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Shravasti News: सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर ढोए जा रहे विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:52 AM IST
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तुलसीपुर चौराहे पर ई रिक्शा में पटरा लगाकर बैठा विद्यार्थी। - संवाद
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श्रावस्ती/तुलसीपुर। शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के साथ ही विद्यालयों में चहल-पहल भी शुरू हो गई है। घर से विद्यालयों तक विद्यार्थियों को लाने व वापस ले जाने के लिए मानक विहीन संसाधनों की भरमार है। जिले के 54 विद्यालयों में 132 वाहनों से बच्चों को लाया व वापस ले जाया जाता है। सुरक्षा मानकों को धता बताकर ई रिक्शा व टेंपो भी विद्यार्थियों को विद्यालय पहुंचाते हैं।
जिले में कुल 1302 विद्यालय शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। इनमें से 54 विद्यालय ऐसे हैं, जो 132 वाहनों के सहारे विद्यार्थियों को परिवहन की सुविधा प्रदान करते हैं। हालांकि कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाए, तो कई स्कूल ऐसे हैं जहां छोटी गाड़ियों से बच्चों को लाया व वापस ले जाया जाता है।
इन वाहनों में न तो अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था नजर आती है और न ही बच्चों को सीट बेल्ट ही लगाया जाता है। कई विद्यालय तो बिना पंजीकरण के ई रिक्शा व टेंपो से भी विद्यार्थियों को ढोते हैं। इन वाहनों के चालक जमकर मानकों का मखौल उड़ाते नजर आते हैं। ई रिक्शा में सीट पर पटरा लगाकर भी बच्चों को बैठा दिया जाता है। चार सवारियों की परमिट पर आठ से 10 बच्चों को बैठाया जाता है।
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बीते शिक्षा सत्र में मात्र सात वाहनों का हुआ था चालान
लोगों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले परिवहन विभाग पर स्कूली वाहनों में सुरक्षा के इंतजाम परखने की भी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बीते शिक्षा सत्र में कुल 27 वाहनों का ही चालान किया गया। इनमें जिले के मात्र सात वाहन शामिल हैं। 20 वाहन ऐसे हैं जो दूसरे जिलों से इस जिले में आकर मानकों के विपरीत बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं। इसी तरह कुल 12 वाहन ऐसे हैं, जिनकी पंजीयन अवधि ही समाप्त हो चुकी है। नौ वाहन बिना फिटनेस के ही सड़क पर फर्राटा भर रहे हैं।
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स्कूली वाहनों की जांच अभियान चलाकर की जा रही है। कोई वाहन मानक विहीन मिलने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अन्य दिनों में भी वाहनों की जांच की जाती है।
- विनीत कुमार मिश्रा, एआरटीओ
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जिले में कुल 1302 विद्यालय शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। इनमें से 54 विद्यालय ऐसे हैं, जो 132 वाहनों के सहारे विद्यार्थियों को परिवहन की सुविधा प्रदान करते हैं। हालांकि कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाए, तो कई स्कूल ऐसे हैं जहां छोटी गाड़ियों से बच्चों को लाया व वापस ले जाया जाता है।
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इन वाहनों में न तो अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था नजर आती है और न ही बच्चों को सीट बेल्ट ही लगाया जाता है। कई विद्यालय तो बिना पंजीकरण के ई रिक्शा व टेंपो से भी विद्यार्थियों को ढोते हैं। इन वाहनों के चालक जमकर मानकों का मखौल उड़ाते नजर आते हैं। ई रिक्शा में सीट पर पटरा लगाकर भी बच्चों को बैठा दिया जाता है। चार सवारियों की परमिट पर आठ से 10 बच्चों को बैठाया जाता है।
बीते शिक्षा सत्र में मात्र सात वाहनों का हुआ था चालान
लोगों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले परिवहन विभाग पर स्कूली वाहनों में सुरक्षा के इंतजाम परखने की भी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बीते शिक्षा सत्र में कुल 27 वाहनों का ही चालान किया गया। इनमें जिले के मात्र सात वाहन शामिल हैं। 20 वाहन ऐसे हैं जो दूसरे जिलों से इस जिले में आकर मानकों के विपरीत बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं। इसी तरह कुल 12 वाहन ऐसे हैं, जिनकी पंजीयन अवधि ही समाप्त हो चुकी है। नौ वाहन बिना फिटनेस के ही सड़क पर फर्राटा भर रहे हैं।
स्कूली वाहनों की जांच अभियान चलाकर की जा रही है। कोई वाहन मानक विहीन मिलने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अन्य दिनों में भी वाहनों की जांच की जाती है।
- विनीत कुमार मिश्रा, एआरटीओ