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Sultanpur News: आलू और सरसों की फसल पर पाले का असर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 07 Jan 2026 11:55 PM IST
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भदैंया क्षेत्र में आलू की फसल में लगा झुलसा रोग।
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सुल्तानपुर। जनवरी की शीतलहर और कोहरे ने किसानों को परेशान कर रखा है। सरसों के फूल झड़ने लगे हैं। जिससे पैदावार पर असर पड़ना तय है। करीब 5200 हेक्टेयर में बोई गई आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा बढ़ गया है। अरहर की फसल पर भी व्यापक असर देखा जा रहा है।
जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी के अनुसार जिले में 8632 हेक्टेयर में सरसों की फसल बोई गई है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि कबंडाजेम-75 का घोल बनाकर खेतों पर छिड़काव करें। एक एकड़ में 300 लीटर पानी में दवा मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। एक लीटर पानी में दो ग्राम दवा इस्तेमाल की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि कोहरे सक चना, मटर और गेहूं की फसल पर भी पाले का असर पड़ सकता है। पत्तियां सूखने लगती हैं। इसलिए बचाव के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करने और खेतों के चारों कोनों में घास-फूस जलाकर हल्का धुआं करने की सलाह दी गई है।
सरसों में रोग का असर बढ़ने की संभावना
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि शीतलहरी और कोहरे की वजह से सरसों की फसल गेहूं में माहू रोग लग जाता है। इसे कीट भी जी कहा जाता है। यह पौधे में फूल से लेकर नीचे तक पहुंचता है। कोई भी कीटनाशक का घोल बनाकर सरसों मटर की फसल में पौध पर ऊपर से नीचे तक छिड़काव किया जाए तो कीट रोग से फसल को बचाया जा सकता है। चना और मटर की फसलों पर भी कृषि विभाग ने दवा छिड़काव किए जाने की जरूरत बताई है।
फसलों को नुकसान से बचाने के उपाय
-हल्की सिंचाई: शाम के समय खेत में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान बना रहता है। इससे पाले का असर कम होता है।
-दवाओं का छिड़काव: आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए मैंकोजेब जैसे फफूंद नाशक का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव किया जा सकता है। सरसों में माहू कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरो पिरोफास या इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव फायदेमंद होता है।
-धुआं करना: रात में खेतों के किनारे घास-फूस या कूड़ा जलाकर धुआं करने से भी पाले का प्रभाव कम किया जा सकता है। उचित जल निकासी सुनिश्चित करें कि खेतों में पानी जमा न हो क्योंकि रुका हुआ पानी जड़ों में सड़न पैदा कर सकता है।
रबी 2025-26 का क्षेत्रफल
गेहूं-1,16,114 हेक्टेयर
मटर-6000 हेक्टेयर
मसूर-6001 हेक्टेयर
सरसों- 8632
( कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़े)
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जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी के अनुसार जिले में 8632 हेक्टेयर में सरसों की फसल बोई गई है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि कबंडाजेम-75 का घोल बनाकर खेतों पर छिड़काव करें। एक एकड़ में 300 लीटर पानी में दवा मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। एक लीटर पानी में दो ग्राम दवा इस्तेमाल की जा सकती है।
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उन्होंने बताया कि कोहरे सक चना, मटर और गेहूं की फसल पर भी पाले का असर पड़ सकता है। पत्तियां सूखने लगती हैं। इसलिए बचाव के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करने और खेतों के चारों कोनों में घास-फूस जलाकर हल्का धुआं करने की सलाह दी गई है।
सरसों में रोग का असर बढ़ने की संभावना
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि शीतलहरी और कोहरे की वजह से सरसों की फसल गेहूं में माहू रोग लग जाता है। इसे कीट भी जी कहा जाता है। यह पौधे में फूल से लेकर नीचे तक पहुंचता है। कोई भी कीटनाशक का घोल बनाकर सरसों मटर की फसल में पौध पर ऊपर से नीचे तक छिड़काव किया जाए तो कीट रोग से फसल को बचाया जा सकता है। चना और मटर की फसलों पर भी कृषि विभाग ने दवा छिड़काव किए जाने की जरूरत बताई है।
फसलों को नुकसान से बचाने के उपाय
-हल्की सिंचाई: शाम के समय खेत में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान बना रहता है। इससे पाले का असर कम होता है।
-दवाओं का छिड़काव: आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए मैंकोजेब जैसे फफूंद नाशक का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव किया जा सकता है। सरसों में माहू कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरो पिरोफास या इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव फायदेमंद होता है।
-धुआं करना: रात में खेतों के किनारे घास-फूस या कूड़ा जलाकर धुआं करने से भी पाले का प्रभाव कम किया जा सकता है। उचित जल निकासी सुनिश्चित करें कि खेतों में पानी जमा न हो क्योंकि रुका हुआ पानी जड़ों में सड़न पैदा कर सकता है।
रबी 2025-26 का क्षेत्रफल
गेहूं-1,16,114 हेक्टेयर
मटर-6000 हेक्टेयर
मसूर-6001 हेक्टेयर
सरसों- 8632
( कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़े)
