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Sitapur News: महर्षि दधीचि की नगरी में पग-पग पर बिखरे आस्था के रंगों से तपोभूमि राममय
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:58 PM IST
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परिक्रमा में हाथी पर सवार होकर पहुंचे संत।
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मिश्रिख (सीतापुर)। उपमाएं गौण हैं... मन विह्वल और आनंद अकथनीय। पीतवस्त्र में आवागमन करते श्रद्धालु, कलरव करते पक्षी, पंच कोसी परिक्रमा मार्ग पर भक्ति के अनगिनत रंग देखने को मिल रहे हैं। साधु-संतों व गृहस्थों के जत्थे राम नाम का सुमिरन, पुण्य कमाने को आतुर, महर्षि दधीचि की नगरी मिश्रिख रामधुन में झूम रही है। पग-पग पर आस्था के बिखरे रंगों से तपोभूमि राममय हो गई। शाही यात्रा, दधीचि कुुंड में स्नान, मोक्ष की कामना। तंबुओं की बसी अस्थाई धर्म नगरी में भजन-कीर्तन और हिलोरें मारता भक्ति भाव।
मिश्रिख में पंच कोसी परिक्रमा चल रही है। इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। राम धुन पर झूमते हुए श्रद्धालु पंच कोसी परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। रविवार को 84 कोसी परिक्रमा समिति की ओर से शाही यात्रा निकाली गई। सबसे आगे श्री वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनि के निशान दिगंबर, निर्मोही व निर्वाणी चल रहे थे। उसके पीछे हाथी, घोड़े और रथों पर सवार होकर साधु-संत व महंत थे।
84 कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष, महंत नारायण दास का रथ सबसे आगे चल रहा था। शाही यात्रा नगर पालिका, गांधी द्वार मुख्य बाजार से पीपल चौराहा से होते हुए दधीचि कुंड पहुंची। संतों ने स्नान कर तीर्थ पूजन व महर्षि दधीचि का दर्शन किया। संतों के समूह का दधीचि आश्रम महंत देवानंद गिरी ने अभिनंदन किया। शाही यात्रा पुनः पहला आश्रम पर पहुंची, जहां साधु-संतों को फलाहार कराकर व दक्षिणा देकर विदा किया गया।
यह कार्यक्रम महंत सरोज दीदी एवं आचार्य रामशब्द मिश्र के निर्देशन में संपन्न हुआ। यात्रा में परिक्रमा समिति के सचिव बनगढ़ महंत संतोष दास खाकी, महामंडलेश्वर मदन मोहन दास, महंत माधव दास, महंत राज नारायण पांडेय, महंत चंद्र प्रकाश दास, महंत प्रह्लाद दास, महंत प्रीतम दास, महंत अंजनी दास, महंत अनुभव दास, महंत सुरेश दास, महंत रामसेवक दास रामायणी, महंत राघव दास, महंत रोशन दास, महामंडलेश्वर परशुराम दास, महंत नागेन्द्र दास खेतुई, महंत विवेक शास्त्री, डाॅ. बाल शास्त्री शामिल थे। सुरक्षा की दृष्टि से एसडीएम अभिनव यादव, नायब तहसीलदार अजय कुमार, सीओ विशाल गुप्ता, मेला प्रभारी संतोष उपाध्याय, इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह मुस्तैद रहे।
परिक्रमार्थियों की सेवा कर रहे लोग
पंच कोसी परिक्रमा करने आए संत, सन्यासियों और परिक्रमार्थियों का धर्म निष्ठा से लोग सेवा-सत्कार करने के लिए बढ़ चढ़कर आगे आ रहे हैं। भंडारा करने के लिए नगर में जगह-जगह पंडाल सजे हुए हैं। कथा, भागवत, रासलीला का क्रम भी जारी है।
इन प्राचीन स्थलों के होते दर्शन
मिश्रिख में महर्षि दधीचि कुंड, दधीचि मंदिर, अष्टभुजा मंदिर, सीता कुंड, नर्मदेश्वर मंदिर, शेषनाथ मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, काली मंदिर आदि प्रमुख दर्शनीय स्थान हैं। यहां श्रद्धालु दर्शन पूजन करते हैं। मान्यता है कि इन धार्मिक स्थलों पर आने मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं का आगमन होता है। होली परिक्रमा मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
