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Siddharthnagar News: कुत्ते ने 16 लोगों को नोचा, दो बच्चों की हालत गंभीर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:10 AM IST
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- इटवा कस्बे और आसपास गांव के लोगों को बनाया शिकार
- गंभीर हाल में दो इटवा सीएचसी से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज भेजे गए
इटवा। स्थानीय इटवा कस्बा व इसके आसपास के गांवों में एक कुत्ते ने एक-एक करके करीब 16 लोगों को नोच लिया। कुत्ते के हमलावर होने से लोगों में दहशत फैल गई। हमले के शिकार लोगों को इटवा सीएचसी ले जाया गया, जहां उपचार के बाद राधा (6) निवासी इटवा और मिट्ठी (6) की हालत गंभीर देखते हुए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। कुत्ते की हरकत और लगातार दौड़ता देखकर लोग पागल होने की आशंका जाहिर कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को एक कुत्ता हमलावर हो गया। एक-एक करके इटवा, अमौना, पिपरा मुर्गिहवा आदि गांवों के करीब 16 लोगों को काटकर घायल कर दिया। कुत्ते का हमलावर रुख को देखते हुए लोग भागने लगे लेकिन जो सामने आया वह उसका शिकार बन गया। बताया जा रहा है इस बात की जानकारी तक हुई जब एक-एक के लोग अस्पताल पहुंचे और सभी आसपास के गांव के ही थे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार करके छह लोगों को उनके घर वापस भेज दिया। वहीं, राधा (6) निवासी इटवा और मिट्ठी (6) निवासी अमौना की गंभीर स्थिति को देखते हुए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी ने बताया कि कुत्ता घूम-घूमकर काट रहा है। लोगों को चाहिए कि छोटे बच्चों को घर के बाहर अकेले में न छोड़ें। कुत्ते के काटने पर रैबीज का इंजेक्शन अवश्य लगवाएं।
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गर्मी और भूख से आक्रामक हो रहे कुत्ते, 2025 में 58 हजार बने थे शिकार
सिद्धार्थनगर। गर्मी, भूख और सड़क हादसों में लगातार हो रही बच्चों की मौतों से कुत्ते आक्रामक हो गए हैं। कुत्तों की बढ़ती आबादी और हमले से चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कब, कहां और कैसे, इनके हमले का शिकार बन जाएं इसकी कोई गारंटी नहीं है। इनका शिकार हो रहे बुजुर्ग, मासूमों की चीख जिम्मेदारों के कानों तक नहीं पहुंच रही हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो एक साल में 77 हजार लोग कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के शिकार हुए हैं। इनमें अकेले 58 हजार मामले कुत्तों के काटने के हैं। मगर सबकुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हलचल तो हुई है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आंकड़े बताते हैं कि हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। 2022 में जहां कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के 15 हजार मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 77 हजार पहुंच गई। यह आकड़ें उन लोगों के हैं जो अस्पताल तक पहुंचे और उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया गया। वहीं, बड़ी आबादी ऐसी भी है, जिन्होंने अपने साधन का इस्तेमाल किया या अस्पताल ही नहीं पहुंचे।
जिले में पकड़े गए थे 700 घुमंतू कुत्ते : सिर्फ कुत्ते और बिल्ली ही नहीं बंदर और अन्य आवारा जानवरों के हमले भी तेजी से बढ़े हैं। 2024 में कुत्तों के हमलों में पांच लोगों की जान चली गई। कोर्ट के आदेश पर पूरे जनपद की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अभियान चला। इसमें करीब 700 कुत्ते पकड़े गए, लेकिन उन्हें आसपास के जंगलों में छोड़ दिया गया, जहां से वापसी की चिंता अब हकीकत बनती दिख रही है।
केस 1 -
18 जनवरी 2026: लखनापार गांव में 6 साल के बच्चे की सोते समय कुत्ते जैसी आवाज निकालने और मौत होने का मामला सामने आया। दो महीने पहले कुत्ते के काटने के बावजूद परिजन एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवा सके थे।
केस - 2
11 मई 2024: पुरानी नौगढ़ पुलिस चौकी क्षेत्र के नौगढ़ डीह गांव में बकरियां चरा रहे 6 साल के मासूम मोहम्मद मोजम्मिल पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। बुरी तरह नोचे जाने से उसकी मौत हो गई।
केस - 3
03 जुलाई 2024: एक खेत में पशुओं के लिए घास काटने गई महिला पर एक दर्जन से अधिक खूंखार कुत्तों ने जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई।
केस - 4
