{"_id":"697ba2e818dd7a2ac800610a","slug":"siddharthnagar-news-anganwadi-workers-raise-their-voice-regarding-their-demands-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1001-152569-2026-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:51 PM IST
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करती आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री। संवाद
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा जिला इकाई के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को अपनी मांगों के समाधान की मांग को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गुजरात न्यायालय के निर्णय के अनुसार सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। मानदेय वृद्धि समेत अन्य मांग शामिल रहीं।
प्रदेश महामंत्री प्रभावती देवी ने कहा कि देशहित में वर्ष 1975 से नौनिहालों का शिक्षण पोषण कर देश और राज्यों के लिए भावी कर्णधारों को तैयार कर ही है। इन मेहनतकश अल्प मानदेय के कारण न कोई वर्तमान है न ही भविष्य सुरक्षित है। भारत सरकार द्वारा 4,500 और सहायिकाओं को 2250 प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। कई राज्यों में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त मानदेय दिया जाता है। इन कर्मचारियों को मानदेय पांच वर्ष में एक बार संशोधित होता है। इन्हें कोई महंगाई भत्ता या वेतन वृद्धि नहीं दी जाती है।
श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ जैसे ग्रेच्युटी, पेंशन, भविष्य निधि और स्वास्थ्य सुविधा का लाभ भी उन्हें नहीं मिलता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय बहुत ही कम है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का अत्यधिक शोषण किया जाता है और उनकी स्थिति बंधुआ मजदूरों से भी खराब है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी प्रदान कर उन्हें स्थाई नौकरी और पद के अनुरूप वेतनमान दें। भयमुक्त शोषण रहित नीति बनाई जाए।
धरने की अध्यक्षता नीलम पांडेय ने किया। कार्यक्रम में कौशिकी पांडेय, अनीता पासवान, शिमला मौर्या, संगीता दूबे, प्रमिला चौधरी, चंदन मिश्रा, मकबूल आलम, मीना देवी, सुमन त्रिपाठी, चंदा पाल आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में सीएम के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
Trending Videos
प्रदेश महामंत्री प्रभावती देवी ने कहा कि देशहित में वर्ष 1975 से नौनिहालों का शिक्षण पोषण कर देश और राज्यों के लिए भावी कर्णधारों को तैयार कर ही है। इन मेहनतकश अल्प मानदेय के कारण न कोई वर्तमान है न ही भविष्य सुरक्षित है। भारत सरकार द्वारा 4,500 और सहायिकाओं को 2250 प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। कई राज्यों में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त मानदेय दिया जाता है। इन कर्मचारियों को मानदेय पांच वर्ष में एक बार संशोधित होता है। इन्हें कोई महंगाई भत्ता या वेतन वृद्धि नहीं दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ जैसे ग्रेच्युटी, पेंशन, भविष्य निधि और स्वास्थ्य सुविधा का लाभ भी उन्हें नहीं मिलता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय बहुत ही कम है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का अत्यधिक शोषण किया जाता है और उनकी स्थिति बंधुआ मजदूरों से भी खराब है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी प्रदान कर उन्हें स्थाई नौकरी और पद के अनुरूप वेतनमान दें। भयमुक्त शोषण रहित नीति बनाई जाए।
धरने की अध्यक्षता नीलम पांडेय ने किया। कार्यक्रम में कौशिकी पांडेय, अनीता पासवान, शिमला मौर्या, संगीता दूबे, प्रमिला चौधरी, चंदन मिश्रा, मकबूल आलम, मीना देवी, सुमन त्रिपाठी, चंदा पाल आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में सीएम के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
