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Siddharthnagar News: चैत नवरात्रि में शक्तिपीठ पल्टादेवी के दर्शन-पूजन को उमड़ेगा सैलाब
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शोहरतगढ़। चैत नवरात्रि के मद्देनजर शक्तिपीठ मां पल्टादेवी मंदिर में बुधवार को साफ-सफाई और रंग-रोगन का कार्य पूरा कर लिया गया। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मां की भव्य झांकी तैयार की गई है। बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे नौ दिवसीय नवरात्रि में यहां पूजा-अर्चना और मेले की धूम रहेगी।
किंवदंती के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों द्वारा की गई थी। जमुआर नदी के किनारे स्थित यह मंदिर प्राचीनता और आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित शमी के वृक्ष को भी विशेष महत्व प्राप्त है, जिसके बारे में मान्यता है कि पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र इसी पेड़ पर रखे थे और यहीं से उनके भाग्योदय की शुरुआत हुई थी। इसी कारण इस स्थान का नाम पल्टादेवी पड़ा और मां को भाग्य की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
वर्तमान में यह मंदिर शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है। यहां भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थित हैं। प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
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मंदिर की विशेषताएं और मेला
मंदिर परिसर में स्थित सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है। दूर-दराज से लोग यहां बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं। मान्यता है कि यहां मुंडन कराने से बच्चों को दीर्घायु और यश की प्राप्ति होती है। चैत नवरात्रि के दौरान यहां नौ दिनों तक भव्य मेला लगता है। मेले में झूले, सर्कस, जलपान, खिलौने, नारियल और चुनरी की दुकानें सजी रहती हैं, जहां श्रद्धालु पूजा के साथ-साथ मनोरंजन का भी आनंद लेते हैं।
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ऐसे पहुंचे मंदिर
- सिद्धार्थनगर मुख्यालय से बर्डपुर या शोहरतगढ़ मार्ग से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। शोहरतगढ़ से यह शक्तिपीठ करीब 9 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है, जबकि चिल्हिया रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। सभी मार्गों पर ऑटो और निजी वाहन आसानी से उपलब्ध रहते हैं।
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श्रद्धालु और प्रबंधन की प्रतिक्रिया
श्रद्धालु संतोष पासवान ने बताया कि वह परिवार के साथ नियमित रूप से मां के दरबार में दर्शन के लिए आते हैं और मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के महंत घनश्याम गिरि ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दुकानदारों को उचित दर पर गुणवत्तापूर्ण सामान बेचने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और यदि सरकार ध्यान दे तो इसका और विकास किया जा सकता है।
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किंवदंती के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों द्वारा की गई थी। जमुआर नदी के किनारे स्थित यह मंदिर प्राचीनता और आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित शमी के वृक्ष को भी विशेष महत्व प्राप्त है, जिसके बारे में मान्यता है कि पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र इसी पेड़ पर रखे थे और यहीं से उनके भाग्योदय की शुरुआत हुई थी। इसी कारण इस स्थान का नाम पल्टादेवी पड़ा और मां को भाग्य की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
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वर्तमान में यह मंदिर शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है। यहां भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थित हैं। प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
मंदिर की विशेषताएं और मेला
मंदिर परिसर में स्थित सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है। दूर-दराज से लोग यहां बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं। मान्यता है कि यहां मुंडन कराने से बच्चों को दीर्घायु और यश की प्राप्ति होती है। चैत नवरात्रि के दौरान यहां नौ दिनों तक भव्य मेला लगता है। मेले में झूले, सर्कस, जलपान, खिलौने, नारियल और चुनरी की दुकानें सजी रहती हैं, जहां श्रद्धालु पूजा के साथ-साथ मनोरंजन का भी आनंद लेते हैं।
ऐसे पहुंचे मंदिर
- सिद्धार्थनगर मुख्यालय से बर्डपुर या शोहरतगढ़ मार्ग से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। शोहरतगढ़ से यह शक्तिपीठ करीब 9 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है, जबकि चिल्हिया रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। सभी मार्गों पर ऑटो और निजी वाहन आसानी से उपलब्ध रहते हैं।
श्रद्धालु और प्रबंधन की प्रतिक्रिया
श्रद्धालु संतोष पासवान ने बताया कि वह परिवार के साथ नियमित रूप से मां के दरबार में दर्शन के लिए आते हैं और मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के महंत घनश्याम गिरि ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दुकानदारों को उचित दर पर गुणवत्तापूर्ण सामान बेचने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और यदि सरकार ध्यान दे तो इसका और विकास किया जा सकता है।