पंच कोसी परिक्रमा इसलिए है विशेष
महर्षि दधीचि कुंड में स्नान व पूजन के बाद श्रद्धालु पंच कोसी परिक्रमा शुरू करते हैं। इस परिक्रमा की विशेषता यह है कि इसे मिश्रिख में किसी भी स्थान से शुरू कर सकते हैं। परिक्रमा कर उसी स्थान पर पहुंचकर इसकी पूर्णाहुति मानी जाती है। संत-महंतों का कहना है कि जितना पुण्य 84 कोसी परिक्रमा में मिलता है। उतना ही पुण्य पंच कोसी का है।
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मिश्रिख में पंच कोसी परिक्रमा चल रही है। इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। राम धुन पर झूमते हुए श्रद्धालु पंच कोसी परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। रविवार को 84 कोसी परिक्रमा समिति की ओर से शाही यात्रा निकाली गई। सबसे आगे श्री वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनि के निशान दिगंबर, निर्मोही व निर्वाणी चल रहे थे। उसके पीछे हाथी, घोड़े और रथों पर सवार होकर साधु-संत व महंत थे।
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84 कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष, महंत नारायण दास का रथ सबसे आगे चल रहा था। शाही यात्रा नगर पालिका, गांधी द्वार मुख्य बाजार से पीपल चौराहा से होते हुए दधीचि कुंड पहुंची। संतों ने स्नान कर तीर्थ पूजन व महर्षि दधीचि का दर्शन किया। संतों के समूह का दधीचि आश्रम महंत देवानंद गिरी ने अभिनंदन किया। शाही यात्रा पुनः पहला आश्रम पर पहुंची, जहां साधु-संतों को फलाहार कराकर व दक्षिणा देकर विदा किया गया।
यह कार्यक्रम महंत सरोज दीदी एवं आचार्य रामशब्द मिश्र के निर्देशन में संपन्न हुआ। यात्रा में परिक्रमा समिति के सचिव बनगढ़ महंत संतोष दास खाकी, महामंडलेश्वर मदन मोहन दास, महंत माधव दास, महंत राज नारायण पांडेय, महंत चंद्र प्रकाश दास, महंत प्रह्लाद दास, महंत प्रीतम दास, महंत अंजनी दास, महंत अनुभव दास, महंत सुरेश दास, महंत रामसेवक दास रामायणी, महंत राघव दास, महंत रोशन दास, महामंडलेश्वर परशुराम दास, महंत नागेन्द्र दास खेतुई, महंत विवेक शास्त्री, डाॅ. बाल शास्त्री शामिल थे। सुरक्षा की दृष्टि से एसडीएम अभिनव यादव, नायब तहसीलदार अजय कुमार, सीओ विशाल गुप्ता, मेला प्रभारी संतोष उपाध्याय, इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह मुस्तैद रहे।
परिक्रमार्थियों की सेवा कर रहे लोग
पंच कोसी परिक्रमा करने आए संत, सन्यासियों और परिक्रमार्थियों का धर्म निष्ठा से लोग सेवा-सत्कार करने के लिए बढ़ चढ़कर आगे आ रहे हैं। भंडारा करने के लिए नगर में जगह-जगह पंडाल सजे हुए हैं। कथा, भागवत, रासलीला का क्रम भी जारी है।
इन प्राचीन स्थलों के होते दर्शन
मिश्रिख में महर्षि दधीचि कुंड, दधीचि मंदिर, अष्टभुजा मंदिर, सीता कुंड, नर्मदेश्वर मंदिर, शेषनाथ मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, काली मंदिर आदि प्रमुख दर्शनीय स्थान हैं। यहां श्रद्धालु दर्शन पूजन करते हैं। मान्यता है कि इन धार्मिक स्थलों पर आने मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं का आगमन होता है। होली परिक्रमा मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
पंच कोसी परिक्रमा इसलिए है विशेष
महर्षि दधीचि कुंड में स्नान व पूजन के बाद श्रद्धालु पंच कोसी परिक्रमा शुरू करते हैं। इस परिक्रमा की विशेषता यह है कि इसे मिश्रिख में किसी भी स्थान से शुरू कर सकते हैं। परिक्रमा कर उसी स्थान पर पहुंचकर इसकी पूर्णाहुति मानी जाती है। संत-महंतों का कहना है कि जितना पुण्य 84 कोसी परिक्रमा में मिलता है। उतना ही पुण्य पंच कोसी का है।
