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Sitapur News: ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ भड़का आक्रोश
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 21 May 2026 12:15 AM IST
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सीतापुर। ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म की अनियंत्रित कार्यप्रणाली और बड़ी कंपनियों की नुकसान पहुंचा रही मूल्य निर्धारण नीति के खिलाफ बुधवार को दवा व्यापारियों में आक्रोश दिखाई दिया। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के बैनर तले दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी। बुधवार को जिले में इसका मिला जुला असर देखने को मिला।
सीतापुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आवाहन पर जहां शहर की ज्यादातर मेडिकल फॉर्मेसी खुली रहीं। वहीं संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुटता दिखाते हुए सुबह ग्रीकगंज और लोहारबाग जैसे प्रमुख बाजारों में दोपहर एक बजे तक अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं। जिससे मरीजों और तीमारदारों को दोपहर तक काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सीतापुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दुकानें बंद रखकर डीएम को ज्ञापन सौंपा।
पदाधिकारियों ने कहा कि बिना किसी भौतिक सत्यापन और एआई-आधारित फर्जी प्रिसक्रिप्शन के सहारे धड़ल्ले से ऑनलाइन दवाएं बेची जा रही हैं। जिलाध्यक्ष गोपाल टंडन ने कहा कि यह लड़ाई केवल व्यापारिक हितों की नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो देश का दवा व्यापारी अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
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सीतापुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आवाहन पर जहां शहर की ज्यादातर मेडिकल फॉर्मेसी खुली रहीं। वहीं संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुटता दिखाते हुए सुबह ग्रीकगंज और लोहारबाग जैसे प्रमुख बाजारों में दोपहर एक बजे तक अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं। जिससे मरीजों और तीमारदारों को दोपहर तक काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सीतापुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दुकानें बंद रखकर डीएम को ज्ञापन सौंपा।
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पदाधिकारियों ने कहा कि बिना किसी भौतिक सत्यापन और एआई-आधारित फर्जी प्रिसक्रिप्शन के सहारे धड़ल्ले से ऑनलाइन दवाएं बेची जा रही हैं। जिलाध्यक्ष गोपाल टंडन ने कहा कि यह लड़ाई केवल व्यापारिक हितों की नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो देश का दवा व्यापारी अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।