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Siddharthnagar News: हर थाने में दर्ज होंगे साइबर ठगी की प्राथमिकी, स्थानीय स्तर पर होगी विवेचना
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सिद्धार्थनगर। अब साइबर अपराध के पीड़ित अपने नजदीकी थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए मुख्यालय के साइबर थाने पर दौड़भाग नहीं करनी पड़ेगी। विवेचना भी स्थानीय स्तर पर होगी।
साइबर थाने पर बढ़ते हुए मुकदमों के बोझ और शिकायतकर्ताओं की भागदौड़ कम करने के लिए हर थाने पर सेल बनाया गया है। इसके अलावा साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन की ओर से नए प्रकार के अपराध और उसकी जांच और विवेचना के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।
डिजिटल की ओर बढ़ते कदम के साथ ही साइबर अपराध पांव पसार रहा है। अपराध के शिकार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिले के एकलौते साइबर थाना पर प्राथमिकी और विवेचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे साइबर अपराध के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही विवेचना की जिम्मेदारी साइबर थाने को थी। साइबर थाने पर लगातार मामले बढ़ने से जांच और कार्रवाई में दिक्कत होती है। जनपद में 50 से अधिक मामले में ठगी सहित अन्य प्रकार के साइबर अपराध से जुड़े पहुंच रहे हैं। ऐसे में अब साइबर ठगी से जुड़ी प्राथमिकी सीधे संबंधित थानों में ही दर्ज किए जाएंगे और वहीं से उनकी विवेचना भी शुरू होगी।
इसके लिए जिले के अलग-अलग थानों में दरोगा और सिपाही की टीम तैयार की गई है। जो प्रशिक्षित किए गए हैं। इसके अलावा सभी इंस्पेक्टर थानाध्यक्ष और सभी उपनिरीक्षक को प्रशिक्षित किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है कि थाने में पहुंचने के बाद पीड़ित को यह कहते हुए न टरका सकें कि प्राथमिकी के लिए साइबर थाने जाना होगा। हालांकि अगर मामला जटिल रहेगा तो ही साइबर थाने जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर जिले के साइबर थाने से मदद ली जाएगी। नई व्यवस्था से पीड़ितों को तत्काल राहत मिलने के साथ ही मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध आज एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हर दिन नए-नए तरीके से ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। कभी बैंकिंग फ्रॉड, कभी ओटीपी ठगी तो कभी सोशल मीडिया के जरिये धोखाधड़ी। इन बढ़ते मामलों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि हर थाना स्तर पर ही प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जाए। हालांकि, बड़े और जटिल मामलों को ही आगे साइबर थाने को ट्रांसफर किया जाएगा।
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प्रशिक्षित किए गए इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर
इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जनपद के सभी थानाध्यक्षों और सब-इंस्पेक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। दिल्ली से आए साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने कार्यशाला के दौरान पुलिस कर्मियों को साइबर अपराध के नए ट्रेंड, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और तकनीकी जांच के तरीकों की जानकारी दी। इसके साथ ही हर थाने में साइबर मामलों के लिए अलग से बेंच (डेस्क) भी बनाई गई है, जिससे पीड़ितों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा सके। पुलिस का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ही कार्रवाई शुरू होने से अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सकेगा और पीड़ितों को न्याय मिलने में कम समय लगेगा। साथ ही आम लोगों को भी साइबर ठगी के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई है।
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ऐसे बढ़ रहे हैं साइबर ठगी के मामले
बैंक खाते से पैसे उड़ाने के लिए फर्जी कॉल और लिंक का इस्तेमाल,ओटीपी और केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर परिचितों से पैसे मांगना, ऑनलाइन शॉपिंग और फर्जी वेबसाइट के जरिये धोखाधड़ी, नौकरी और लोन दिलाने के नाम पर ठगी। इसके अलावा कई लोगों को फोटो एडिट करके तो किसी को वीडियो कॉल से धमकी, किसी से डिजिटल अरेस्ट जैसे कई प्रकार के अपराध के मामले में सामने आ रहे हैं। इसमें जाने अनजाने में लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं। जानकारों के मुताबिक प्रतिमाह साइबर अपराध से जुड़े मामले जिले के थानों पर आते हैं।
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वर्जन
साइबर अपराध को लेकर नियमित जागरुकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। स्कूल कॉलेज में बच्चों को जागरुक किया जा रहा है। जिले के सभी थानाध्यक्ष, प्रभारी निरीक्षक और सभी उपनिरीक्षक को साइबर के बारे में प्रशिक्षित किया गया था। थानों पर अलग सेल बनाया गया है। जहां पर पीड़ित की प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही विवेचना भी की जा रही है। साथ ही जांच और रिकवरी भी हो रही है।
