{"_id":"6a6e4b8bf0c742f6330c1610","slug":"age-has-advanced-but-faith-remains-undiminished-the-zeal-for-the-kanwar-yatra-persists-even-on-the-threshold-of-seventy-shamli-news-c-26-1-aur1003-170896-2026-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: उम्र ढली, आस्था नहीं... सत्तर की देहरी पर भी कांवड़ का जोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: उम्र ढली, आस्था नहीं... सत्तर की देहरी पर भी कांवड़ का जोश
Sun, 02 Aug 2026 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:09 AM IST
विज्ञापन
बुजुर्ग कांवड़िया सुभाष चंद्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ बुजुर्ग श्रद्धालुओं का जोश भी कम नहीं है। बुजुर्गों का उत्साह भी लोगों को प्रेरित कर रहा है। 65 से 73 वर्ष आयु में बोल बम के जयकारे जोश भर रहे है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके चेहरे पर न थकान है और न ही कोई शिकन।
शहर के कैराना रोड स्थित कांवड़ शिविर में मिले राजस्थान के महेंद्रगढ़ निवासी 73 वर्षीय रोहताश ने बताया कि यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है। उन्होंने कहा कि जब तक भोलेनाथ की कृपा रहेगी, तब तक वह हर साल कांवड़ लाते रहेंगे। उनके अनुसार कांवड़ यात्रा से मन को शांति और जीवन को नई ऊर्जा मिलती है।
महेंद्रगढ़ निवासी 67 वर्षीय श्रीराम ने बताया कि कई वर्षों से कांवड़ लाने की इच्छा थी। इस बार भगवान शिव की कृपा से उनका संकल्प पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि भक्ति के सामने उम्र और थकान दोनों छोटी पड़ जाती हैं।
विज्ञापन
हरियाणा के पानीपत निवासी 65 वर्षीय सुभाष चंद्र पिछले पांच वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान शिव की भक्ति उन्हें हर बार नई शक्ति देती है। श्रद्धा हो तो कोई भी दूरी कठिन नहीं लगती।
कई बुजुर्ग श्रद्धालु अपने बेटों और पोतों के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का माध्यम भी है।
विज्ञापन
शहर के कैराना रोड स्थित कांवड़ शिविर में मिले राजस्थान के महेंद्रगढ़ निवासी 73 वर्षीय रोहताश ने बताया कि यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है। उन्होंने कहा कि जब तक भोलेनाथ की कृपा रहेगी, तब तक वह हर साल कांवड़ लाते रहेंगे। उनके अनुसार कांवड़ यात्रा से मन को शांति और जीवन को नई ऊर्जा मिलती है।
विज्ञापन
महेंद्रगढ़ निवासी 67 वर्षीय श्रीराम ने बताया कि कई वर्षों से कांवड़ लाने की इच्छा थी। इस बार भगवान शिव की कृपा से उनका संकल्प पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि भक्ति के सामने उम्र और थकान दोनों छोटी पड़ जाती हैं।
विज्ञापन
हरियाणा के पानीपत निवासी 65 वर्षीय सुभाष चंद्र पिछले पांच वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान शिव की भक्ति उन्हें हर बार नई शक्ति देती है। श्रद्धा हो तो कोई भी दूरी कठिन नहीं लगती।
कई बुजुर्ग श्रद्धालु अपने बेटों और पोतों के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का माध्यम भी है।

बुजुर्ग कांवड़िया सुभाष चंद्र

बुजुर्ग कांवड़िया सुभाष चंद्र