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Unnao News: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे... 24 घंटे में चार जगह और धंसा
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फोटो-30- आजाद मार्ग टोल बूथथेस पांच किमी आगे करौंदी गांव के पास उखड़ी सड़क की मरम्मत करते कर्मच
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उन्नाव। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुई लापरवाही और जगह-जगह धंस रही सड़क, मुसाफिरों के लिए मुसीबत बनी है। लोकार्पण के 12वें दिन से ही दम तोड़ने लगी सड़क बृहस्पतिवार तक 61 जगह धंसी। 24 घंटे में चार और जगह सड़क और दब गई। निर्माण एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत पूरी होने में दो से तीन दिन का समय और लगेगा।
कानपुर से लखनऊ तक 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की हर एक किलोमीटर सड़क बनाने पर 66 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कुल 4200 करोड़ रुपये से बना यह एक्सप्रेसवे लगातार धंसने से गुणवत्ता और तकनीक को लेकर सवालों में हैं। रविवार को हुई बारिश के बाद सोमवार सुबह तक कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर एक्सप्रेसवे में चार और स्थानों पर सड़क दब गई। आजाद मार्ग टोल प्लाजा से तीन किमी आगे बंथर के पास करीब बीस मीटर सड़क उखड़ गई है। पूरी सड़क में गिट्टी फैल गईं हैं। टोल प्लाजा से करीब पांच किलोमीटर आगे करौंदी गांव के सामने सड़क की दो लेन धंस गईं हैं। इंजीनियर, सड़क के इस हिस्से को उखाड़ कर नए सिरे से सड़क बनाकर पैचवर्क कर रहे हैं।
वहीं लखनऊ की तरफ किलोमीटर संख्या 29.4 से 29.9 तक हसनापुर गांव के सामने 500 मीटर सड़क धंस गई है। सोमवार को 29.4 से 29.6 किमी संख्या तक की 200 मीटर सड़क बन गई इसके आगे की बनाने का काम जारी है।
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नालियों को समतल करने और मिट्टी हटाने का काम शुरू
अचलगंज। लगातार अलग-अलग स्थानों पर धंस रहे एक्सप्रेसवे से गुणवत्ता पर उठे सवालों में इसके ड्रेनेज सिस्टम की खामियां सामने आने के बाद अब सुधार की कवायद शुरू हुई है।
नालियां सड़क से ऊंची और सीधा निकास न होने से नालियां चोक होने से एक्सप्रेसवे की सड़क जलभराव हो रहा है। बारिश का पानी सड़क पर भरने से मिट्टी धंसी और नाली के बजाए दूसरे स्थानों से निकलने के कारण स्लोप की मिट्टी बह जाने से सड़क खोखली हुई और धंसती जा रही है। आईआईटी की जांच टीम ने टीम ने इस खामियों पर उजागर किया तो नालियों को तोड़कर सीधा और नीचे किया जा रहा है। (संवाद)
22 दिन ही चले बड़े वाहन, छलनी हो गया एक्सप्रेसवे
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भारी वाहन केवल 22 दिन ही चले। कानपुर से लखनऊ की तरफ से खनिज व अन्य माल लदे भारी वाहन, 13 जुलाई को लोकार्पण के दूसरे दिन यानी 14 जुलाई से चले। पहले दो दिन भारी वाहन बहुत कम रहे लेकिन इसके बाद बढ़ने लगे। एक्सप्रेसवे भारी वाहनों का बोझ नहीं सह पाया और लोकार्पण के 12वें ही दिन धंसने लगी।
