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Unnao News: पांच साल बाद भी तीन लाख लोगों को शुद्ध पानी की आस
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फोटो-17-अमृत योजना की भूमिगत पाइप लाइन टूटने से पुलिस लाइन रोड पर होता पानी का रिसाव। संवाद
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उन्नाव। पांच साल से निर्माणाधीन 264 करोड़ की अटल मिशन ऑफ रेज्यूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना से इस बार भी भीषण गर्मी में तीन लाख शहरवासियों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना में लीकेज और फाल्ट बाधा बने हैं। दिशा की बैठक में भी यह मुद्दा उठा तो सांसद ने जल्द से जल्द योजना को पूरी तरह से चालू करने का निर्देश दिया है।
शहर के सभी 32 वार्डों में पहले चरण में 30,298 घरों और नगर पालिका गंगाघाट के सभी वार्डों में नल से शुद्ध जल पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में 264 करोड़ की योजना मंजूर हुई थी। गंगा के पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके हर घर तक जलापूर्ति करनी है। योजना को 2020 तक पूरा करना लेकिन कभी कोविड तो कभी बजट की समस्या से योजना बार-बार अटकती रही। हालांकि जल निगम का दावा है कि शहर के 10 में से सात जोन का काम पूरा हो चुका है और चार जोन नगर पालिका को हैंडओवर भी हो चुके हैं। तीन को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है और तीन की टेस्टिंग आखिरी चरण में है। प्रतिदिन सुबह-शाम दो-दो घंटे पूरे प्रेशर से पानी भी छोड़ा जा रहा है।
दूसरी तरफ जलापूर्ति वाले क्षेत्रों और नए जोन की टेस्टिंग के दौरान दो महीने में 23 जगह पाइप लाइनों में छोटे-बड़े लीकेज और फॉल्ट हुए हैं। यही वजह है कि नगर पालिका भी योजना को हाथ में लेने से कतरा रही है। जल निगम से एक साल तक रखरखाव और मरम्मत की शर्त पर पालिका ने चार जोन की जिम्मेदारी ली है। पालिका के अधिकारी बाकी बचे जोन में भी टेस्टिंग रिपोर्ट का सत्यापन कराने के बाद ही जिम्मेदारी लेने की बात कह रहे हैं।
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पालिका का दावा, पुराने संसाधनों के सहारे शहर को दे रहे पानी
नगर पालिका जलकल विभाग के अनुसार अमृत से शहर के किसी भी जोन में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। टेस्टिंग में ही तमाम जगह लीकेज हो रहे हैं। इससे पालिका पुरानी व्यवस्था के तहत 24 ट्यूबवेलों से सुबह-शाम, पांच से छह घंटे जलापूर्ति कर रहा है। जलापूर्ति दुरुस्त रखने के लिए ट्यूबवेलों के स्पेयर पार्ट्स पर 24.96 लाख, जलापूर्ति पाइप लाइनों की मरम्मत पर 45 लाख, सभी 32 वार्डों व सार्वजनिक स्थानों सहित 50 मिनी टंकी व सबमर्सिबल लगाने पर 50 लाख रुपये, ट्यूबवेल में क्लोरीन डोजर लगाने पर 7.50 लाख और नलकूप पंप रूम पर 30 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
तकनीकी खामी
नगर पालिका के जलकल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जल निगम की निर्माण एजेंसी ने हर जोन की मुख्य पाइप लाइन में केवल एक-एक वॉल्व लगाया है। इससे हल्की से लीकेज या कोई अन्य खराबी होने पर पूरे जोन की जलापूर्ति रोकनी पड़ती है जबकि नगर पालिका ने शहर में हर बड़े मोहल्ले में 250 से अधिक छोटे वॉल्व लगा रखे हैं। कहीं भी फॉल्ट होने पर उसी गली या मोहल्ले का पानी बंद किया जाता है जिससे जलापूर्ति प्रभावित नहीं होती। टंकियों (ओवरहेड टैंक) में पानी चढ़ाने के लिए प्लॉस्टिक के पाइप लगाए गए हैं जो पानी का दबाव बढ़ते ही फट जाते हैं।
वर्जन...
