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Shamli News: मां की मौत के नौ माह बाद छह बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
Sun, 26 Jul 2026 01:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:13 AM IST
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बाबरी (शामली)। हरियाणा के जिला सोनीपत के कुंडली से ट्रैक्टर-ट्रॉली में घरेलू सामान लादकर घर लौट रहे बाबरी निवासी लोकेश कुमार (45) व ट्रैक्टर चालक अजय कुमार (40) की सड़क हादसे में मौत हो गई। लोकेश के छह बेटियां है। उनकी पत्नी रानी की नौ महीने पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी। अब छह बेटियों के सिर से पिता का भी साया उठ गया। उधर, अजय की मौत के बाद परिवार में पत्नी व दो बेटियां रह गई हैं।
बाबरी निवासी लोकेश कुमार ईंट भट्ठे पर पथाई की मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उनके चाचा पालेराम ने बताया कि लोकेश की पत्नी रानी की करीब नौ महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। लोकेश के छह बेटियां हैं, जिनमें दो की शादी हो चुकी है और चार अभी अविवाहित है। लोकेश का छोटा भाई श्रीनिवास हरियाणा के सोनीपत की कुंडली में परिवार समेत रहकर टेंपो चलाता हैं। लोकेश की बेटियों की देखभाल व परवरिश के लिए श्रीनिवास ने तय किया था कि वह कुंडली से आकर परिवार समेत बाबरी में रहेगा। इसी के चलते शुक्रवार दोपहर 11 बजे लोकेश गांव के अजय की ट्रैक्टर-ट्रॉली को किराये पर लेकर कुंडली से श्रीनिवास का घरेलू सामान लेकर लौट रहा था कि हादसा हो गया।
अजय भी ईंट भट्ठे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी ढुलाई का काम करता था। अजय की मौत के बाद परिवार में पत्नी गुड्डी, आठ वर्षीय मानवी व छह वर्षीय देविका रह गई हैं। गुड्डी गर्भवती है। हादसे की सूचना मिलते ही दोनों के परिजन रात में ही बड़ौत के लिए रवाना हो गए थे। लोकेश व अजय पर ही परिवार का पालन पोषण करने की जिम्मेदारी थी। अब दोनों परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट बन गया है। शनिवार शाम को दोनों के शव गांव में पहुंचे। परिजनों ने गमगीन माहौल में शवों का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में किया।
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टेंपो से एक किलोमीटर आगे परिवार के साथ चल रहे थे श्रीनिवास
श्रीनिवास ने बताया कि वे अपने टेंपो में पत्नी कविता, दो पुत्री खुशी व एना और पुत्र हैप्पी के साथ लौट रहे थे। जिस स्थान पर हादसा हुआ, उस समय वे उनसे करीब एक किलोमीटर आगे चल रहे थे। हादसे की जानकारी मिलने पर वे वापस मौके पर पहुंचे। श्रीनिवास ने बताया कि लाेकेश चार भाइयों में सबसे बड़े थे। अजय कुमार पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे।
लोकेश की दूसरे नंबर की बेटी की शादी 15 दिन पहले हुई थी
लोकेश की सबसे बड़ी बेटी मोहिनी की शादी तीन वर्ष पहले हुई थी। दूसरे नंबर की बेटी काजल की 15 दिन पहले नौ जुलाई को शादी हुई है। अब प्रिया (21), शिखा (19), रूसी (15) और अवनी (6) वर्ष अविवाहित हैं।
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बाबरी निवासी लोकेश कुमार ईंट भट्ठे पर पथाई की मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उनके चाचा पालेराम ने बताया कि लोकेश की पत्नी रानी की करीब नौ महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। लोकेश के छह बेटियां हैं, जिनमें दो की शादी हो चुकी है और चार अभी अविवाहित है। लोकेश का छोटा भाई श्रीनिवास हरियाणा के सोनीपत की कुंडली में परिवार समेत रहकर टेंपो चलाता हैं। लोकेश की बेटियों की देखभाल व परवरिश के लिए श्रीनिवास ने तय किया था कि वह कुंडली से आकर परिवार समेत बाबरी में रहेगा। इसी के चलते शुक्रवार दोपहर 11 बजे लोकेश गांव के अजय की ट्रैक्टर-ट्रॉली को किराये पर लेकर कुंडली से श्रीनिवास का घरेलू सामान लेकर लौट रहा था कि हादसा हो गया।
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अजय भी ईंट भट्ठे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी ढुलाई का काम करता था। अजय की मौत के बाद परिवार में पत्नी गुड्डी, आठ वर्षीय मानवी व छह वर्षीय देविका रह गई हैं। गुड्डी गर्भवती है। हादसे की सूचना मिलते ही दोनों के परिजन रात में ही बड़ौत के लिए रवाना हो गए थे। लोकेश व अजय पर ही परिवार का पालन पोषण करने की जिम्मेदारी थी। अब दोनों परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट बन गया है। शनिवार शाम को दोनों के शव गांव में पहुंचे। परिजनों ने गमगीन माहौल में शवों का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में किया।
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टेंपो से एक किलोमीटर आगे परिवार के साथ चल रहे थे श्रीनिवास
श्रीनिवास ने बताया कि वे अपने टेंपो में पत्नी कविता, दो पुत्री खुशी व एना और पुत्र हैप्पी के साथ लौट रहे थे। जिस स्थान पर हादसा हुआ, उस समय वे उनसे करीब एक किलोमीटर आगे चल रहे थे। हादसे की जानकारी मिलने पर वे वापस मौके पर पहुंचे। श्रीनिवास ने बताया कि लाेकेश चार भाइयों में सबसे बड़े थे। अजय कुमार पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे।
लोकेश की दूसरे नंबर की बेटी की शादी 15 दिन पहले हुई थी
लोकेश की सबसे बड़ी बेटी मोहिनी की शादी तीन वर्ष पहले हुई थी। दूसरे नंबर की बेटी काजल की 15 दिन पहले नौ जुलाई को शादी हुई है। अब प्रिया (21), शिखा (19), रूसी (15) और अवनी (6) वर्ष अविवाहित हैं।