गजब है हाल: चिकित्सकों की लापरवाही से 365 दिनों में 10 की मौत, एक छोटी गलती और उजड़ गई दुनिया; पढ़ें केस
Varanasi News: माैत और हादसों के कई मामले काफी चर्चा में रहे। पीड़ित परिजनों ने न्याय के लिए अदालत और पुलिस से सहायता मांगी। कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई भी की गई है।
विस्तार
किसी की तबियत खराब होने पर भगवान के बाद डॉक्टर ही याद आते हैं। डॉक्टर को लोगों ने 'धरती के भगवान' की संज्ञा दी है। लेकिन जब वही भगवान लोगों के जान से खिलवाड़ करने लगें, तो भरोसा किस पर किया जाए।
बनारस में पिछले एक साल में 10 ऐसे केस सामने आए, जब मरीजों के इलाज में लापरवाही सामने आई। अधिकतर मामलों में मरीजों की मौत हो गई , तो कई मामले ऐसे भी थे जिसमें मरीजों की जान जाते जाते बची। कुछ मामलों में पुलिस में प्राथमिकी तो कुछ में कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई। कुछ मामले ऐसे भी थे, जिनमें पीड़ित पक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख दिया।
ये ऐसे मामले थे, जब किसी ने अपना इकलौता चिराग खोया, तो किसी का सुहाग उजड़ गया। वाराणसी में पिछले 12 महीनों में चिकित्सा लापरवाही ने कई हंसते-खेलते परिवारों को मातम में बदल दिया। 'भगवान' कहे जाने वाले डॉक्टरों की एक छोटी सी चूक ने किसी की पूरी दुनिया उजाड़ दी।
केस - 1
जिला अस्पताल में सोमवार (2 मार्च 2026) को टकटकपुर निवासी गुड़िया चौहान (20) की मौत के बाद दो घंटे हंगामा हुआ। आरोप था कि नर्स वार्ड में तैनात नर्स गीता मौर्य को मरीज की हालत के बारे में बताया गया, लेकिन उसने इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को समय से सूचना नहीं दी। सीएमएस डॉ. आर. एस. राम ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
केस - 2
25 जनवरी 2026 को चौबेपुर के डुबकियां स्थित एस एन हॉस्पिटल में गाज़ीपुर के हवलदार यादव (55 वर्ष) की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने अस्पताल के डॉ. सौरभ सिंह और डॉ. रितेश यादव के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
केस - 3
19 अगस्त 2025 को कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल में मदनपुरा की रिजवाना अपने सास के साथ डिलीवरी के लिए आई थी। यहां दर्द की हालत में भी अस्पताल की स्टाफ नर्स ने उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान खूब दौड़ाया और अंत में केस सिरियस कहते हुए बीएचयू रेफर कर दिया। महिला बाहर पहुंचती इससे पहले ओपीडी की चौखट के बाहर पथरीले बेंच पर ही उसने अपने तिमादारों और आसपास के लोगों की मदद से एक बच्ची को जन्म दे दिया। आनन फानन में महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद कई स्टाफ को नोटिस जारी किया गया था।
केस - 4
23 अप्रैल 2025 को आजमगढ़ के रिटायर्ड जवान सुजीत कुमार सिंह का चितईपुर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल में ऑपरेशन हुआ था। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद उन्हें फिर डॉक्टर को दिखाया गया। जहां डॉक्टर्स की टीम ने उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद लखनऊ में इलाज के दौरान सुजीत की मौत हो गई। सुजीत के भाई अमित ने कोर्ट में अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज किया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए 25 फरवरी 2026 को अस्पताल के डॉ. अनुराग दीक्षित और मालिक डॉ. एस. के. सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
तारीख - मामला
- 2 मार्च 2026 - जिला अस्पताल में 2 मार्च 2026 को महिला की मौत के बाद हंगामा, नर्स पर लापरवाही का आरोप, जांच कमेटी गठित
- 23 अप्रैल 2025 - आजमगढ़ के रिटायर्ड जवान सुजीत कुमार सिंह के ऑपरेशन में गड़बड़ी, चिकित्सकों पर प्राथमिकी
- 19 अगस्त 2025 - जिला महिला अस्पताल में महिला ने ओपीडी के गेट पर बच्चे को जन्म दिया, कर्मचारियों को नोटिस
- 25 जनवरी 2026 - चौबेपुर के अस्पताल में गाजीपुर के मरीज की इलाज के दौरान मौत, दो चिकित्सकों के खिलाफ प्राथमिकी
- 8 अप्रैल 2025 - पहड़िया स्थित प्राइवेट अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन कराने गई चौबेपुर की सरोजा की मौत, चिकित्सक के खिलाफ प्राथमिकी
- 26 नवंबर 2025 - मिर्जामुराद में मिर्जापुर के महिला मरीज की इलाज के दौरान हालत बिगड़ी, दूसरे अस्पताल ले जाते समय मौत
- 4 जनवरी 2026 - फूलपुर स्थित वर्मा क्लिनिक में इलाज के दौरान आठ वर्षीय पीयूष राजभर की मौत, परिजनों ने किया चक्का जाम
- 5 नवंबर 2026 - राजातालाब के निजी अस्पताल में सर्दी जुकाम का इलाज कराने गई दो माह की बच्ची की मौत, परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी
- 31 दिसंबर 2025 - लंका के साकेतनगर स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, पुलिस से शिकायत
- 6 दिसंबर 2025 - अर्दली बाजार स्थित एक अस्पताल में चोलापुर के कमलेश कुमार सिंह (47) की हार्निया और हाइड्रोसील के ऑपरेशन के बाद मौत, डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ शिकायत
इलाज के साथ मरीजों और परिजनों का भरोसा जीतें चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक एनडी शर्मा का कहना है कि अस्पतालों में मरीज भरोसा करके आता है कि उसे इलाज सही तरीके से मिलेगा। लेकिन जब वहीं इलाज में लापरवाही होती है, तो मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा टूट जाता है। कई बार डॉक्टर अच्छे से इलाज के बावजूद परिजनों का भरोसा नहीं जीत पाते हैं, जिसके कारण परिजन पुलिस अथवा न्यायालय का भरोसा करते हैं। चिकित्सकों को चाहिए कि वह मरीजों से नरमी से पेश आएं।
अस्पताल में मरीजों की मौत के मामले में शिकायत होने पर बकायदा जांच होती है। देखा जाता है कि मरीज जिस समय अस्पताल आया उस समय उसकी स्थिति क्या थी, उसे कौन-कौन सी दवाएं दी गईं। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी होती है। - एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।