06 अगस्त 2025: नगर पंचायत भारत भारी (बढ़नी) इलाके में पागल और आवारा कुत्तों द्वारा राहगीरों को काटने की कई घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद प्रशासन ने पकड़ने के लिए अभियान का आश्वासन दिया।
- गंभीर हाल में दो इटवा सीएचसी से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज भेजे गए
इटवा। स्थानीय इटवा कस्बा व इसके आसपास के गांवों में एक कुत्ते ने एक-एक करके करीब 16 लोगों को नोच लिया। कुत्ते के हमलावर होने से लोगों में दहशत फैल गई। हमले के शिकार लोगों को इटवा सीएचसी ले जाया गया, जहां उपचार के बाद राधा (6) निवासी इटवा और मिट्ठी (6) की हालत गंभीर देखते हुए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। कुत्ते की हरकत और लगातार दौड़ता देखकर लोग पागल होने की आशंका जाहिर कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को एक कुत्ता हमलावर हो गया। एक-एक करके इटवा, अमौना, पिपरा मुर्गिहवा आदि गांवों के करीब 16 लोगों को काटकर घायल कर दिया। कुत्ते का हमलावर रुख को देखते हुए लोग भागने लगे लेकिन जो सामने आया वह उसका शिकार बन गया। बताया जा रहा है इस बात की जानकारी तक हुई जब एक-एक के लोग अस्पताल पहुंचे और सभी आसपास के गांव के ही थे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार करके छह लोगों को उनके घर वापस भेज दिया। वहीं, राधा (6) निवासी इटवा और मिट्ठी (6) निवासी अमौना की गंभीर स्थिति को देखते हुए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
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इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी ने बताया कि कुत्ता घूम-घूमकर काट रहा है। लोगों को चाहिए कि छोटे बच्चों को घर के बाहर अकेले में न छोड़ें। कुत्ते के काटने पर रैबीज का इंजेक्शन अवश्य लगवाएं।
गर्मी और भूख से आक्रामक हो रहे कुत्ते, 2025 में 58 हजार बने थे शिकार
सिद्धार्थनगर। गर्मी, भूख और सड़क हादसों में लगातार हो रही बच्चों की मौतों से कुत्ते आक्रामक हो गए हैं। कुत्तों की बढ़ती आबादी और हमले से चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कब, कहां और कैसे, इनके हमले का शिकार बन जाएं इसकी कोई गारंटी नहीं है। इनका शिकार हो रहे बुजुर्ग, मासूमों की चीख जिम्मेदारों के कानों तक नहीं पहुंच रही हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो एक साल में 77 हजार लोग कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के शिकार हुए हैं। इनमें अकेले 58 हजार मामले कुत्तों के काटने के हैं। मगर सबकुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हलचल तो हुई है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आंकड़े बताते हैं कि हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। 2022 में जहां कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के 15 हजार मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 77 हजार पहुंच गई। यह आकड़ें उन लोगों के हैं जो अस्पताल तक पहुंचे और उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया गया। वहीं, बड़ी आबादी ऐसी भी है, जिन्होंने अपने साधन का इस्तेमाल किया या अस्पताल ही नहीं पहुंचे।
जिले में पकड़े गए थे 700 घुमंतू कुत्ते : सिर्फ कुत्ते और बिल्ली ही नहीं बंदर और अन्य आवारा जानवरों के हमले भी तेजी से बढ़े हैं। 2024 में कुत्तों के हमलों में पांच लोगों की जान चली गई। कोर्ट के आदेश पर पूरे जनपद की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अभियान चला। इसमें करीब 700 कुत्ते पकड़े गए, लेकिन उन्हें आसपास के जंगलों में छोड़ दिया गया, जहां से वापसी की चिंता अब हकीकत बनती दिख रही है।
केस 1 -
18 जनवरी 2026: लखनापार गांव में 6 साल के बच्चे की सोते समय कुत्ते जैसी आवाज निकालने और मौत होने का मामला सामने आया। दो महीने पहले कुत्ते के काटने के बावजूद परिजन एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवा सके थे।
केस - 2
11 मई 2024: पुरानी नौगढ़ पुलिस चौकी क्षेत्र के नौगढ़ डीह गांव में बकरियां चरा रहे 6 साल के मासूम मोहम्मद मोजम्मिल पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। बुरी तरह नोचे जाने से उसकी मौत हो गई।
केस - 3
03 जुलाई 2024: एक खेत में पशुओं के लिए घास काटने गई महिला पर एक दर्जन से अधिक खूंखार कुत्तों ने जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई।
केस - 4
06 अगस्त 2025: नगर पंचायत भारत भारी (बढ़नी) इलाके में पागल और आवारा कुत्तों द्वारा राहगीरों को काटने की कई घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद प्रशासन ने पकड़ने के लिए अभियान का आश्वासन दिया।