- प्रशांत कुमार प्रसाद, एएसपी
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साइबर थाने पर बढ़ते हुए मुकदमों के बोझ और शिकायतकर्ताओं की भागदौड़ कम करने के लिए हर थाने पर सेल बनाया गया है। इसके अलावा साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन की ओर से नए प्रकार के अपराध और उसकी जांच और विवेचना के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।
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डिजिटल की ओर बढ़ते कदम के साथ ही साइबर अपराध पांव पसार रहा है। अपराध के शिकार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिले के एकलौते साइबर थाना पर प्राथमिकी और विवेचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे साइबर अपराध के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही विवेचना की जिम्मेदारी साइबर थाने को थी। साइबर थाने पर लगातार मामले बढ़ने से जांच और कार्रवाई में दिक्कत होती है। जनपद में 50 से अधिक मामले में ठगी सहित अन्य प्रकार के साइबर अपराध से जुड़े पहुंच रहे हैं। ऐसे में अब साइबर ठगी से जुड़ी प्राथमिकी सीधे संबंधित थानों में ही दर्ज किए जाएंगे और वहीं से उनकी विवेचना भी शुरू होगी।
इसके लिए जिले के अलग-अलग थानों में दरोगा और सिपाही की टीम तैयार की गई है। जो प्रशिक्षित किए गए हैं। इसके अलावा सभी इंस्पेक्टर थानाध्यक्ष और सभी उपनिरीक्षक को प्रशिक्षित किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है कि थाने में पहुंचने के बाद पीड़ित को यह कहते हुए न टरका सकें कि प्राथमिकी के लिए साइबर थाने जाना होगा। हालांकि अगर मामला जटिल रहेगा तो ही साइबर थाने जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर जिले के साइबर थाने से मदद ली जाएगी। नई व्यवस्था से पीड़ितों को तत्काल राहत मिलने के साथ ही मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध आज एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हर दिन नए-नए तरीके से ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। कभी बैंकिंग फ्रॉड, कभी ओटीपी ठगी तो कभी सोशल मीडिया के जरिये धोखाधड़ी। इन बढ़ते मामलों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि हर थाना स्तर पर ही प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जाए। हालांकि, बड़े और जटिल मामलों को ही आगे साइबर थाने को ट्रांसफर किया जाएगा।
प्रशिक्षित किए गए इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर
इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जनपद के सभी थानाध्यक्षों और सब-इंस्पेक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। दिल्ली से आए साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने कार्यशाला के दौरान पुलिस कर्मियों को साइबर अपराध के नए ट्रेंड, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और तकनीकी जांच के तरीकों की जानकारी दी। इसके साथ ही हर थाने में साइबर मामलों के लिए अलग से बेंच (डेस्क) भी बनाई गई है, जिससे पीड़ितों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा सके। पुलिस का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ही कार्रवाई शुरू होने से अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सकेगा और पीड़ितों को न्याय मिलने में कम समय लगेगा। साथ ही आम लोगों को भी साइबर ठगी के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई है।
ऐसे बढ़ रहे हैं साइबर ठगी के मामले
बैंक खाते से पैसे उड़ाने के लिए फर्जी कॉल और लिंक का इस्तेमाल,ओटीपी और केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर परिचितों से पैसे मांगना, ऑनलाइन शॉपिंग और फर्जी वेबसाइट के जरिये धोखाधड़ी, नौकरी और लोन दिलाने के नाम पर ठगी। इसके अलावा कई लोगों को फोटो एडिट करके तो किसी को वीडियो कॉल से धमकी, किसी से डिजिटल अरेस्ट जैसे कई प्रकार के अपराध के मामले में सामने आ रहे हैं। इसमें जाने अनजाने में लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं। जानकारों के मुताबिक प्रतिमाह साइबर अपराध से जुड़े मामले जिले के थानों पर आते हैं।
वर्जन
साइबर अपराध को लेकर नियमित जागरुकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। स्कूल कॉलेज में बच्चों को जागरुक किया जा रहा है। जिले के सभी थानाध्यक्ष, प्रभारी निरीक्षक और सभी उपनिरीक्षक को साइबर के बारे में प्रशिक्षित किया गया था। थानों पर अलग सेल बनाया गया है। जहां पर पीड़ित की प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही विवेचना भी की जा रही है। साथ ही जांच और रिकवरी भी हो रही है।
- प्रशांत कुमार प्रसाद, एएसपी