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अंश निर्धारण : लेखपाल-कानूनगो की लापरवाही, रिश्तों में पड़ रही दरार
Sat, 08 Aug 2026 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:35 PM IST
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अंश निर्धारण पीड़िता अनोखा।
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तुलसीपुर। जमुनहा तहसील क्षेत्र में भूमि के अंश निर्धारण में लेखपालों और कानूनगो की लापरवाही ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। गलत अंश निर्धारण से जमीन के हिस्से को लेकर परिवारों में विवाद और झगड़े बढ़ रहे हैं।
जमीन की खरीद-बिक्री भी प्रभावित हो रही है। किसान फार्मर आईडी नहीं बनवा पा रहे हैं, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत और आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद जिम्मेदार समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। इससे परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है और ग्रामीणों में असंतोष है। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट...
केस- 01
चाचा व उनके बेटों से बनी है विवाद की स्थिति
जमुनहा तहसील क्षेत्र के तुलसीपुर गांव निवासी अनोखा ने बताया कि उनका मायका दंदौरा गांव में है और वह पिता राम अभिलाख की इकलौती बेटी हैं। उनके पिता के तीन भाई बाबूराम, चंद्रिका प्रसाद और गोगेराम थे। बाबूराम की मृत्यु के बाद उनके हिस्से की जमीन चंद्रिका प्रसाद के बेटों अमरपाल व जैकरन को मिली। राम अभिलाख की मौत के बाद उनकी जमीन अनोखा के नाम हो गई, जबकि गोगेराम की मृत्यु के बाद उनकी जमीन बेटों दीनानाथ व नरेंद्रनाथ को मिली। आरोप है कि अंश निर्धारण में गलती कर गाटा संख्या 900 में छह लोगों को हिस्सेदार बना दिया गया। गाटा संख्या 1789 और 904 में भी गड़बड़ी हुई। इससे चाचा व उनके बेटों से विवाद है और फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है।
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केस- 02
खरीदार व उत्तराधिकारियों का हिस्सा कर दिया बराबर
जमुनहा तहसील की ग्राम पंचायत तुलसीपुर निवासी शिवकुमार ने अंश निर्धारण में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता चंद्रभान के पास 2.7980 हेक्टेयर जमीन थी, जिसमें से पांच बीघा मालती देवी को बेच दी थी। पिता की मृत्यु के बाद शेष जमीन रामशंकर, रामरूप, शिव प्रसाद, जगदीश प्रसाद और राम प्रसाद को नियमानुसार मिली। रामरूप ने एक बीघा और अन्य भाइयों ने ढाई-ढाई बीघा जमीन बेची। रामरूप की मृत्यु के बाद प्रदीप, प्रवीण व पत्नी रामप्यारी, जबकि जगदीश की मृत्यु के बाद संदीप, संजीव व पत्नी उमा उत्तराधिकारी बने। आरोप है कि बाद में सभी के नाम बराबर 0.1554 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया।
केस- 03
चंदरखा बुजुर्ग में दर्जनों किसान परेशान
अंश निर्धारण में गड़बड़ी का मामला केवल तुलसीपुर और ददौरा तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत चंदरखाबुजुर्ग में भी दर्जनों ग्रामीण इससे प्रभावित हैं। हरीराम, रामबचन, रामजियावन, सच्चिदानंद यादव व अरविंद कुमार समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके अंश निर्धारण में त्रुटियां हुई हैं। सुधार के लिए वे लगातार तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। किसानों ने डीएम से गांवों में शिविर लगाकर लेखपाल-कानूनगो से पुराने दस्तावेज, उत्तराधिकार पत्र और बिक्री प्रपत्र जांचकर अभिलेख दुरुस्त कराने की मांग की।
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जमीन की खरीद-बिक्री भी प्रभावित हो रही है। किसान फार्मर आईडी नहीं बनवा पा रहे हैं, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत और आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद जिम्मेदार समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। इससे परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है और ग्रामीणों में असंतोष है। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट...
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केस- 01
चाचा व उनके बेटों से बनी है विवाद की स्थिति
जमुनहा तहसील क्षेत्र के तुलसीपुर गांव निवासी अनोखा ने बताया कि उनका मायका दंदौरा गांव में है और वह पिता राम अभिलाख की इकलौती बेटी हैं। उनके पिता के तीन भाई बाबूराम, चंद्रिका प्रसाद और गोगेराम थे। बाबूराम की मृत्यु के बाद उनके हिस्से की जमीन चंद्रिका प्रसाद के बेटों अमरपाल व जैकरन को मिली। राम अभिलाख की मौत के बाद उनकी जमीन अनोखा के नाम हो गई, जबकि गोगेराम की मृत्यु के बाद उनकी जमीन बेटों दीनानाथ व नरेंद्रनाथ को मिली। आरोप है कि अंश निर्धारण में गलती कर गाटा संख्या 900 में छह लोगों को हिस्सेदार बना दिया गया। गाटा संख्या 1789 और 904 में भी गड़बड़ी हुई। इससे चाचा व उनके बेटों से विवाद है और फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है।
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केस- 02
खरीदार व उत्तराधिकारियों का हिस्सा कर दिया बराबर
जमुनहा तहसील की ग्राम पंचायत तुलसीपुर निवासी शिवकुमार ने अंश निर्धारण में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता चंद्रभान के पास 2.7980 हेक्टेयर जमीन थी, जिसमें से पांच बीघा मालती देवी को बेच दी थी। पिता की मृत्यु के बाद शेष जमीन रामशंकर, रामरूप, शिव प्रसाद, जगदीश प्रसाद और राम प्रसाद को नियमानुसार मिली। रामरूप ने एक बीघा और अन्य भाइयों ने ढाई-ढाई बीघा जमीन बेची। रामरूप की मृत्यु के बाद प्रदीप, प्रवीण व पत्नी रामप्यारी, जबकि जगदीश की मृत्यु के बाद संदीप, संजीव व पत्नी उमा उत्तराधिकारी बने। आरोप है कि बाद में सभी के नाम बराबर 0.1554 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया।
केस- 03
चंदरखा बुजुर्ग में दर्जनों किसान परेशान
अंश निर्धारण में गड़बड़ी का मामला केवल तुलसीपुर और ददौरा तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत चंदरखाबुजुर्ग में भी दर्जनों ग्रामीण इससे प्रभावित हैं। हरीराम, रामबचन, रामजियावन, सच्चिदानंद यादव व अरविंद कुमार समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके अंश निर्धारण में त्रुटियां हुई हैं। सुधार के लिए वे लगातार तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। किसानों ने डीएम से गांवों में शिविर लगाकर लेखपाल-कानूनगो से पुराने दस्तावेज, उत्तराधिकार पत्र और बिक्री प्रपत्र जांचकर अभिलेख दुरुस्त कराने की मांग की।