Sonbhadra News: मासूम बहनों का लैंगिक उत्पीड़न करने के दोषी को आखिरी सांस तक कैद की सजा, पढ़ें- पूरा मामला
Sonbhadra News: जिले में मासूम बहनों का लैंगिक उत्पीड़न करने के दोषी को जीवन की आखिरी सांस तक कैद की सजा सुनाई गई। सोनभद्र के अनपरा थाना क्षेत्र के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने महज चार माह चार दिन में सुनवाई पूरी की।
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सोनभद्र में मासूम बहनों का लैंगिक उत्पीड़न करने वाले इलेक्ट्रीशियन को जीवन की आखिरी सांस तक कैद की सजा सुनाई गई है। अनपरा थानाक्षेत्र से जुड़े इस मामले में एडीजे/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट ओमकार शुक्ल की अदालत ने महज चार माह चार दिन में सुनवाई पूरी की। दोषी पर 73 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। इस मामले में सात और नौ साल की मासूम बच्चियों का एक साल से लैंगिक उत्पीड़न किया जा रहा था। उन्हें इसकी जानकारी तब हुई जब स्कूल में शिक्षिका ने उन्हें गुड टच-बैड टच की जानकारी दी।
मामला गत 23 फरवरी को सामने आया था। पुलिस जांच में पता चला था कि अनपरा के अशोक नगर में रह रहा झारखंड के मेराल थाना क्षेत्र के बिकताम निवासी फैयाज उर्फ फैज पीड़िता के घर में बिजली के उपकरण बनाने के नाम पर आता-जाता था। इसका फायदा उठाकर वह एक साल से सात वर्षीय और नौ वर्षीय बहनों का शोषण कर रहा था। आरोप था कि वह उन्हें बहला-फुसलाकर छत पर ले जाता था। वहां उनके साथ अश्लील हरकत करता था। पुलिस ने मां की तहरीर पर मामला दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी।
प्रकरण की गंभीरता और जिले में पहली बार इस तरह का मामला देखते हुए न्यायालय ने भी सुनवाई में तेजी बरती। हर सप्ताह तिथि तय की जाती रही। आरोप तय करने की तिथि से महज चार माह चार दिन के भीतर आठ गवाहों को परीक्षित कराने के साथ ही अन्य प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं। मंगलवार को दोषी पाए जाने के बाद सजा के मसले पर सुनवाई की गई। बचाव पक्ष ने कम से कम सजा दिए जाने की याचना की।
न्यायालय ने पाया कि दोषी पीड़िताओं के घर कई साल से आता-जाता था। विश्वास का फायदा उठाते हुए उसने मासूम बच्चियों का यौन उत्पीड़न तो किया ही, उनके घर की औरतों पर झूठे लांछन भी लगाए। न्यायालय ने कहा कि दोषी के इस कृत्य से न केवल नाबालिग बहनों की निजता भंग हुई है बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों की भी मर्यादा धूमिल हुई है। अपराध की प्रकृति और अपराध के तरीके को देखते हुए दोषी को किसी तरह की राहत देना सही नहीं रहेगा।
दो तरह का होता है आजीवन कारावास
विशेष लोक अभियोजक दिनेश अग्रहरि ने बताया कि आजीवन कारावास दो तरह का होता है। एक उम्रकैद ऐसी होती है जिसमें बाद में दोषी के अच्छे आचरण, उसके बुजुर्ग होने के बाद उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए सरकार के स्तर पर सजा कम करने का निर्णय लिया जा सकता है लेकिन शेष प्राकृत जीवन काल तक के लिए सुनाए जाने वाले आजीवन कारावास में दोषी के आखिरी सांस तक सजा बरकरार रहती है। बताया कि मासूम बेटियों के साथ जिस तरह की हरकत की गई थी। वह जिले में पहला प्रकरण था। न्यायालय ने भी इस मामले में काफी संजीदगी बरती। गवाहों ने भी अभियोजन कथानक का पूरा समर्थन किया, जिसके चलते दोषी को बड़ी सजा दिलवाने में कामयाबी मिली।