भूमिगत पाइप लाइनों में लीकेज की समस्या हैं। जल निगम जिन जोन की देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी ले रहा है उन्हें हैंडओवर लिया जा रहा है। जल निगम से जो फाइल आती है उस जोन को चेक कराने के बाद ही हैंडओवर लिया जा रहा है। अभी तक चार जोन लिए गए हैं। हालांकि, सुबह-शाम केवल दो घंटे जलापूर्ति से शहर में प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 140 लीटर पानी की जरूरत को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए पालिका की जलापूर्ति व्यवस्था को समानांतर चलाना पड़ रहा है। -एसके गौतम, ईओ नगर पालिका
शहर के दस में सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और तीन अंतिम चरण में है। प्रेशर के साथ सुबह और शाम दो-दो घंटे जलापूर्ति की जा रही है। जहां भी लीकेज होते हैं उन्हें तत्काल ठीक कराया जाता है। जिन मोहल्लों में मुख्य पाइप लाइन आपस में जुड़ी नहीं हैं, उनकी भी जानकारी कर जोड़ा जा रहा है।-अमित कुमार, एई जल निगम
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फोटो-21-राजेश चंद्र मिश्रा
कभी-कभी आता है पानी
मोतीनगर निवासी राजेशचंद्र मिश्रा ने बताया कि अमृत योजना से शुद्ध पानी मिलने की उम्मीद करते वर्षों बीत गए। कभी-कभी पानी आता है लेकिन जगह-जगह लीकेज होने से पानी गंदा और दुर्गंध होने से उपयोग में नहीं आता।
फोटो-22- सृष्टि रस्तोगी
दो साल भी टोटी से नहीं टपकी बूंद
स्टेशन रोड निवासी से सृष्टि रस्तोगी ने बताया कि अमृत योजना से अबतक जलापूर्ति नहीं हो पाई है। घर में दो साल पहले टोटी लगाई गई थी लेकिन अबतक एक बूंद नहीं टपकी। अब तो शुद्ध पानी की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं।
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शहर के सभी 32 वार्डों में पहले चरण में 30,298 घरों और नगर पालिका गंगाघाट के सभी वार्डों में नल से शुद्ध जल पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में 264 करोड़ की योजना मंजूर हुई थी। गंगा के पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके हर घर तक जलापूर्ति करनी है। योजना को 2020 तक पूरा करना लेकिन कभी कोविड तो कभी बजट की समस्या से योजना बार-बार अटकती रही। हालांकि जल निगम का दावा है कि शहर के 10 में से सात जोन का काम पूरा हो चुका है और चार जोन नगर पालिका को हैंडओवर भी हो चुके हैं। तीन को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है और तीन की टेस्टिंग आखिरी चरण में है। प्रतिदिन सुबह-शाम दो-दो घंटे पूरे प्रेशर से पानी भी छोड़ा जा रहा है।
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दूसरी तरफ जलापूर्ति वाले क्षेत्रों और नए जोन की टेस्टिंग के दौरान दो महीने में 23 जगह पाइप लाइनों में छोटे-बड़े लीकेज और फॉल्ट हुए हैं। यही वजह है कि नगर पालिका भी योजना को हाथ में लेने से कतरा रही है। जल निगम से एक साल तक रखरखाव और मरम्मत की शर्त पर पालिका ने चार जोन की जिम्मेदारी ली है। पालिका के अधिकारी बाकी बचे जोन में भी टेस्टिंग रिपोर्ट का सत्यापन कराने के बाद ही जिम्मेदारी लेने की बात कह रहे हैं।
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पालिका का दावा, पुराने संसाधनों के सहारे शहर को दे रहे पानी
