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Siddharthnagar News: दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है कर्बला
Tue, 30 Jun 2026 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 30 Jun 2026 02:02 AM IST
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भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा सादात गांव में रविवार रात बनी हाशिम के 18 ताबूत निकाले गए। इस दौरान रातभर नौहा पढ़कर मातम का सिलसिला जारी रहा, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। दिल्ली से आए मौलाना सैय्यद कमाल अब्बास रिजवी ने मजलिस को संबोधित किया। कहा कि बताया कि कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है।
मजलिस की शुरुआत कर्रार हुसैन और हमनवा द्वारा मर्सिया पाठ से हुई। इसके बाद मौलाना रिजवी ने हजरत अली के फजायल बयान करते हुए कहा कि अली ने हक के लिए कई जंगें लड़ीं और कामयाबी हासिल की। उन्होंने इस्लाम के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दीं, उनसे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए।
इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों ने भूखे-प्यासे शहादत देकर यह साबित कर दिया कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता। मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन और हजरत अब्बास का मसायब पढ़ा, जिसे सुनकर अकीदतमंद गमगीन हो गए और पीट-पीटकर रोने लगे। इस दौरान या हुसैन या अब्बास की आवाज से पंडाल गूंज उठा। मजलिस के बाद ताबूत की शबीह निकाली गई, जिसने पूरे गांव का भ्रमण किया। शबीह देखकर अकीदतमंदों की आंखों में आंसू छलक उठे। पूरी रात नौहा मातम का सिलसिला जारी रहा। इस मौके पर सरफराज हुसैन रिजवी, नायाब हैदर, फय्याज हुसैन रिजवी, गुलाम मोहम्मद, अतहर हुसैन आदि भारी संख्या में अकीदत मंद मौजूद रहे।
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मजलिस की शुरुआत कर्रार हुसैन और हमनवा द्वारा मर्सिया पाठ से हुई। इसके बाद मौलाना रिजवी ने हजरत अली के फजायल बयान करते हुए कहा कि अली ने हक के लिए कई जंगें लड़ीं और कामयाबी हासिल की। उन्होंने इस्लाम के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दीं, उनसे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए।
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इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों ने भूखे-प्यासे शहादत देकर यह साबित कर दिया कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता। मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन और हजरत अब्बास का मसायब पढ़ा, जिसे सुनकर अकीदतमंद गमगीन हो गए और पीट-पीटकर रोने लगे। इस दौरान या हुसैन या अब्बास की आवाज से पंडाल गूंज उठा। मजलिस के बाद ताबूत की शबीह निकाली गई, जिसने पूरे गांव का भ्रमण किया। शबीह देखकर अकीदतमंदों की आंखों में आंसू छलक उठे। पूरी रात नौहा मातम का सिलसिला जारी रहा। इस मौके पर सरफराज हुसैन रिजवी, नायाब हैदर, फय्याज हुसैन रिजवी, गुलाम मोहम्मद, अतहर हुसैन आदि भारी संख्या में अकीदत मंद मौजूद रहे।
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