एनएचएआई से लेकर निर्माण एजेंसी पीएनसी तक के अधिकारियों में हलचल मच गई थी। किसी तरह मरम्मत का काम शुरू किया गया लेकिन एक के बाद एक कई स्थानों पर धंस गया। 29 जुलाई को फिर किलोमीटर संख्या 64 पर 200 मीटर में एक्सप्रेसवे धंस गया। वाहनों को लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन से ही निकाला जाने लगा। लेकिन जब वह लेन भी धंसने लगी तो 6 अगस्त को एनएचएआई ने कानपुर की तरफ से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों पर रोक लगा दी, जो अबतक जारी है।
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कानपुर से लखनऊ तक 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की हर एक किलोमीटर सड़क बनाने पर 66 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कुल 4200 करोड़ रुपये से बना यह एक्सप्रेसवे लगातार धंसने से गुणवत्ता और तकनीक को लेकर सवालों में हैं। रविवार को हुई बारिश के बाद सोमवार सुबह तक कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर एक्सप्रेसवे में चार और स्थानों पर सड़क दब गई। आजाद मार्ग टोल प्लाजा से तीन किमी आगे बंथर के पास करीब बीस मीटर सड़क उखड़ गई है। पूरी सड़क में गिट्टी फैल गईं हैं। टोल प्लाजा से करीब पांच किलोमीटर आगे करौंदी गांव के सामने सड़क की दो लेन धंस गईं हैं। इंजीनियर, सड़क के इस हिस्से को उखाड़ कर नए सिरे से सड़क बनाकर पैचवर्क कर रहे हैं।
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वहीं लखनऊ की तरफ किलोमीटर संख्या 29.4 से 29.9 तक हसनापुर गांव के सामने 500 मीटर सड़क धंस गई है। सोमवार को 29.4 से 29.6 किमी संख्या तक की 200 मीटर सड़क बन गई इसके आगे की बनाने का काम जारी है।
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नालियों को समतल करने और मिट्टी हटाने का काम शुरू
अचलगंज। लगातार अलग-अलग स्थानों पर धंस रहे एक्सप्रेसवे से गुणवत्ता पर उठे सवालों में इसके ड्रेनेज सिस्टम की खामियां सामने आने के बाद अब सुधार की कवायद शुरू हुई है।
नालियां सड़क से ऊंची और सीधा निकास न होने से नालियां चोक होने से एक्सप्रेसवे की सड़क जलभराव हो रहा है। बारिश का पानी सड़क पर भरने से मिट्टी धंसी और नाली के बजाए दूसरे स्थानों से निकलने के कारण स्लोप की मिट्टी बह जाने से सड़क खोखली हुई और धंसती जा रही है। आईआईटी की जांच टीम ने टीम ने इस खामियों पर उजागर किया तो नालियों को तोड़कर सीधा और नीचे किया जा रहा है। (संवाद)
22 दिन ही चले बड़े वाहन, छलनी हो गया एक्सप्रेसवे
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भारी वाहन केवल 22 दिन ही चले। कानपुर से लखनऊ की तरफ से खनिज व अन्य माल लदे भारी वाहन, 13 जुलाई को लोकार्पण के दूसरे दिन यानी 14 जुलाई से चले। पहले दो दिन भारी वाहन बहुत कम रहे लेकिन इसके बाद बढ़ने लगे। एक्सप्रेसवे भारी वाहनों का बोझ नहीं सह पाया और लोकार्पण के 12वें ही दिन धंसने लगी।
एनएचएआई से लेकर निर्माण एजेंसी पीएनसी तक के अधिकारियों में हलचल मच गई थी। किसी तरह मरम्मत का काम शुरू किया गया लेकिन एक के बाद एक कई स्थानों पर धंस गया। 29 जुलाई को फिर किलोमीटर संख्या 64 पर 200 मीटर में एक्सप्रेसवे धंस गया। वाहनों को लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन से ही निकाला जाने लगा। लेकिन जब वह लेन भी धंसने लगी तो 6 अगस्त को एनएचएआई ने कानपुर की तरफ से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों पर रोक लगा दी, जो अबतक जारी है।

फोटो-30- आजाद मार्ग टोल बूथथेस पांच किमी आगे करौंदी गांव के पास उखड़ी सड़क की मरम्मत करते कर्मच