुनहरा अवसर मिला है।
-ज्योति देव
परिवार की तरह रंगकर्म ने जोड़ा
हम सभी अलग पृष्ठभूमि से हैं, लेकिन रंगमंच ने हमें एक परिवार की तरह जोड़ दिया है। हमें कुछ नया सीखने और खुद को अभिव्यक्त करने को मिल रहा है।
-लक्ष्मी रेड्डी

कृभको नगर में रामलीला का मंचन करतीं महिला कलाकार। फाइल फोटो

कृभको नगर में रामलीला का मंचन करतीं महिला कलाकार। फाइल फोटो

कृभको नगर में रामलीला का मंचन करतीं महिला कलाकार। फाइल फोटो

कृभको नगर में रामलीला का मंचन करतीं महिला कलाकार। फाइल फोटो