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UP: हर रोज गहराता जा रहा सिलिंडर संकट, फोर स्टार होटल में 15 दिन से लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना

अमर उजाला नेटवर्क, श्रावस्ती Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 23 Mar 2026 05:54 PM IST
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सार

कॉमर्शियल सिलिंडरों की किल्लत अब होटल कारोबार के लिए मुसीबत बन गई है। टाईल्स व संगमरमर पत्थरों से चमचमाते व पर्यटकों को लुभाने वाले इन होटलों में अब लकड़ी के चूल्हे जल रहे हैं।

Shravasti: four-star hotel cooks food on wood stove for 15 days in four star hotel in Shravasti.
होटल में लकड़ी पर बन रहा खाना। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कॉर्शियल सिलिंडरों की किल्लत का दंश छोटे होटल व ढाबों के बाद अब बड़े होटलों तक पहुंच गया है। किल्लत का आलम ये है कि श्रावस्ती स्थित चार सितारा होटल में बीते 15 दिनों से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बन रहा है। ऐसा तब है जब इस होटल में प्रतिदिन 50 से अधिक विदेशी पर्यटक ठहरते हैं और 250 से अधिक लोगों का खाना व नाश्ता बनता है। होटल डॉयरेक्टर प्रदीप कुमार सक्सेना ने जिला प्रशासन से पत्राचार कर कॉमर्शियल सिलिंडर की मांग की है।

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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती साल भर पर्यटकों से गुलजार रहती है। बौद्ध तीर्थ श्रावस्ती में दर्शन-पूजन के लिए श्रीलंका, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बर्मा आदि देशों के सैकड़ों पर्यटक प्रतिदिन आते हैं। पर्यटक श्रावस्ती स्थित होटलों में ठहरते हैं और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है लेकिन ईरान-इस्राइल युद्ध के बाद शुरू हुई कॉमर्शियल सिलिंडरों की किल्लत अब होटल कारोबार के लिए मुसीबत बन गई है। टाईल्स व संगमरमर पत्थरों से चमचमाते व पर्यटकों को लुभाने वाले इन होटलों में अब लकड़ी के चूल्हे जल रहे हैं।
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आलम ये है कि बौद्ध तीर्थ स्थली श्रावस्ती स्थित चार सितारा होटल प्लेटिनम में बीते 15 दिनों से लकड़ी के चूल्हे पर खाना व नाश्ता बन रहा है।

प्रतिदिन दो कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है

Shravasti: four-star hotel cooks food on wood stove for 15 days in four star hotel in Shravasti.
इंडक्शन कुकर का भी किया जा रहा इस्तेमाल। - फोटो : amar ujala

होटल के जनरल मैनेजर वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि अप्रैल माह तक श्रावस्ती में बौद्ध तीर्थ करने वाले स्थानीय और विदेशी श्रद्धालुओं की आवक बनी रहती है।

इस दौरान प्रतिदिन लगभग 200 पर्यटक व 50 होटल स्टाफ सहित 250 लोगों का खाना व नाश्ता बनता है जिसके लिए प्रतिदिन दो कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है। सिलिंडर के अभाव में 15 दिनों से होटल में पर्यटकों व स्टॉफ के लिए मजबूरन लकड़ी का चूल्हा जलाना पड़ रहा है। जिसमें अब तक 15 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल हो चुका है।

प्रदूषण होने के साथ-साथ लगता है अधिक समय

Shravasti: four-star hotel cooks food on wood stove for 15 days in four star hotel in Shravasti.
होटल में लकड़ी पर बनता खाना। - फोटो : amar ujala
होटल के डॉरेक्टर प्रदीप कुमार सक्सोना ने बताया कि लकड़ी का चूल्हा जलने से एक ओर जहां प्रदूषण हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर खाना पकाने व नाश्ता तैयार करने में समय भी लग रहा है। इंडेक्शन की मदद भी ली जा रही है लेकिन बड़े स्तर पर इंडेक्शन पर खाना पकाना संभव नहीं हो पा रहा है। सिलिंडर की आपूर्ति के लिए जिला प्रशासन को पत्राचार किया गया है लेकिन अभी राहत नहीं मिली है।
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