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Siddharthnagar News: पाकिस्तान से खुरपका के विषाणु के प्रसार की आशंका, सैंपलिंग करेगी टीम
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 24 Feb 2026 02:27 AM IST
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यूपी के बागपत में सामने आया मामला, पूरे प्रदेश में पशु चिकित्सा विभाग का अलर्ट
बीमार पशुओं के बारे में जानकारी मिलते ही लिया जाएगा सैंपल, भेजी जाएगी जांच के लिए रिपोर्ट
पूरे जनपद में अलर्ट मोड में रहेंगे चिकित्सालय के डॉक्टर मामला सामने आने के बाद तत्काल होगी जांच
सिद्धार्थनगर। पशुओं में फैलने वाली खुरपका और मुंहपका बीमारी का नया वायरस सामने आया है, जो खुर के बजाय नाक से पशुओं को प्रभावित कर रहा है। पाकिस्तान में फैली बीमारी से समस्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए शासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। इसके लिए पशु चिकित्सा विभाग की ब्लॉक स्तरीय टीमें तैयार की गईं हैं जो टीकाकरण के साथ ही मिलते जुलते लक्षण वाले पशुओं की सैंपलिंग करेंगे और जांच के लिए भेजेंगे। नए वायरस की पुष्टि के बाद विभागीय टीम उसकी रोकथाम के लिए काम होगा।
खुरपका और मुंहपका पशुओं के लिए जानलेवा बीमारी मानी जाती है। इसकी गिरफ्त में आने के बाद पशु की जान जाने का खतरा अधिक रहता है। ऐसा स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है। दक्षिण अफ्रीका, ईरान और इराक और पाकिस्तान में पशुओं पर कहर बनकर टूट रहा है। पाकिस्तान बाॅर्डर देश से लगा हुआ है। ऐसे में वहां से नए वायरस के प्रसार की आशंका अधिक है। मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने पूरे प्रदेश में विशेष अभियान और जांच और निगरानी के निर्देश दिया है।
शासन की ओर से मिले दिशा-निर्देश के क्रम में स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सा विभाग की ओर से ब्लॉक स्तर पर दो-दो टीमें तैयार की गईं हैं जो पहले से चल रहे टीकाकरण अभियान के साथ चलेंगी। इस अभियान में न सिर्फ टीकाकरण किया जाएगा बल्कि पशुओं की मॉनिटरिंग भी की जाएगी। हर क्षेत्र में डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्र के पशु पालकों के संपर्क में रहेंगे और अगर मिलते जुलते लक्षण वाले पशु पाए जाते हैं तो उनकी सैंपल जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। इसके साथ ही दवा और उपचार किया जाएगा। साथ ही संपर्क में आने वाले पशुओं की मॉनिटरिंग की जाएगी।
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एक-दूसरे में होता है प्रसार
पशु विशेषज्ञों के अनुसार खुरपका, मुंहपका संक्रामक रोग है, जो एक पशु से दूसरे पशुओं में फैलता है। इसके लक्षण दिखाई पड़ने में 14 दिन का वक्त लगता है। इस रोग से ग्रसित होने वाले पशु के खुर, मुंह में छाले लार टपकने के साथ ही तेज बुखार होता है। अगर दुधारू पशु को हो जाए तो 80 प्रतिशत दूध उत्पादन कम हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक जो नया वायरस अन्य देशों में सामने आया है, उसमें नाक के अंदर और मुंह के अंदर छाने के साथ तेज दर्द और तेजी से सेहत गिर रहा है, जिसमें पशुओं की मौत की संभावना अधिक हो जाती है।
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एक रिपोर्ट टीकाकरण से जुड़ी
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण योजना अंतर्गत सांतवे चरण का खुरपका, मुंहपका रोग का टीकाकरण अभियान 22 जनवरी 2026 से शुरू हुआ है। जो 10 मार्च 2026 तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत जनपद के 2,13,016 गोवंशीय और महिषवंशीय पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग के टीके लगाए जाएंगे। इसमें मुख्यालय की ओर से 2,11,846 डोज जनपद सिद्धार्थनगर को आवंटित की गई है। सभी पशुओं को 2 एमएल डीप इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन लगाने के लिए निर्देशित किया गया है। इसमें खुरपका-मुंहपका रोग एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़,बकरी और सूअर जैसे पालतू पशुओं को प्रभावित करता है।
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बोले जिम्मेदार
