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Sultanpur News: लाइव फेस वेरिफिकेशन के बगैर टीबी मरीजों को नहीं मिलेगा पोषणभत्ता
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:13 AM IST
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सुल्तानपुर। टीबी मरीजों के लिए पोषण भत्ता प्राप्त करने के नियमों में बदलाव किया गया है। उन्हें यह भत्ता केवल लाइव फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से पहचान सत्यापित करने के बाद ही मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग के जारी निर्देश के मुताबिक बिना सत्यापन के भत्ता जारी नहीं होगा।
नई व्यवस्था के तहत सिर्फ मरीज के नाम ही खाता खोलवाया जाएगा। पहले बीमार बच्चों के माता-पिता के नाम खाता खोलवाकर पोषण भत्ता दे दिया जाता था। ग्रामीण बैंक व डाकखाने का खाता मान्य नहीं होगा। इनमें मरीजों का खाता होगा तो अब दूसरे बैंक में खाता खुलवाकर विभाग में जमा करना होगा। नई प्रणाली का लक्ष्य फर्जीवाड़े पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना है। जहां से मरीजों की दवा शुरू हुई होगी, वहीं सत्यापन कराने जाना पड़ेगा।
पोषण भत्ता टीबी मरीजों के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उनके शीघ्र स्वस्थ होने में सहायक है। जिले में इस समय 2109 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है।
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पारदर्शिता और जवाबदेही
सीएमओ डॉ.भारत भूषण ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पोषण भत्ता वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। लाइव फेस वेरिफिकेशन से फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजना से बाहर किया जा सकेगा। लगातार सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक लगभग 250 से अधिक मरीजों का सत्यापन हो चुका है।
नई व्यवस्था के तहत सिर्फ मरीज के नाम ही खाता खोलवाया जाएगा। पहले बीमार बच्चों के माता-पिता के नाम खाता खोलवाकर पोषण भत्ता दे दिया जाता था। ग्रामीण बैंक व डाकखाने का खाता मान्य नहीं होगा। इनमें मरीजों का खाता होगा तो अब दूसरे बैंक में खाता खुलवाकर विभाग में जमा करना होगा। नई प्रणाली का लक्ष्य फर्जीवाड़े पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना है। जहां से मरीजों की दवा शुरू हुई होगी, वहीं सत्यापन कराने जाना पड़ेगा।
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पोषण भत्ता टीबी मरीजों के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उनके शीघ्र स्वस्थ होने में सहायक है। जिले में इस समय 2109 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही
सीएमओ डॉ.भारत भूषण ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पोषण भत्ता वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। लाइव फेस वेरिफिकेशन से फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजना से बाहर किया जा सकेगा। लगातार सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक लगभग 250 से अधिक मरीजों का सत्यापन हो चुका है।