सोनभद्र। शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले जिले के कई परिषदीय विद्यालय आज भी जर्जर भवनों के साए में संचालित हो रहे हैं। इन भवनों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं, छतों का प्लास्टर झड़ रहा है और कई जगहों पर भवन पूरी तरह खस्ताहाल हो चुके हैं। कई विद्यालयों में जर्जर स्थिति में पड़े भवनों को अब भी नहीं ढहाया जा सका है। कई जगह जर्जर भवनों के ठीक बगल में कक्षाएं संचालित हो रही हैं और बच्चे रोजाना इनके आसपास से होकर गुजरते हैं। समय रहते इन्हें नहीं ढहाया गया तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। बरसात के मौसम में इन जर्जर विद्यालय भवनों के कभी भी भरभराकर गिरने की आशंका बनी रहती है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से रॉबर्ट्सगंज शिक्षा क्षेत्र में 63 विद्यालय भवनों को जर्जर घोषित किया है। भवनों पर चेतावनी के तौर पर निष्प्रयोज्य या फिर जर्जर भवन लिखकर छोड़कर दिया गया है। मगर वर्षों बाद भी जर्जर भवन नहीं ढहाया जा सका है। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के रौप गांव में कंपोजिट विद्यालय संचालित हो रहा है। इसमें प्राइमरी विद्यालय का भवन जर्जर हो गया है। विद्यालय के बच्चे बगल के कमरे में पढ़ते हैं। एक कक्ष में कक्षा दो और कक्षा तीन के बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं। सोमवार को यहां 35 की संख्या में छात्र-छात्राएं एक कक्षा में बैठकर पढ़ाई करते देखे गए। वहीं कक्षा चार और पांच के छात्र पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन में पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाओं की मानें तो प्राइमरी विद्यालय करीब 10 साल से जर्जर है। कोरोना काल के बाद से इस विद्यालय भवन में पठन पाठन बंद है। करीब पांच साल बाद भी जर्जर भवन को नहीं ढहाया जा सका है। निष्प्रयोज्य लिखे इस जर्जर भवन के आसपास बच्चों को देखा जा सकता है। ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता है। सदर ब्लॉक के लसड़ा ग्राम पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो गया है। जगह-जगह छत का प्लास्टर गिर रहा है और दीवारों में दरारें पड़ गई है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से विद्यालय भवन को जर्जर घोषित किया गया है। हालांकि यहां अभी पढ़ाई चल रही है। शिक्षकों की मानें तो जो कक्ष ज्यादा जर्जर स्थिति में है, वहां बच्चे या शिक्षक नहीं जाते हैं। जर्जर भवन को ढहाए जाने के लिए कागजी कार्रवाई चल रही है। ग्राम पंचायत करारी स्थित कंपोजिट विद्यालय में बना अतिरिक्त कक्षा कक्ष जर्जर स्थिति में हो गया है। भवन पर तो लिखा है कि जर्जर भवन है, दूर रहें, मगर वहीं छोटे-छोटे बच्चों का आना जाना लगता रहता है। इसी विद्यालय में लखनपुरवा प्राइमरी विद्यालय के भी बच्चे पढ़ते हैं। दो विद्यालय के बच्चे एक परिसर में पढ़ाई कर रहे हैं। बावजूद इसके जर्जर भवन को गिराया नहीं जा सका है। तेज बारिश होने की स्थिति में जर्जर भवन भरभरा कर गिर सकते हैं। समय रहते जर्जर भवनों को नहीं ढहाया गया तो ये हादसे का कारण बन सकते हैं। सदर ब्लॉक के रौप ग्राम पंचायत स्थित कंपोजिट विद्यालय परिसर में प्राइमरी विद्यालय के पास में नया अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण कराया जा रहा है। यह खनिज निधि से कक्षा का निर्माण हो रहा है। छत तक का काम पूरा हो गया है। प्लास्टर आदि मरम्मत कार्य शेष रह गया है। काम पूरा होने पर नए भवन में पढ़ाई शुरू कराई जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से रॉबर्ट्सगंज शिक्षा क्षेत्र में कुल 35 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इनमें से 13 भवनों का पुनर्निर्माण हो चुका है। शेष 22 जर्जर परिषदीय विद्यालयों के भवनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया चल रही है। बताया जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालय पिपरी, प्राथमिक विद्यालय डेहरी कला, गोइठहरी, उरमौरा, नरैना, सेमर, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बुढ़हर कला, लसड़ा, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बड़गांव, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय मोकरम, कंपोजिट विद्यालय हिनौता, प्राथमिक विद्यालय छपका, प्राथमिक विद्यालय कुसरट प्रथम के अतिरिक्त कक्ष तथा कंपोजिट विद्यालय कुसी के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया चल रही है।