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प्राचीन श्री सिंहेश्वरी मंदिर : शेर किया करते थे क्षेत्र की रक्षा, आस्था अटूट

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:50 PM IST
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Ancient Shri Singheshwari Temple: Lions used to protect the area, faith unwavering
शहर में ​​स्थित सिंघेश्वरी माता मंदिर। संवाद
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सिद्धार्थनगर। जनपद में स्थित प्राचीन श्री सिंहेश्वरी मंदिर अपनी रहस्यमयी इतिहास और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। नवरात्रि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं और अपनी आस्था के अनुसार पूजन-पाठ करते हैं। मंदिर व पूरे परिसर की साफ-सफाई की जा चुकी है।
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मंदिर के वर्तमान संचालक आचार्य दिव्यांशु बताते हैं कि अब तक यहां चार महंत रह चुके हैं और सभी की आयु 100 वर्ष से अधिक रही है, जो इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा को दर्शाता है। जमुआर नदी के दक्षिण में स्थित यह मंदिर पहले घने जंगलों से घिरा हुआ था। आचार्य के अनुसार, उनके गुरु मंगलदास ने बताया था कि यह स्थान अत्रेय ऋषि की तपोस्थली रहा है।
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मान्यता है कि उस समय इस क्षेत्र की रक्षा शेर किया करते थे, जिसके कारण इसका नाम ‘सिंहेश्वरी मंदिर’ पड़ा। मंदिर की प्राचीन ईंटें भी इसकी ऐतिहासिकता की गवाही देती हैं। लगभग पांच वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग की एक टीम यहां से ईंटों के नमूने लेकर गई थी, ताकि इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का अध्ययन किया जा सके। आज भी यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दूर-दूर से लोग यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। भले ही इसका इतिहास पूरी तरह स्पष्ट न हो, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।
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