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Varanasi News: जूडो में यलो बेल्ट परीक्षा में सफल हुईं 12 बालिका खिलाड़ी, 13 बालक भी पास
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जूडो संघ की ओर से लोढ़ान स्थित बाबू आरएन सिंह इंडोर हॉल में रविवार को जूडो कलर बेल्ट परीक्षा हुई। इसमें 150 से ज्यादा खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। छह राष्ट्रीय रेफरी ने करीब पांच घंटे में अलग-अलग आयुवर्ग की परीक्षा संपन्न कराई। 12 बालिका और 13 बालक समेत कुल 25 खिलाड़ियों ने येलो बेल्ट परीक्षा में सफलता पाई।
वाराणसी जूडो संघ के सचिव लाल कुमार ने बताया कि जूडो आत्मरक्षा का हथियार है। इसके जरिये आधी आबादी अब मजबूती के साथ जूडो जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान खेल में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रहीं हैं। बालक वर्ग में रुद्र प्रताप ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑरेंज बेल्ट पाया। राष्ट्रीय रेफरी अश्वनी कुमार गुजर ने परीक्षा के बाद बताया कि प्रतिभागियों में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा ताकि वे वाराणसी का नाम रोशन कर सकें। शहर में इंडोर स्पोर्ट्स हॉल की उपलब्धता से खिलाड़ियों को हर मौसम में नियमित अभ्यास का लाभ मिलेगा।
जिला ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी में अद्भुत सहनशक्ति, मेहनत और संघर्ष की भावना निहित है। यही विशेषताएं जूडो जैसे खेल में सफलता की कुंजी हैं। जूडो केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा का सशक्त माध्यम है।
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वाराणसी जूडो संघ के सचिव लाल कुमार ने बताया कि जूडो आत्मरक्षा का हथियार है। इसके जरिये आधी आबादी अब मजबूती के साथ जूडो जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान खेल में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रहीं हैं। बालक वर्ग में रुद्र प्रताप ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑरेंज बेल्ट पाया। राष्ट्रीय रेफरी अश्वनी कुमार गुजर ने परीक्षा के बाद बताया कि प्रतिभागियों में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा ताकि वे वाराणसी का नाम रोशन कर सकें। शहर में इंडोर स्पोर्ट्स हॉल की उपलब्धता से खिलाड़ियों को हर मौसम में नियमित अभ्यास का लाभ मिलेगा।
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जिला ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी में अद्भुत सहनशक्ति, मेहनत और संघर्ष की भावना निहित है। यही विशेषताएं जूडो जैसे खेल में सफलता की कुंजी हैं। जूडो केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा का सशक्त माध्यम है।
