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Siddharthnagar News: शब्बेदारी में सारी रात अकीदतमंदों ने किया नौहा-मातम
Thu, 20 Aug 2026 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:11 AM IST
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डुमरियागज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास मे आयोजित शब्बेदारी में नौहां-मातम कर
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-डुमरियागंज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास में आयोजित हुई तरही शब्बेदारी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास में अंजुमन फिदाए अबुल फजलिल अब्बास की ओर से मंगलवार की रात तरही शब्बेदारी का आयोजन किया गया। इसमें मरसिया मजलिस आयोजित हुई और अंजुमनों के मातमी दस्ते ने सारी रात नौहा-मातम किया।
शब्बेदारी की शुरुआत अब्बास अली ने कलाम पाक की तिलावत करके किया। इसके बाद मर्सियाख्वानी अंबर मेहंदी और उनके सहयोगी ने पेश की। मजलिस को जाकिर जमाल हैदर ने संबोधित करते हुए कहा कि हजरत अब्बास कर्बला के इकलौते शहीद हैं, जिनकी दो विशेषता है। वे गाजी भी हैं और शहीद भी हैं। जाकिर ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के बहादुर, वफादार जांबाज भाई हजरत अब्बास ने कर्बला के मैदान में सब्र-सहनशीलता का परिचय दिया। हजरत अब्बास की रहती दुनिया तक वफा और बहादुरी की मिसाल दी जाती रहेगी। जाकिर जमाल ने मजलिस के आखिर में हजरत अब्बास की शहादत का दर्दनाक मसायब बयान किए। इसे सुनकर सभी अकीदतमंद रो पड़े। मजलिस के बाद अंजुमनों के नौहा-मातम का सिलसिला शुरू हुआ। इसमें अंजुमन फेदा-ए-अबुल फजलिल अब्बास हल्लौर, अंजुमन अब्बासिया जनपद बांदा, अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम हल्लौर के मातमी दस्ते ने पूरे जोशो-खरोश से नौहा-मातम किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। संचालन अफसर हल्लौरी ने किया।
इस दौरान नायाब हल्लौरी, तनजीम पंजतन, वसीम पंजतन, फैजी, गुड्डू, वफा, कामयाब आदि मौजूद रहे।
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सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास में अंजुमन फिदाए अबुल फजलिल अब्बास की ओर से मंगलवार की रात तरही शब्बेदारी का आयोजन किया गया। इसमें मरसिया मजलिस आयोजित हुई और अंजुमनों के मातमी दस्ते ने सारी रात नौहा-मातम किया।
शब्बेदारी की शुरुआत अब्बास अली ने कलाम पाक की तिलावत करके किया। इसके बाद मर्सियाख्वानी अंबर मेहंदी और उनके सहयोगी ने पेश की। मजलिस को जाकिर जमाल हैदर ने संबोधित करते हुए कहा कि हजरत अब्बास कर्बला के इकलौते शहीद हैं, जिनकी दो विशेषता है। वे गाजी भी हैं और शहीद भी हैं। जाकिर ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के बहादुर, वफादार जांबाज भाई हजरत अब्बास ने कर्बला के मैदान में सब्र-सहनशीलता का परिचय दिया। हजरत अब्बास की रहती दुनिया तक वफा और बहादुरी की मिसाल दी जाती रहेगी। जाकिर जमाल ने मजलिस के आखिर में हजरत अब्बास की शहादत का दर्दनाक मसायब बयान किए। इसे सुनकर सभी अकीदतमंद रो पड़े। मजलिस के बाद अंजुमनों के नौहा-मातम का सिलसिला शुरू हुआ। इसमें अंजुमन फेदा-ए-अबुल फजलिल अब्बास हल्लौर, अंजुमन अब्बासिया जनपद बांदा, अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम हल्लौर के मातमी दस्ते ने पूरे जोशो-खरोश से नौहा-मातम किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। संचालन अफसर हल्लौरी ने किया।
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इस दौरान नायाब हल्लौरी, तनजीम पंजतन, वसीम पंजतन, फैजी, गुड्डू, वफा, कामयाब आदि मौजूद रहे।