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Shravasti News: समितियों पर ताला, खाद के लिए भटक रहे किसान
Wed, 08 Jul 2026 01:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Wed, 08 Jul 2026 01:06 AM IST
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इटरोली में पीसीफ कृषक सेवा केंद्र पर लटक रहा ताला।
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श्रावस्ती। तराई में खाद की बढ़ती मांग के बीच सहकारी समितियों पर ताले लटक रहे हैं। खाद के लिए किसान एक समिति से दूसरी समिति का चक्कर काटने को मजबूर हैं। बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। इसके चलते किसान धान की रोपाई न होने से उनकी फसल पिछड़ रही है। खाद न मिलने से किसान उत्पादन कम होने की बात कह रहे हैं। वहीं, कुछ किसान निजी दुकानों पर अपनी जेब ढीली कर रहे हैं। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी खाद होेने के दावा करते नहीं थक रहे हैं।
लटकता मिला ताला
हरदत्तनगर गिरंट क्षेत्र स्थित पीसीएफ केंद्र इटरौली में पड़ताल के दौरान ताला लटकता नजर आया। खाद के लिए समिति पहुंचे किसान मनोज, संजय, बड़कऊ आदि ने बताया कि बीते कई दिनों से पीसीएफ केंद्र का चक्कर काट रहे हैं और खाद नहीं मिल पा रही है। सचिव अतुल सिंह ने बताया कि उनके पास चिचड़ी का भी प्रभार है। जहां से खाद की उठान होती है। इसकी जानकारी हमारे विभागीय अधिकारियों को भी है। इसी के चलते इटरौली में खाद का वितरण नहीं हो पा रहा है।
ताले में समिति, भटकते मिले किसान
सिरसिया स्थित साधन सहकारी समिति बिशुनापुर पड़वलिया की पड़ताल में यहां भी ताला लटकता मिला। वहीं, एक बोरी खाद के लिए कई किसान समिति के चक्कर काटते नजर आए। किसान सुबोध, निरंजन, शुभम आदि ने बताया कि कई दिनों से समिति में खाद नहीं मिल पा रही है। ऐसे में धान की रोपाई पिछड़ सकती है। सचिव अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने बताया, कि दो दिन बाद खाद आ जाएगी और उसके बाद वितरण किया जाएगा।
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सचिवों पर लगाया मनमानी का आरोप
डोमाई गांव निवासी किसान रामपारस विश्वकर्मा ने बताया कि धान रोपाई का समय चल रहा है, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। अगर समय पर वितरण नहीं हुआ तो फसल को नुकसान होगा। लोहनिया निवासी जवाहरलाल मौर्य ने बताया कि हम लोग लगातार समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की मनमानी के चलते खाद नहीं मिल पा रही है। बिशुनापुर निवासी किसान नीवर प्रसाद पासवान ने आरोप लगाया कि दो ट्रक खाद आई है, लेकिन सचिव द्वारा खाद का वितरण नहीं किया जा रहा है। इटरौली निवासी किसान लवकुश कुमार यादव ने बताया कि पीसीएफ केंद्र कभी नहीं खुलता है। इसके चलते महंगे दाम पर निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है। किसान आनंद यादव ने बताया कि खाद के लिए दिनभर भटकते हैं और इसके चक्कर में खेती पिछड़ रही है।
फार्मर आईडी भी बनी मुसीबत
खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए शासन की ओर से फार्मर आईडी अनिवार्य की गई है। खतौनी पर खातेदार का नाम और उनके आधार कार्ड पर अंकित नामों में अंतर होने से खतौनी में अंश निर्धारण सही से नहीं हो पा रहा है। जयचंदपुर कटघरा निवासी किसान नवनीत तिवारी ने बताया की धान के रोपाई के लिए खाद की जरूरत है, लेकिन फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। किसान राजेश यादव ने बताया कि धान की नर्सरी व गन्ने की फसल के लिए खाद की जरूरत है, लेकिन फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है।
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लटकता मिला ताला
हरदत्तनगर गिरंट क्षेत्र स्थित पीसीएफ केंद्र इटरौली में पड़ताल के दौरान ताला लटकता नजर आया। खाद के लिए समिति पहुंचे किसान मनोज, संजय, बड़कऊ आदि ने बताया कि बीते कई दिनों से पीसीएफ केंद्र का चक्कर काट रहे हैं और खाद नहीं मिल पा रही है। सचिव अतुल सिंह ने बताया कि उनके पास चिचड़ी का भी प्रभार है। जहां से खाद की उठान होती है। इसकी जानकारी हमारे विभागीय अधिकारियों को भी है। इसी के चलते इटरौली में खाद का वितरण नहीं हो पा रहा है।
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ताले में समिति, भटकते मिले किसान
सिरसिया स्थित साधन सहकारी समिति बिशुनापुर पड़वलिया की पड़ताल में यहां भी ताला लटकता मिला। वहीं, एक बोरी खाद के लिए कई किसान समिति के चक्कर काटते नजर आए। किसान सुबोध, निरंजन, शुभम आदि ने बताया कि कई दिनों से समिति में खाद नहीं मिल पा रही है। ऐसे में धान की रोपाई पिछड़ सकती है। सचिव अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने बताया, कि दो दिन बाद खाद आ जाएगी और उसके बाद वितरण किया जाएगा।
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सचिवों पर लगाया मनमानी का आरोप
डोमाई गांव निवासी किसान रामपारस विश्वकर्मा ने बताया कि धान रोपाई का समय चल रहा है, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। अगर समय पर वितरण नहीं हुआ तो फसल को नुकसान होगा। लोहनिया निवासी जवाहरलाल मौर्य ने बताया कि हम लोग लगातार समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की मनमानी के चलते खाद नहीं मिल पा रही है। बिशुनापुर निवासी किसान नीवर प्रसाद पासवान ने आरोप लगाया कि दो ट्रक खाद आई है, लेकिन सचिव द्वारा खाद का वितरण नहीं किया जा रहा है। इटरौली निवासी किसान लवकुश कुमार यादव ने बताया कि पीसीएफ केंद्र कभी नहीं खुलता है। इसके चलते महंगे दाम पर निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है। किसान आनंद यादव ने बताया कि खाद के लिए दिनभर भटकते हैं और इसके चक्कर में खेती पिछड़ रही है।
फार्मर आईडी भी बनी मुसीबत
खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए शासन की ओर से फार्मर आईडी अनिवार्य की गई है। खतौनी पर खातेदार का नाम और उनके आधार कार्ड पर अंकित नामों में अंतर होने से खतौनी में अंश निर्धारण सही से नहीं हो पा रहा है। जयचंदपुर कटघरा निवासी किसान नवनीत तिवारी ने बताया की धान के रोपाई के लिए खाद की जरूरत है, लेकिन फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। किसान राजेश यादव ने बताया कि धान की नर्सरी व गन्ने की फसल के लिए खाद की जरूरत है, लेकिन फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है।