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Shravasti News: कटान में बह गया मतदान का अधिकार
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होलिया गांव के कटान पीड़ित।
- फोटो : होलिया गांव के कटान पीड़ित।
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श्रावस्ती/गिरंट बाजार। जमुनहा तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेलरी निवासी कटान पीड़ित मतदाता सूची में अपना नाम बढ़वाने के लिए जिले से लेकर तहसील तक दर-दर भटकने को मजबूर हैं। साल 2014 में आई बाढ़ के दौरान 150 ग्रामीणों के घर कट गए थे और सभी ने पड़ोसी जिले बहराइच की ग्राम पंचायत होलिया के मजरा लक्ष्मणपुर लहसोरवा में शरण ली थी। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 200 लोगों का नाम न तो बहराइच में दर्ज है और न ही उनके गांव बेलरी की मतदाता सूची में है।
ग्राम पंचायत बेलरी निवासी बच्चू यादव, सीताराम यादव, चेतराम यादव, बाउर यादव आदि ने बताया कि वर्ष 2013 तक वो लोग बेलरी में रहते थे। इस दौरान साल 2014 में राप्ती ने विकराल रूप लिया और भीषण बाढ़ में उनके घर नदी में समाहित हो गए। बाढ़ से बेघर होने के बाद उन सभी ने साल 2014-15 में पड़ोसी जिले बहराइच के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत होलिया के मजरा लक्ष्मणपुर लहसोरवा में नया आशियाना बनाया, लेकिन उनका नाम होलिया की मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुआ। वहीं, उनके मूल ग्राम पंचायत बेलरी से भी उनका नाम हट गया।
दोबारा बेलरी में बसे, फिर भी नाम दर्ज नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि नदी के कटान के कई साल बीतने के बाद अब नदी ने उन लोगों की जमीन छोड़ दी और धारा गांव से दूर हो गई थी। इसके बाद उन सभी को उनकी पैतृक भूमि अब वापस मिल गई है। करीब छह माह पहले उन सभी ने अपनी पैतृक जमीन पर फूस के घर बनाकर दोबारा रहना शुरू कर दिया है। बावजूद इसके उनका नाम वर्तमान पते के अनुसार बेलरी गांव की मतदाता सूची में दर्ज नहीं किया गया है।
मताधिकार के लिए जिला से लेकर तहसील तक की दौड़
ग्रामीणों ने बताया कि अपना मताधिकार हासिल करने के लिए वो लोग कई महीने से भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जिला स्तर पर मांग पत्र देने के बाद उन सभी ने तहसील दिवस में एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर मतदाता सूची में उन सभी के नाम दर्ज करवाकर उनका मताधिकार वापस करने की मांग की है।
प्रकरण की करवाएंगे जांच
ग्रामीणों ने तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र दिया है। प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रकरण की जांच करवाई जा रही है। सही पाए जाने पर सभी के नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाए जाएंगे। -संजय राय, एसडीएम जमुनहा
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ग्राम पंचायत बेलरी निवासी बच्चू यादव, सीताराम यादव, चेतराम यादव, बाउर यादव आदि ने बताया कि वर्ष 2013 तक वो लोग बेलरी में रहते थे। इस दौरान साल 2014 में राप्ती ने विकराल रूप लिया और भीषण बाढ़ में उनके घर नदी में समाहित हो गए। बाढ़ से बेघर होने के बाद उन सभी ने साल 2014-15 में पड़ोसी जिले बहराइच के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत होलिया के मजरा लक्ष्मणपुर लहसोरवा में नया आशियाना बनाया, लेकिन उनका नाम होलिया की मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुआ। वहीं, उनके मूल ग्राम पंचायत बेलरी से भी उनका नाम हट गया।
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दोबारा बेलरी में बसे, फिर भी नाम दर्ज नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि नदी के कटान के कई साल बीतने के बाद अब नदी ने उन लोगों की जमीन छोड़ दी और धारा गांव से दूर हो गई थी। इसके बाद उन सभी को उनकी पैतृक भूमि अब वापस मिल गई है। करीब छह माह पहले उन सभी ने अपनी पैतृक जमीन पर फूस के घर बनाकर दोबारा रहना शुरू कर दिया है। बावजूद इसके उनका नाम वर्तमान पते के अनुसार बेलरी गांव की मतदाता सूची में दर्ज नहीं किया गया है।
मताधिकार के लिए जिला से लेकर तहसील तक की दौड़
ग्रामीणों ने बताया कि अपना मताधिकार हासिल करने के लिए वो लोग कई महीने से भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जिला स्तर पर मांग पत्र देने के बाद उन सभी ने तहसील दिवस में एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर मतदाता सूची में उन सभी के नाम दर्ज करवाकर उनका मताधिकार वापस करने की मांग की है।
प्रकरण की करवाएंगे जांच
ग्रामीणों ने तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र दिया है। प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रकरण की जांच करवाई जा रही है। सही पाए जाने पर सभी के नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाए जाएंगे। -संजय राय, एसडीएम जमुनहा