नए वायरस को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। खुरपका, मुंहपका को लेकर टीकाकरण किया जा रहा है। टीमें लगी हुई हैं। नए वायरस को लेकर भी ध्यान दिया जा रहा है। अगर किसी पशु में इसके लक्षण से मिलते हैं तो उसकी दवा के साथ ही सैंपलिंग की जाएगी।
- डॉ. गणेश प्रसाद, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी
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बीमार पशुओं के बारे में जानकारी मिलते ही लिया जाएगा सैंपल, भेजी जाएगी जांच के लिए रिपोर्ट
पूरे जनपद में अलर्ट मोड में रहेंगे चिकित्सालय के डॉक्टर मामला सामने आने के बाद तत्काल होगी जांच
सिद्धार्थनगर। पशुओं में फैलने वाली खुरपका और मुंहपका बीमारी का नया वायरस सामने आया है, जो खुर के बजाय नाक से पशुओं को प्रभावित कर रहा है। पाकिस्तान में फैली बीमारी से समस्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए शासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। इसके लिए पशु चिकित्सा विभाग की ब्लॉक स्तरीय टीमें तैयार की गईं हैं जो टीकाकरण के साथ ही मिलते जुलते लक्षण वाले पशुओं की सैंपलिंग करेंगे और जांच के लिए भेजेंगे। नए वायरस की पुष्टि के बाद विभागीय टीम उसकी रोकथाम के लिए काम होगा।
खुरपका और मुंहपका पशुओं के लिए जानलेवा बीमारी मानी जाती है। इसकी गिरफ्त में आने के बाद पशु की जान जाने का खतरा अधिक रहता है। ऐसा स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है। दक्षिण अफ्रीका, ईरान और इराक और पाकिस्तान में पशुओं पर कहर बनकर टूट रहा है। पाकिस्तान बाॅर्डर देश से लगा हुआ है। ऐसे में वहां से नए वायरस के प्रसार की आशंका अधिक है। मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने पूरे प्रदेश में विशेष अभियान और जांच और निगरानी के निर्देश दिया है।
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शासन की ओर से मिले दिशा-निर्देश के क्रम में स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सा विभाग की ओर से ब्लॉक स्तर पर दो-दो टीमें तैयार की गईं हैं जो पहले से चल रहे टीकाकरण अभियान के साथ चलेंगी। इस अभियान में न सिर्फ टीकाकरण किया जाएगा बल्कि पशुओं की मॉनिटरिंग भी की जाएगी। हर क्षेत्र में डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्र के पशु पालकों के संपर्क में रहेंगे और अगर मिलते जुलते लक्षण वाले पशु पाए जाते हैं तो उनकी सैंपल जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। इसके साथ ही दवा और उपचार किया जाएगा। साथ ही संपर्क में आने वाले पशुओं की मॉनिटरिंग की जाएगी।
एक-दूसरे में होता है प्रसार
पशु विशेषज्ञों के अनुसार खुरपका, मुंहपका संक्रामक रोग है, जो एक पशु से दूसरे पशुओं में फैलता है। इसके लक्षण दिखाई पड़ने में 14 दिन का वक्त लगता है। इस रोग से ग्रसित होने वाले पशु के खुर, मुंह में छाले लार टपकने के साथ ही तेज बुखार होता है। अगर दुधारू पशु को हो जाए तो 80 प्रतिशत दूध उत्पादन कम हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक जो नया वायरस अन्य देशों में सामने आया है, उसमें नाक के अंदर और मुंह के अंदर छाने के साथ तेज दर्द और तेजी से सेहत गिर रहा है, जिसमें पशुओं की मौत की संभावना अधिक हो जाती है।
एक रिपोर्ट टीकाकरण से जुड़ी
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण योजना अंतर्गत सांतवे चरण का खुरपका, मुंहपका रोग का टीकाकरण अभियान 22 जनवरी 2026 से शुरू हुआ है। जो 10 मार्च 2026 तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत जनपद के 2,13,016 गोवंशीय और महिषवंशीय पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग के टीके लगाए जाएंगे। इसमें मुख्यालय की ओर से 2,11,846 डोज जनपद सिद्धार्थनगर को आवंटित की गई है। सभी पशुओं को 2 एमएल डीप इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन लगाने के लिए निर्देशित किया गया है। इसमें खुरपका-मुंहपका रोग एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़,बकरी और सूअर जैसे पालतू पशुओं को प्रभावित करता है।
बोले जिम्मेदार
नए वायरस को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। खुरपका, मुंहपका को लेकर टीकाकरण किया जा रहा है। टीमें लगी हुई हैं। नए वायरस को लेकर भी ध्यान दिया जा रहा है। अगर किसी पशु में इसके लक्षण से मिलते हैं तो उसकी दवा के साथ ही सैंपलिंग की जाएगी।
- डॉ. गणेश प्रसाद, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी
