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Sonebhadra News: विवेचना में खामी से अदालत में साबित नहीं हो सकी तस्करी
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सोनभद्र। तीन वर्ष पूर्व दो किलो से अधिक हेरोइन बरामद करते हुए जिस बड़े गिरोह के खुलासे का दावा किया गया था, उस गिरोह के सरगना सहित नौ आरोपियों को न्यायालय ने बरी कर दिया है। छापेमारी की कार्रवाई पूरी होने के महज 15 मिनट बाद एफआईआर, फर्द-बयान में अलग-अलग दावे ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। बगैर बरामद हेरोइन देखे की गई शुरुआती विवेचना और मौके पर मौजूद आरोपियों, गवाहों, सीओ सिटी का सीडीआर न निकाले जाने के मामले ने पुलिस के पूरे दावे को संदिग्ध बना दिया। महज 1.5 ग्राम हेरोइन की बरामदगी और उसमें से पांच ग्राम नमूने निकालकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाने की चूक भी आरोपियों को राहत मिलने का आधार बनी। सुनवाई कर रही विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने यह माना कि अभियोजन अपनी बात साबित करने में विफल रहा है।
अभियोजन के मुताबिक 10 फरवरी 2023 की सुबह छह बजे तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राॅबटर्सगंज बालमुकुंद मिश्रा की अगुवाई वाली टीम ने जैत गांव के पास से सरगना बताए जा रहे राजस्वकर्मी सहित नौ को 2.180 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। एक आरोपी फरार हो गया था। विवेचना के बाद गोपाल उर्फ विमल राम, राज भारती, सुधीर कुमार राम उर्फ विधायक उर्फ सुनील, हरिश्चंद्र उर्फ मन्नर कन्नौजिया, बाबूनंदन, अवधेश राम, शैलेश कुमार राम उर्फ गोपी, सोनू उर्फ बंटी, सोनू और चांदनी के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य का दावा करते हुए चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की गई। एक अन्य आरोपी बबलू खान के खिलाफ विवेचना जारी रखी गई। जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल थी, उन पर न्यायालय ने सुनवाई शुरू की। पता चला कि एक आरोपी के पास से महज 1.15 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी लेकिन उसके पास से 115 ग्राम बरामदगी का दावा करने के साथ ही उसमें से पांच ग्राम नमूना निकालकर परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया। छापेमारी की कार्रवाई सुबह छह से साढ़े सात बजे तक चली लेकिन इसके महज 15 मिनट बाद ही एफआईआर को न्यायालय ने भी माना कि व्यवहारिक रूप से यह संभव नहीं है। बरामदगी करने वाली टीम के अगुवा प्रभारी निरीक्षक बाल मुकुंद मिश्रा के बयान और फर्द में अंकित तथ्य में विरोधाभास, प्रारंभिक विवेचक एसआई अफरोज आलम की तरफ से की गई विवेचना में कई खामियों सहित अन्य बिंदुओं को देखते हुए न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ हेराेइन तस्करी या उसमें संलिप्तता की बात साबित नहीं कर पाया है। फैसले पर सुनवाई के दौरान आठ आरोपी जमानत और दो जिला कारागार में निरूद्ध पाए गए। सभी को दोषमुक्त करारते हुए जमानतनामे-बंधपत्र निरस्त करने और जेल में बंद आरोपियों की रिहाई का परवाना जारी करने का आदेश पारित किया गया।
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अभियोजन के मुताबिक 10 फरवरी 2023 की सुबह छह बजे तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राॅबटर्सगंज बालमुकुंद मिश्रा की अगुवाई वाली टीम ने जैत गांव के पास से सरगना बताए जा रहे राजस्वकर्मी सहित नौ को 2.180 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। एक आरोपी फरार हो गया था। विवेचना के बाद गोपाल उर्फ विमल राम, राज भारती, सुधीर कुमार राम उर्फ विधायक उर्फ सुनील, हरिश्चंद्र उर्फ मन्नर कन्नौजिया, बाबूनंदन, अवधेश राम, शैलेश कुमार राम उर्फ गोपी, सोनू उर्फ बंटी, सोनू और चांदनी के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य का दावा करते हुए चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की गई। एक अन्य आरोपी बबलू खान के खिलाफ विवेचना जारी रखी गई। जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल थी, उन पर न्यायालय ने सुनवाई शुरू की। पता चला कि एक आरोपी के पास से महज 1.15 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी लेकिन उसके पास से 115 ग्राम बरामदगी का दावा करने के साथ ही उसमें से पांच ग्राम नमूना निकालकर परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया। छापेमारी की कार्रवाई सुबह छह से साढ़े सात बजे तक चली लेकिन इसके महज 15 मिनट बाद ही एफआईआर को न्यायालय ने भी माना कि व्यवहारिक रूप से यह संभव नहीं है। बरामदगी करने वाली टीम के अगुवा प्रभारी निरीक्षक बाल मुकुंद मिश्रा के बयान और फर्द में अंकित तथ्य में विरोधाभास, प्रारंभिक विवेचक एसआई अफरोज आलम की तरफ से की गई विवेचना में कई खामियों सहित अन्य बिंदुओं को देखते हुए न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ हेराेइन तस्करी या उसमें संलिप्तता की बात साबित नहीं कर पाया है। फैसले पर सुनवाई के दौरान आठ आरोपी जमानत और दो जिला कारागार में निरूद्ध पाए गए। सभी को दोषमुक्त करारते हुए जमानतनामे-बंधपत्र निरस्त करने और जेल में बंद आरोपियों की रिहाई का परवाना जारी करने का आदेश पारित किया गया।
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