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बुद्ध के सिद्धांत प्रशस्त करते हैं निर्वाण मार्ग : देवानंद
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 13 Mar 2026 11:41 PM IST
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गंध कुटी में प्रार्थना करते वियतनाम के अनुयायी।
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कटरा। वियतनाम से आए अनुयायियों का 40 सदस्यीय दल शुक्रवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से गंध कुटी व बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
सभा में भिक्षु देवानंद ने बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्यों का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि आर्य सत्य जीवन में दुख को समझने, उसके कारण को जानने, उसके निवारण को प्राप्त करने वाले मार्ग का पालन करने के सिद्धांत हैं। यही सिद्धांत दुख से मुक्ति दिलाकर परम सुख यानी निर्वाण तक पहुंचाते हैं। पहला सत्य दुख का है, जिसमें जन्म, बुढ़ापा, बीमारी, मृत्यु और प्रियजनों से बिछड़ना शामिल है। दूसरा सत्य दुख के कारण का है, जिसका मूल तृष्णा (इच्छा, लालसा) है। तीसरा सत्य दुख के निवारण का है, जो तृष्णा के पूरी तरह मिट जाने से प्राप्त होता है, जिसे निर्वाण कहते हैं। चौथा सत्य दुख के निवारण के मार्ग का है, जो अष्टांगिक मार्ग है। अष्टांगिक मार्ग में सही समझ, सही संकल्प, सही वाणी, सही कर्म, सही आजीविका, सही प्रयास, सही स्मृति और सही समाधि शामिल हैं।
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सभा में भिक्षु देवानंद ने बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्यों का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि आर्य सत्य जीवन में दुख को समझने, उसके कारण को जानने, उसके निवारण को प्राप्त करने वाले मार्ग का पालन करने के सिद्धांत हैं। यही सिद्धांत दुख से मुक्ति दिलाकर परम सुख यानी निर्वाण तक पहुंचाते हैं। पहला सत्य दुख का है, जिसमें जन्म, बुढ़ापा, बीमारी, मृत्यु और प्रियजनों से बिछड़ना शामिल है। दूसरा सत्य दुख के कारण का है, जिसका मूल तृष्णा (इच्छा, लालसा) है। तीसरा सत्य दुख के निवारण का है, जो तृष्णा के पूरी तरह मिट जाने से प्राप्त होता है, जिसे निर्वाण कहते हैं। चौथा सत्य दुख के निवारण के मार्ग का है, जो अष्टांगिक मार्ग है। अष्टांगिक मार्ग में सही समझ, सही संकल्प, सही वाणी, सही कर्म, सही आजीविका, सही प्रयास, सही स्मृति और सही समाधि शामिल हैं।
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