नगर पालिका जलकल विभाग के अनुसार अमृत से शहर के किसी भी जोन में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। टेस्टिंग में ही तमाम जगह लीकेज हो रहे हैं। इससे पालिका पुरानी व्यवस्था के तहत 24 ट्यूबवेलों से सुबह-शाम, पांच से छह घंटे जलापूर्ति कर रहा है। जलापूर्ति दुरुस्त रखने के लिए ट्यूबवेलों के स्पेयर पार्ट्स पर 24.96 लाख, जलापूर्ति पाइप लाइनों की मरम्मत पर 45 लाख, सभी 32 वार्डों व सार्वजनिक स्थानों सहित 50 मिनी टंकी व सबमर्सिबल लगाने पर 50 लाख रुपये, ट्यूबवेल में क्लोरीन डोजर लगाने पर 7.50 लाख और नलकूप पंप रूम पर 30 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
तकनीकी खामी
नगर पालिका के जलकल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जल निगम की निर्माण एजेंसी ने हर जोन की मुख्य पाइप लाइन में केवल एक-एक वॉल्व लगाया है। इससे हल्की से लीकेज या कोई अन्य खराबी होने पर पूरे जोन की जलापूर्ति रोकनी पड़ती है जबकि नगर पालिका ने शहर में हर बड़े मोहल्ले में 250 से अधिक छोटे वॉल्व लगा रखे हैं। कहीं भी फॉल्ट होने पर उसी गली या मोहल्ले का पानी बंद किया जाता है जिससे जलापूर्ति प्रभावित नहीं होती। टंकियों (ओवरहेड टैंक) में पानी चढ़ाने के लिए प्लॉस्टिक के पाइप लगाए गए हैं जो पानी का दबाव बढ़ते ही फट जाते हैं।
वर्जन...
भूमिगत पाइप लाइनों में लीकेज की समस्या हैं। जल निगम जिन जोन की देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी ले रहा है उन्हें हैंडओवर लिया जा रहा है। जल निगम से जो फाइल आती है उस जोन को चेक कराने के बाद ही हैंडओवर लिया जा रहा है। अभी तक चार जोन लिए गए हैं। हालांकि, सुबह-शाम केवल दो घंटे जलापूर्ति से शहर में प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 140 लीटर पानी की जरूरत को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए पालिका की जलापूर्ति व्यवस्था को समानांतर चलाना पड़ रहा है। -एसके गौतम, ईओ नगर पालिका
शहर के दस में सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और तीन अंतिम चरण में है। प्रेशर के साथ सुबह और शाम दो-दो घंटे जलापूर्ति की जा रही है। जहां भी लीकेज होते हैं उन्हें तत्काल ठीक कराया जाता है। जिन मोहल्लों में मुख्य पाइप लाइन आपस में जुड़ी नहीं हैं, उनकी भी जानकारी कर जोड़ा जा रहा है।-अमित कुमार, एई जल निगम
फोटो-21-राजेश चंद्र मिश्रा
कभी-कभी आता है पानी
मोतीनगर निवासी राजेशचंद्र मिश्रा ने बताया कि अमृत योजना से शुद्ध पानी मिलने की उम्मीद करते वर्षों बीत गए। कभी-कभी पानी आता है लेकिन जगह-जगह लीकेज होने से पानी गंदा और दुर्गंध होने से उपयोग में नहीं आता।
फोटो-22- सृष्टि रस्तोगी
दो साल भी टोटी से नहीं टपकी बूंद
स्टेशन रोड निवासी से सृष्टि रस्तोगी ने बताया कि अमृत योजना से अबतक जलापूर्ति नहीं हो पाई है। घर में दो साल पहले टोटी लगाई गई थी लेकिन अबतक एक बूंद नहीं टपकी। अब तो शुद्ध पानी की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं।

फोटो-17-अमृत योजना की भूमिगत पाइप लाइन टूटने से पुलिस लाइन रोड पर होता पानी का रिसाव। संवाद

फोटो-17-अमृत योजना की भूमिगत पाइप लाइन टूटने से पुलिस लाइन रोड पर होता पानी का रिसाव। संवाद